असम की महिला ने Global Warming से निजात पाने का निकाला अनोखा तरीका

Daily news network Posted: 2018-04-07 13:47:05 IST Updated: 2018-08-21 12:04:22 IST
असम की महिला ने  Global Warming से निजात पाने का निकाला अनोखा तरीका
  • ग्लोबल वार्मिंग का खतरा पूरे विश्व में मंडरा रहा है। इस समस्या से निपटने आैर उपायों पर गहन सर्वेक्षण करने में पूरा विश्व जुटा हुआ हैं, तो वहीं असम की रहने वाली कारोबी पाठक ने ग्लोबल वार्मिंग को नियंत्रित करने का अनोखा तरीका इजात कर सबको चकित कर दिया है।

ग्लोबल वार्मिंग का खतरा पूरे विश्व में मंडरा रहा है। इस समस्या से निपटने आैर उपायों पर गहन सर्वेक्षण करने में पूरा विश्व जुटा हुआ हैं, तो वहीं असम की रहने वाली कारोबी पाठक ने ग्लोबल वार्मिंग को नियंत्रित करने का अनोखा तरीका इजात कर सबको चकित कर दिया है। कारोबी ने घास की एक प्रजाति इंप्रेटा सिलिंड्रिका से मौसम के परिवर्तन को नियंत्रित करने को तरीका खाेजा है।

 

 


कर्इ पत्रिकाआें में प्रकाशित हुआ ये शोध

 आॅक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर यदविंदर मल्ली के तत्वावधान में कारोबी ने असम विश्वविद्यालय सिलचर के प्रोफेसर डाॅ. अरूण ज्योति आैर प्रोफेसर अशेष कुमार दास  के नेतृत्व में कार्बोनइस्टोरेज आैर एस्क्यूटत्रेशन अपार्चुनिटीज आॅफ इंप्रेटा ग्रासलैंड इन बराक वैली, असम विषय पर पीएचडी करके बढ़ते तापमान की समस्या का निष्कर्ष निकालने में कामयाबी हासिल की है। कारोबी का यह शोध कर्इ पत्रिकाआें के साथ लैंड डिग्रेशन एंड डेवलपमेंड, करेंट साइंस में भी प्रकाशित हुआ है।

 

 

 

 

 

बता दें कि अगर इस शोध काे कार्यान्वित किया गया तो पेरिस अधिवेशन 2015 के लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सकता है। कारोबी के इस शोध ने आबोहवा में हाे रहे व्यापक परिवर्तन से चिंतित सभी देशों की समस्या के समाधान का द्वार खाेलने का काम किया है। कारोबी ने इस शोध के जरिए असम समेत पूरे देश को गौरवान्वित कर दिया है।

    

 


 

घास की उपयोगिता


गौरतलब है कि इंप्रेंटा घास समतल भूमि पर प्रति हेक्टेयर 3 एमजी सीआे-2 (3-2 -1 -1) अवशोषित करती है। तो वहीं ढलाऊ भूमि पर ये घास भौतिक, रासायनिक आैर जैविक संपदाआें का भी निर्माण करने में सक्षम है। इसके साथ ही पूर्वात्तर भारत में ये घास पारंपरिक तौर पर आर्थिक उपार्जन का बड़ा जरिया है।

 

 


शोध से गर्म पृथ्वी का तापमान हाे सकता है सामान्य


कारोबी का कहना है कि अगर इस खोज पर व्यापक तौर पर काम किया जाए तो ग्लोबल वार्मिंग की समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि इसमें थोड़ा समय लगेगा, लेकिन इससे गर्म हो रही पृथ्वी का तापमान काफी हद तक सामान्य स्थिति में आ जाएगा।