नौकरी छोड़कर 18 साल से पौधे लगा रहा ये शख्स, अकेले तैयार कर दिया 300 एकड़ का जंगल

Daily news network Posted: 2019-09-03 12:11:21 IST Updated: 2019-09-04 17:23:20 IST
  • 17 साल पहले ही अपनी नौकरी छोड़ चुके मणिपुर के मोइरांगथेम लोइया ने अकेले ही 300 एकड़ का जंगल तैयार कर डाला है।

इंफाल

17 साल पहले ही अपनी नौकरी छोड़ चुके मणिपुर के मोइरांगथेम लोइया ने अकेले ही 300 एकड़ का जंगल तैयार कर डाला है। लोइया पिछले 18 सालों से पेड़ लगा रहे हैं, उन्हें संरक्षित कर रहे हैं। मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव का काम करने वाले लोइया अब सिर्फ वन संरक्षण का ही काम करते हैं।

 

 


 45 वर्षीय मोइरांगथेम लोइया इंफाल वेस्ट के उरीपोक खैदेम के निवासी हैं। उन्होंने पुनशिलोक नाम के जंगल को फिर से जिंदा कर दिया है। बचपन में लोइया इन जंगलों में जाया करते थे। सन 2000 में कॉलेज खत्म करने के बाद जब वह जंगल में गए तो हरे-भरे जंगलों की जगह उजड़े वन पाकर हैरान रह गए। जंगल तैयार करने के लिए लोइया ने 2002 में जमीन की तलाश शुरू कर दी। एक स्थानीय व्यक्ति लोइया को मारू लांगोल हिल रेंज ले गया।

 

 लोइया ने अपनी नौकरी छोड़ दी। वह पुनशिलोक में ही एक छोटी सी झोपड़ी बनाकर रहने लगे। वह वहां पर छह साल रहे और अकेले ही बांस, टीक, ओक, फिकस, मगोलिया और कई तरह के फलों के पौधे लगाते रहे। शुरुआत में उन्होंने सिर्फ तीन प्रकार के बीज खरीदे। बाद में उन्होंने दोस्तों और वॉलंटियर्स की मदद से सफाई की और पौधे लगा दिए।

 

 


 लोइया वन विभाग की जमीन पर पौधे लगा रहे थे। इस बारे में वन विभाग से पूछा गया तो रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर नंदेईबम मोबी सिंह ने कहा, 'वन विभाग की जमीन पर किसी भी प्रकार का निर्माण अवैध माना जाता है लेकिन लोइया हरियाली स्थापित करने और वन लगाने का काम कर रहे थे तो यह कहीं से भी गैरकानूनी नहीं था।' इसके बाद तो वन विभाग ने भी जंगल के आसपास बनाए गए कई अवैध घरों को गिरा दिया।

 

 

 मोबी सिंह आगे बताते हैं, 'भारतीय संविधान का अनुच्छेद 51-A(g) साफ-साफ कहता है कि हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है कि वह वन, झील, नदियों और जीवों की रक्षा करे। लोइया और उनके साथी यही काम कर रहे हैं और देश के जिम्मेदार नागिरक की तरह पेश आ रहे हैं।' 2003 में लोइया और उनके साथियों ने वाइल्डलाइफ ऐंड हैबिटैट प्रोटेक्शन सोसायटी (डब्ल्यूएएचपीएस) बनाई। इस संस्था के वॉलंटियर्स भी वन लगाने और उसे संरक्षित करने के काम में लग गए।

 

 


लोइया बताते हैं, 'चर्चा में आने के बाद स्थानीय लोगों के साथ-साथ देश-विदेश से भी लोग यहां आने लगे हैं। अपनी 16 साल लंबी भूख हड़ताल खत्म करने के बाद सितंबर 2016 में इरोम शर्मिला भी यहां आई थीं। उन्होंने यहां आम का पौधा लगया था।'

 

 

 अपना घर चलाने के लिए लोइया अपने भाई के मेडिकल स्टोर पर फार्मासिस्ट का काम करते हैं। वह ऑर्गैनिक खेती भी करते हैं। हजारों पेड़ लगा चुके लोइया अभी और पौधे लगाकर जंगल तैयार करना चाहते हैं।