Chicken-मटन को भूल जाइए, भारत के इस गांव में 200 रुपए किलो बिकता है चूहा

Daily news network Posted: 2018-12-27 14:35:42 IST Updated: 2019-01-14 14:27:18 IST
Chicken-मटन को भूल जाइए, भारत के इस गांव में 200 रुपए किलो बिकता है चूहा

नॉनवेज के शौकीनों के लिए चिकन और मटन से बेहतर कोई विकल्प नहीं है, लेकिन पूर्वोत्तर राज्य असम के कुमारिकाता गांव में ऐसा नहीं है। आप जानकर हैरान रह जाएंगे कि वहां लोग चूहे खाने के शौकीन हैं।  गांव के किसान अपने खेतों में फसल बचाने के लिए चूहों को मारते हैं और यही चूहे वहां बाजार में 200 रुपये किलो की दर से खरीदे जाते हैं।

 

 

असम के गरीब किसानों और आदिवासियों के लिए चूहा कमाई का बढ़‍िया जरिया है। कुमारिकाता गांव के सम्‍बा सोरेन कहते हैं, ‘हम खेतों में जाल लगाते हैं और चूहों को फंसाते हैं। फिर इन्‍हें बाजार में कच्‍चा या फिर उबालकर बेचा जाता है।’ गुवाहाटी से 90 किलोमीटर दूर भारत-भूटान सीमा से लगे कुमारिकाता गांव में साप्‍ताहिक बाजार लगता है। रविवार के दिन लगने वाले इस बाजार में भारी संख्‍या में लोग खरीदारी करने पहुंचते हैं और यहां चूहे के मांस की सबसे ज्‍यादा बिक्री होती है। इस बाजार में चिकन और मटन के मुकाबले चूहे का मांस ज्यादा लोकप्रिय है।

 

 


स्थानीय किसान और आदिवासी समुदाय के लोग यहां फसलों की कटाई के दौरान रात के समय चूहेदान लगाते हैं। पकड़े गए एक चूहे का वजन कई बार एक किलो से ज्यादा होता है। चूहों को पकड़ने से जहां एक ओर किसान अपनी फसल को खराब होने से बचा लेते हैं, वहीं इससे अच्‍छी-खासी आमदनी भी हो जाती है। चूहों को पकड़ने के अक्‍सर रात के समय उनके बिल के पास चूहेदान लगाया जाता है। अंधेरा होने पर अपने बिल में लौटने के दौरान चूहे उसमें फंस जाते हैं। चूहे का मांस बेचने का काम आर्थिक रूप से कमजोर समुदाय के लोग करते हैं।