पूरे विश्व में असम के इस गांव से शुरू हुआ था काला जादू , आने से खौफ खाते हैं लोग

Daily news network Posted: 2018-04-18 13:16:16 IST Updated: 2018-04-18 15:25:49 IST
पूरे विश्व में असम के इस गांव से शुरू हुआ था काला जादू , आने से खौफ खाते हैं लोग
  • आधुनिक भारत को एेसा गांव जहां लोग जाने से डरते हैं। जी हां पश्चिम बंगाल और असम के कुछ इलाके ऐसे हैं जहां जादू-टोने के डर से लोग जाने से घबराते हैं।

गुवाहाटी।

आधुनिक भारत को एेसा गांव जहां लोग जाने से डरते हैं। जी हां पश्चिम बंगाल और असम के कुछ इलाके ऐसे हैं जहां जादू-टोने के डर से लोग जाने से घबराते हैं। आज हम आपको बताने जा रहे हैं असम के छोटे से गांव मायोंग के बारे में, जहां आज भी काले जादू को खौफ इस कदर फैला हुआ है कि बाहरी लोग यहां जाने से डरते हैं। हालांकि इस गांव के आसपास वाइल्ड लाइफ सेंचुरी भी है, जहां लोग सफारी करने आते हैं। लेकिन इस गांव में काले जादू का खौफ इतना है कि लोग इसमें जाने से कतराते हैं। ये गांव तंत्र साधना के केंद्र मां कामाख्या मंदिर से महज 40-50 किमी की दूरी पर है।

 

 

इसी जगह से हुर्इ थी विश्व में काले जादू की शुरूआत

 

इसे काले जादू का गढ़ माना जाता है। यहां के हर घर में आज भी जादू किया जाता है। एेसा माना जाता है कि पूरे विश्व में काले जादू की शुरुआत इसी जगह से हुई है। असम का ये छोटा सा गांव मायोंग गुवाहाटी से लगभग 40 कि.मी. दूर है। इस गांव का इतिहास महाभारत से जुड़ा है। लाेगों का एेसा मानना है कि ये गांव भीम के बेटे घटोत्कच का है। उसे यहां का राजा माना जाता है।



 बीमारियों को दूर करने के लिए करते हैं काला जादू

इस गांव का नाम मायोंग है , जो संस्कृत के माया से बना है। हालांकि अब यहां काला जादू किसी को परेशान करने के लिए नहीं किया जाता। लोग यहां अब इसका उपयोग सिर्फ बीमारियों को दूर करने के लिए करते हैं। यहां अक्सर बीमार इंसान की पीठ पर थाली टिका कर मंत्र उच्चारण के साथ मिट्टी मारी जाती है, कहा जाता है ये यहां बीमारियों को दूर करने का पारंपरिक तरीका है।

 



पांडुलिपियां आज भी है मौजूद


यहां दो कुंड है एक अष्टदल कुंड व दूसरा योनि कुंड। योनि कुंड पर हिंदू व अष्टदल कुंड पर बौद्ध अपनी तंत्र विद्या को सिद्ध करने के लिए साधना किया करते थे। यहां के संग्रहालय में 12वीं शताब्दी की कई पांडुलिपियां मौजूद हैं। ये तंत्र के वे कीमती दस्तावेज हैं जिनका मूल्य केवल इस भाषा को समझने वाले ही बता सकते हैं। एक जानकार के अनुसार इन लिपियों में उड़ने के लिए, किसी को मारने के लिए व वश में करने के लिए काला जादू किस तरह किया जाए ये सारी जानकारियां मौजूद हैं।

 



बूढ़े मायोंग से किया जाता है काला जादू

 मायोंग में बूढ़े मायोंग नाम की एक जगह है जिसे काले जादू का केंद्र माना जाता है। यहां पर भगवान शिव व पार्वती के अलावा गणेशजी भी की तांत्रिक प्रतिमा है। जिसके सामने प्राचीन समय मे नर बलि दी जाती थी। इसके अलावा यहां योनि कुंड भी है जिसके आसपास कई मंत्र लिखे हैं। इसी जगह पर सबसे अधिक काले जादू के प्रयोग किए गए। स्थानीय लोग मानते हैं कि काले जादू की मंत्र शक्ति के कारण ये कुंड हमेशा पानी से लबालब रहता है।

 

 


काले जादू से मुगलों को कर दिया था गायब


असम में ये कहानी आम है कि 1332 ईस्वी में असम पर कब्जा जमाने के लिए मुगल बादशाह मोहम्मद शाह ने अपने घुड़सवारों के साथ चढ़ाई की थी। उस समय असम में हजारों तांत्रिक मौजूद थे और उन्होंने मायोंग को बचाने के लिए एक ऐसी दीवार खड़ी कर दी थी। जिसे पार करते ही शाह की पूरी सेना गायब हो गई। यह तथ्य इस गांव को और भी मायावी बनाने का काम करता है।