आस्था के आगे झुका देश का कानून, यहां एकसाथ 30 हजार जिंदगियों को उतारा मौत के घाट

Daily news network Posted: 2019-12-05 13:31:32 IST Updated: 2019-12-05 13:31:32 IST
आस्था के आगे झुका देश का कानून, यहां एकसाथ 30 हजार जिंदगियों को उतारा मौत के घाट
  • आस्था के नाम पर 30 हजार जानवरों की बलि दी जा रही है।

कभी कभार ऐसा होता है कि आस्था के नाम पर देश का तक झुक जाता है। जी हां, हाल ही में एक ऐसा वाकया हुआ है जिसकी वजह से देश के कानून का सरेआम उल्लंघन किया। इसी के तहत 30 हजार जानवरों की एकसाथ बलि दी गई। यह बलि कहीं ओर नहीं बल्कि हिंदू मंदिर परिसर मे दी गई है जिसको कोई रोक नहीं पाया।

 

दरअसल 30 हजार पशुओं की बलि दिए जाने का यह काम नेपाल के गढ़ीमाई मंदिर में 5 साल में एक बार लगने वाले मेले में हुआ है। इस मेले के दौरान पशुओं की बलि देने से संबंधित अनुष्ठान होता है जो दुनिया भर में चर्चित है। इस उत्सव में 2 दिनों तक मंदिर परिसर में बने बूचड़खाने में भैंस सहित 30 हजार से अधिक पशुओं की बलि दी जाती है। हालांकि जानवरों की इस बलि के खिलाफ पशु अधिकार कार्यकर्ता आवाज उठाते हैं, लेकिन इसका कोई असर नहीं होता। इतना ही नहीं बल्कि नेपाल के सुप्रीम कोर्ट ने भी इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं, लेकिन आस्था के आगे इन सभी की अनदेखी की जाती है।

 

 

गढ़ीमाई मंदिर काठमांडू से 100 किमी दूर बैरियापुर में स्थित जहां हर पांच साल के बाद पशुओं की सामूहिक बलि दी जाती है।  यह उत्सव शक्ति की देवी गढ़ीमाई के सम्मान में आयोजित होता है। इसमें नेपाल के साथ ही भारत से लाखों लोग भाग लेते हैं। हालांकि 2009 के बाद से मंदिर के संचालकों पर पशु बलिदान पर प्रतिबंध लगाने का दबाव बढ़ा है।

 

 

आपको बता दें कि इस मंदिर परिसर में होने वाले सामूहिक वध में पहले चूहों, कबूतरों, मुर्गियों, बत्तखों, सूअरों और भैंसों की बलि दी जाती है।  पिछले उत्सव में मंदिर के मेले में हजारों अन्य जानवरों के साथ लगभग 10,000 भैंसों का वध किया गया था। इस तरह से यह जगह इतनी बड़ी संख्या में जानवरों के वध का दुनिया का सबसे बड़ा स्थल बन जाता है।