चित्र बनाता नहीं, सिलता है नीडलमैन, सच्चाई जानकर रह जाएंगे दंग

Daily news network Posted: 2019-12-09 09:48:23 IST Updated: 2019-12-09 09:48:23 IST
चित्र बनाता नहीं, सिलता है नीडलमैन, सच्चाई जानकर रह जाएंगे दंग
  • आपने अकसर सुना और देखा होगा कि चित्र बनाए जाते हैं, लेकिन पटियाला का एक शख्स ऐसा भी है, जो चित्र सिलता है, वो भी अपनी पुरानी सिलाई मशीन से। आज इनकी बनाई पेंटिंग्स लाखों में बिकती हैं।

आपने अकसर सुना और देखा होगा कि चित्र बनाए जाते हैं, लेकिन पटियाला का एक शख्स ऐसा भी है, जो चित्र सिलता है, वो भी अपनी पुरानी सिलाई मशीन से। आज इनकी बनाई पेंटिंग्स लाखों में बिकती हैं। इस अनोखी कला में महारथ हासिल की है पटियाला के अरुण कुमार बजाज ने। अरुण की धागों से सिलकर बनाई गई पेंटिंग्स के कारण उन्हें 'नीडल मैन' नाम दिया गया है। आज अरुण की सिली पेंटिंग्स अमरीका से रूस तक बिक रही हैं।


 

 पिता की विरासत है, मैंने रूप बदला

 

 अरुण का कहना है कि सिलाई मशीन से पेंटिंग्स बनाना मेरा जुनून है। मैं अपने पिता का आभारी हूं कि उन्होंने मुझे टेलरिंग के व्यवसाय में जोड़ा। शुरुआत में मैं इस व्यवसाय से जुड़कर ज्यादा खुश नहीं था, लेकिन धीरे-धीरे मैंने अपने इसी असंतोष को अपना जुनून बना लिया। सालों की मेहनत, धैर्य और समर्पण से आज मैंने ये मुकाम पाया है। अपने अद्वितीय कौशल के लिए अरुण ने लिम्का बुक ऑफ रिकॉड्र्स और इंडिया बुक ऑफ रिकॉड्र्स में भी नाम दर्ज करवाया है। उन्होंने गिनीज वल्र्ड रिकॉर्ड के लिए आवेदन किया, लेकिन उनका आवेदन खारिज कर दिया गया क्योंकि उनका काम की श्रेणी ही नहीं मिली।


 

 और ऐसे हुई शुरुआत

 

 अरुण 16 साल के थे, जब उनके पिता का निधन हो गया। परिवार की जिम्मेदारियां पूरी करने के लिए उनके पास सिलाई करने के अलावा और कोई विकल्प ही नहीं था। अरुण ने बताया कि वह हमेशा से कुछ अलग करना चाहते थे और यह मौका उनको सिलाई की शुरुआत करने के चार साल बाद मिला। उन्होंने सिलाई को देखने का नजरिया बदला और इसी को अपना जुनून बनाने की ठानी। और यहीं से शुरू हुआ नीडल मैन बनने का सफर। कई बार असफल हुए, लेकिन उसके बाद उन्होंने बनाया गुरु नानकजी का चित्र। यह चित्र बेहद सुंदर बना और फिर अरुण ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।


 

 सालों लग गए एक चित्र बनाने में

 

 अरुण को एक चित्र बनाने में पंद्रह दिन से लेकर छह महीने का समय लगता है। लेकिन कुछ चित्र एेसे भी हैं, जिन्हें पूरा करने में दो साल लग गए। इन्हीं में से एक है बाघ का चित्र, जिसे उन्होंने दो साल पूरा किया। वहीं कृष्ण के चित्र को बनाने में तीन साल का समय लग गया। आज इस चित्र की अनुमानित कीमत एक करोड़ रुपए है।