12वीं शताब्दी में बने इस शिव मंदिर में पूजा करने से डरते हैं लोग, ये है वजह

Daily news network Posted: 2018-05-18 18:25:09 IST Updated: 2018-08-18 16:30:14 IST
12वीं शताब्दी में बने इस शिव मंदिर में पूजा करने से डरते हैं लोग, ये है वजह
  • भारत में एक शिव मंदिर ऐसा भी है जिसमे रखे शिवलिंग की पूजा करने दूध दही और जल के अभिषेक करने से लोग डरते है। इसके पीछे एक कहानी है।

भारत में एक शिव मंदिर ऐसा भी है जिसमे रखे शिवलिंग की पूजा करने दूध दही और जल के अभिषेक करने से लोग डरते है। इसके पीछे एक कहानी है।



उत्तराखण्ड में पिथौरागढ़ के कस्बे से लगभग 6 किलोमीटर दूर है जो कि ग्राम सभा बल्तिर में स्थित है। पहाड़ी रास्तों और खूबसूरत वादियों के बीच यह शिवलिंग बना हुआ है। इस शिवलिंग के साथ एक लोककथा जुडी है जिसके कारण ही इस शिवलिंग की पूजा अर्चना नहीं हो पा रही।



बारहवीं शताब्दी में बने इस मंदिर को एक ही हाथ से बने होने के कारण ही हथिया देवाल के नाम से जाना जाता है। इस देवालय के विषय में किंवदंती है कि इस ग्राम में एक मूर्तिकार रहता था, जो पत्थरों को काट-काट कर मूर्तियां बनाया करता था।

 


 एक बार किसी दुर्घटना में उसका एक हाथ खराब हो गया। अब वह मूर्तिकार एक हाथ के सहारे ही मूर्तियां बनाना चाहता था, परन्तु गांव के कुछ लोगों ने उसे यह उलाहना देना शुरू कर दिया कि अब एक हाथ के सहारे वह क्या कर सकेगा। लगभग सारे गांव से एक जैसी उलाहना सुन-सुनकर मूर्तिकार खिन्न हो गया। इसी बात से दुखी होकर एक रात वो दक्षिण दिशा में शिवलिंग का निर्माण करने निकल गया। रात भर वो मूर्तिकार एक बड़ी चट्टान पर छैनी हथोडा चलाकर एक शिवलिंग का निर्माण किया।

 


 सुबह गांव वालो ने उस शिवलिंग के दर्शन किए। वे सब अचरज में थे की रात ही रात में किसने यह शिवलिंग बना दिया। गांव से शिल्पकार भी गायब था। बहुत दिनों तक उस मूर्तिकार का कोई पता ना चला।

 


 एक बार किसी महान पंडित ने जब शिवलिंग को अच्छे से देखा तो पाया की यह शिवलिंग गलत बना हुआ है। इसमे अरघा उत्तर दिशा में न होकर दक्षिण दिशा में है। इसी कारण बनाने वाले ने बड़ी भारी भूल की है और तभी से वो गायब है। लोगो की तब से यह मानसिकता हो गई की विपरीत अरघा वाला यह शिवलिंग पूजन योग्य नही है और पूजा करने वाले के साथ कोई अनहोनी हो सकती है।