20 साल सब्जी बेचकर महिला ने गरीबों के लिए खोला अस्पताल

Daily news network Posted: 2018-04-15 19:10:08 IST Updated: 2018-04-15 19:10:08 IST
20 साल सब्जी बेचकर महिला ने गरीबों के लिए खोला अस्पताल
  • पश्चिम बंगाल में रहने वाली सुभाषिनी मिस्त्री ने सब्जी बेचकर पैसे इकट्ठे किए और उन पैसों से गरीबों का मुफ्त इलाज करवाने के लिए अस्पताल खोला।

अगर हम आपको बताएं कि गरीबी रेखा पर रहकर जीवन यापन करने वाली एक महिला ने सब्जी बेचकर एक अस्पताल का निर्माण करवा दिया, तो शायद आपको यकीन करने में मुश्किल हो। आपको ही नहीं बल्कि किसी को भी इस बात को पचाने में दिक्कत हो, लेकिन ऐसा वाकई में हुआ है।

 


 पश्चिम बंगाल में रहने वाली सुभाषिनी मिस्त्री ने सब्जी बेचकर पैसे इकट्ठे किए और उन पैसों से गरीबों का मुफ्त इलाज करवाने के लिए अस्पताल खोला। इस अस्पताल का नाम रखा, Humanity Hospital. उनके इस प्रयास की वजह से उन्हें पद्मश्री ने सम्मानित भी किया गया।

 


 सुभाषिनी मिस्त्री का जन्म गुलाम भारत में 1943 को हुआ था। वह कुल 14 भाई-बहन थीं। अकाल के दौर में गरीबी, यमराज को अपनी ओर आकर्षित करने लगी। 7 भाई-बहनों को सूखे ने निगल लिया। इसके बाद पिता ने 14 साल की उम्र में शादी करवा दी और 23 की उम्र होते-होते सुभाषिनी 4 बच्चों की मां बन चुकी थी।

 


 एक रोज सुभाषिनी के पति बीमार हो गए, गांव में अस्पताल नहीं था लिहाजा पति को जिला अस्पताल लेकर जाना पड़ा। पैसे की कमी की वजह से सुभाषिनी के पति की भी मौत हो गई। इस घटना ने सुभाषिनी को अंदर तक हिला दिया, उन्होंने तय कर लिया कि अब वो गांव में किसी को इलाज की कमी से मरने नहीं देंगी।

 


 इसके बाद, इसी मिशन पर सुभाषिनी लग गईं, उन्होंने 20 साल तक सब्जी भेजी, मजदूरी की, लोगों के घरों में काम किया, पैसे इकट्ठे किए। इन पैसों से घर भी चलाया, बच्चों को पढ़ाया और अस्पताल के लिए पैसे भी जमा किए। धीरे-धीरे करते हुए उन्होंने 10 हजार रुपये इकट्ठे किए और अस्पताल के लिए 1 एकड़ जमीन खरीदी।


 1993 में सुभाषिनी ने ट्रस्ट खोला और उसी ट्रस्ट की मदद से उन्होंने 1995 में अस्पताल की नींव रखी। उन्होंने गांव वालों के सामने अस्पताल खोलने की बात कही तो गांव वालों ने भी जमकर तारीफ की और मदद के लिए हाथ आगे बढ़ाया। धीरे-धीरे अस्पताल बनना शुरू हुआ और जब बनकर तैयार हुआ तो उससे गरीबों को क्या फायदा हुआ। लेकिन अस्पताल कच्चे मकान में चल रहा था तो धीरे-धीरे परेशानियां बढ़ने लगी।

 


 जिस बिल्डिंग में अस्पताल चल रहा था वो कच्चा मकान था, बारिश के दिनों में बहुत परेशानी होने लगी, डॉक्टरों को सड़क पर बैठकर अस्पताल चलाना पड़ा। सुभाषिनी ने अपने इलाके के सांसद से मिलकर परेशानी के बारे में बताया। सांसद ने भी मदद का भरोसा दिलाया। सांसद, विधायक और स्थानीय लोगों की मदद से एक बार फिर अस्पताल बनकर खड़ा हो गया। जिसका उद्घाटन करने के लिए  पश्चिम बंगाल के राज्यपाल आए। राज्यपाल की मौजूदगी में मीडिया की जानकारी में भी सुभाषिनी का प्रयास आया और उन्हें पद्मश्री से नवाजा गया।