अफवाह नहीं बल्कि ये थी शिलांग हिंसा भड़कने के पीछे की असली वजह

Daily news network Posted: 2018-06-05 16:18:12 IST Updated: 2018-07-18 16:37:29 IST
अफवाह नहीं बल्कि ये थी शिलांग हिंसा भड़कने के पीछे की असली वजह
  • मेघालय की राजधानी शिलांग में पिछले पांच दिनाें से भड़की हिंसा थमने का नाम ही नहीं ले रही है। यहां उपद्रवियों ने सुरक्षा बलों पर एक बार फिर पेट्रोल बम और पत्थरों से हमला किया।

शिलांग।

मेघालय की राजधानी शिलांग में पिछले पांच दिनाें से भड़की हिंसा थमने का नाम ही नहीं ले रही है। यहां उपद्रवियों ने सुरक्षा बलों पर एक बार फिर पेट्रोल बम और पत्थरों से हमला किया। स्थिति पर काबू पाने के लिए सीआरपीएफ की 11 कंपनियां तैनात की गया हैं। हिंसा फैलाने के मामले में पुलिस ने अब तक पांच लोगों को गिरफ्तार भी किया है। अब आर्इए जानते है कि देश के सबसे शांत आैर खूबसूरत शहरों में एक शिलांग में आखिर हिंसा भड़की कैसे।

 


 

एेसे फैली हिंसा

 

 बताया जाता है कि शिलॉन्ग में हिंसा की शुरुआत एक खासी समुदाय के युवक और पंजाबी महिला के बीच हुई तकरार से शुरू हुई। दरअसल, युवक सरकारी बस में खलासी का काम करता था। बस की पार्किंग को लेकर पंजाबी महिला और युवक के बीच कहासुनी हुई। इस मामूली कहासुनी पर दो पक्षों के लोगों ने एक दूसरे के साथ कथित मारपीट की।  हालांकि, पुलिस ने बीच-बचाव कर मामला शांत कराया। लेकिन,परेशानी तब तो आैर भी बढ़ गई जब सोशल मीडिया पर अफवाह फैल गई कि कर्मचारी की मौत हो गई।

 


 

यह गलत मैसेज आग की तरह फैला फिर बस चालक संस्था और कई स्थानीय संगठनों से जुड़े लोग पंजाबी कॉलोनी पहुंच गए और वहीं से दोनों पक्षों के बीच हिंसक झड़प शुरू हुई। वहीं, पंजाबी समुदाय में भी गलत मैसेज फैलाया गया। इसमें कहा गया कि खासी समुदाय के युवक ने पंजाबी लड़की से छेड़छाड़ की। इससे समुदाय के लोग नाराज हो गए।

 



फेसबुक पर अफवाह नहीं ये है हिंसा की असली वजह

 


हालांकि, जानकारों का कहना है कि शिलांग में खासी और पंजाबी समुदाय के बीच तनाव सोशल मीडिया पर फैली अफवाह नहीं बल्कि अवैध प्रवासियों को लेकर चल रहा विवाद है। बता दें कि खासी समुदाय खुद को मेघालय का बताता है। तो वहीं  इस समुदाय से जुड़े कुछ संगठन यह दावा करते हैं कि उनके इलाके में अवैध प्रवासियों यानी कि पंजाबियों ने कब्ज़ा कर लिया है और इन्हें हटाने की वो लंबे अरसे से मांग कर रहे हैंं।

 


 

 ब्रिटिश शासन के समय पंजाबी समुदाय बसाया गया था

वहीं, पंजाबी समुदाय के लोगों का कहना है कि हमारे पूर्वजों को यहां बसे सौ साल से अधिक हो गया है। ब्रिटिश शासन के समय हमारे दादा-परदादाओं को यहां क्लीनर और सफाई कर्मी के तौर पर लाकर बसाया गया था। उस समय मेघालय राज्य ही नहीं बना था। हम यहां लम्बे समय से बसे हैं। हमारा व्यवसाय, घर-परिवार सब यहीं है। चाहे कुछ भी हो जाए हम अपनी जगह नहीं छोडेंगे।

 


 

नेताआें की राजनीति

 

एक न्यूज वेबसाइट की रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाबी कॉलोनी की गुरुद्वारा समिति के महासचिव गुरुजीत सिंह बताए हैं कि, "पिछले कई वर्षों से हमें यहां से हटाने की साजिश चल रही है। हमें अवैध निवासी कहकर बुलाया जाता है। इस पर नेता राजनीति करते हैं। हर चुनाव के पहले हमें दूसरी जगह बसने की बातें कहते हैं, लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकलता।