बच्चों से प्लास्टिक की थैलियां लेकर मुफ्त में पढ़ाता है ये कपल

Daily news network Posted: 2019-05-01 15:19:43 IST Updated: 2019-05-01 19:40:26 IST
  • बच्चों को मुफ्त शिक्षा और स्वस्थ वातावरण सुनिश्चित करने के लिए असम के एक जोड़े ने एक स्कूल शुरू किया जो छोटे बच्चों को प्लास्टिक कचरे के बदले शिक्षा प्रदान करता है।

गुवाहाटी।

बच्चों को मुफ्त शिक्षा और स्वस्थ वातावरण सुनिश्चित करने के लिए असम के एक जोड़े ने एक स्कूल शुरू किया जो छोटे बच्चों को प्लास्टिक कचरे के बदले शिक्षा प्रदान करता है।


 इस स्कूल की स्थापना जून 2016 में माजिन मुख्तार और उनके साथी परमिता सरमा ने की थी। माजिन 2013 में न्यूयॉर्क से एक स्कूल प्रोजेक्ट के लिए भारत आए, इस दौरान वे परमिता के संपर्क में आए। जो टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS) में एक सामाजिक कार्य की छात्रा थीं और शिक्षा क्षेत्र में काम करने की आकांक्षा रखती थीं।


 परमिता ने माजिन को जगह और सभी चुनौतियों के लिए तैयार होने में मदद की, जिसके कारण आखिरकार अद्भुत स्कूल, 'अक्षर' की स्थापना हुई।

 माजिन ने बताया कि सबसे बड़ी चुनौती ग्रामीणों को अपने बच्चों को स्कूल भेजने के लिए मनाने की थी। क्योंकि उनमें से ज्यादातर परिवारों के कमाऊ सदस्य थे। छोटे बच्चों ने कठोर परिस्थितियों में पास के पत्थर खदानों में मजदूर के रूप में काम किया करते थे। इसलिए, हमने एक ऐसा पाठ्यक्रम तैयार करने के बारे में सोचा, जो उनके लिए सही शिक्षा प्राप्त करते समय उनकी वित्तीय जरूरतों को पूरा करे।


 उन्होंने बताया कि हम यह देखकर हैरान रह गए कि ये परिवार सर्दियों के मौसम में ठंड को मात देने के लिए प्लास्टिक कचरे से अलाव बनाते हैं। इसलिए हमने जलते हुए प्लास्टिक के स्वास्थ्य खतरों के बारे में समुदाय को शिक्षित करना शुरू करने का फैसला किया। प्रत्येक बच्चा प्रति सप्ताह कम से कम 25 प्लास्टिक कचरे को अपने समुदाय और पर्यावरण में योगदान के रूप में लाता है।

 


 बच्चे प्लास्टिक से भरे बैग के साथ स्कूल में प्रवेश करते हैं। इस दंपति ने ग्रामीणों के लिए सबक भी शुरू किया कि कैसे प्लास्टिक कचरे के साथ विभिन्न निर्माण सामग्री बनाकर प्लास्टिक कचरे के फिर से इस्तेमाल के बारे में जाना जा सकता है जो परिसर में बेहतर बुनियादी ढांचे को बनाने में मदद कर सकते हैं।


 बता दें कि यह स्कूल, जो केवल 20 बच्चों के साथ शुरू हुआ था, अब 4 से 15 वर्ष की आयु के बीच 100 से अधिक बच्चे हैं।