शिकारी से संरक्षक बनने की कहानी है 'द पगति स्टोरी', मिला राष्ट्रीय पुरस्कार

Daily news network Posted: 2018-04-20 15:24:41 IST Updated: 2018-04-20 20:13:45 IST
शिकारी से संरक्षक बनने की कहानी है 'द पगति स्टोरी', मिला राष्ट्रीय पुरस्कार
  • 'द पंगति स्टोरी' को बेस्ट पर्यावरण फिल्म (गैर फिचर फिल्म) के लिए 65वां नेशनल अवॉर्ड मिला है। इससे पहले फिल्म ने साल 2017 में सातवें विज्ञान फिल्म महोत्सव में प्रतिष्ठित गोल्डन बेवर पुरस्कार जीता था।

कोहिमा।

'द पंगति स्टोरी' को बेस्ट पर्यावरण फिल्म (गैर फिचर फिल्म) के लिए 65वां नेशनल अवॉर्ड मिला है। इससे पहले फिल्म ने साल 2017 में सातवें विज्ञान फिल्म महोत्सव में प्रतिष्ठित गोल्डन बेवर पुरस्कार जीता था। 26 मिनट की इस फिल्म का निर्देशन कोहिमा, नागालैंड की रहने वाली सेसिनो यहोशु ने किया है।


 'द पांगति स्टोरी' के निर्माता को भारतीय फिल्म जगत के बड़े नामों के साथ पुरस्कार प्राप्त करने का मौका मिलेगा।


 'द पांगति स्टोरी' को राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए चुने जाने पर पर नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियों ने बधाई दी है। रियो ने ट्विट कर लिखा, 'टेक वन प्रोड्क्शन की सेसिनो यहोशु को बेस्ट पर्यावरण फिल्म के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए बधाई।


 मुख्यमंत्री के अलावा नागालैंड के राज्यपाल पीबी आचार्या ने भी सेसिनो यहोशु को द पंगति स्टोरी के लिए बधाई दी है। साथ ही उन्होंने ने कहा कि यह फिल्म पर्यावरण संरक्षण के लिए लोगों को प्रेरित करेगी। आचार्या ने इस फिल्म के पूरी टीम को भविष्य में और बेहतर काम करने के लिए शुभकामनाएं दी हैं।

 बता दें कि अमूर फाल्कन्स के बारे में बहुत कुछ कहा और लिखा गया है। हर इन प्रवासी पक्षियों का झूंड विशेष रूप से नागालैंड के वोखा जिले में बसेरा बनाने के लिए आते हैं। पंगति गांव के वन क्षेत्र में ये पक्षी साइबेरिया और दक्षिण अफ्रीका से भारत में आते हैं। इस गांव लोगों ने हर साल आने वाले पक्षियों की रक्षा के लिए अपने प्रयास के कारण प्रशंसा प्राप्त की है। ज्यादातर लोगों को पता नहीं है कि पंगति स्टोरी केवल शिकारी की कहानी नहीं है, जो बाद में संरक्षक बन गए है। ये उनके आजीविका की संघर्ष की कहानी भी है।

 


 'द पंगटी स्टोरी' की कहानी बताती है कि साल 2012 से पहले हर दिन 15,000 से ज्यादा पक्षियों का शिकार कर लिया जाता था। लेकिन अब एक भी पक्षी का शिकार नहीं किया जाता है।

 


 फिल्म में प्रकाश डाला गया है कि 2012 में नागालैंड ने गलत कारणों से वैश्विक समाचार बन गया था। यहां हजारों पक्षियों का निर्दयतापूर्वक शिकार किया जा रहा था। जिसके बाद इन पक्षियों को बचाने के लिए एक विशाल अभियान शुरू किया गया था। यह फिल्म बताती है कि कैसे पंगति दो साल के भीतर एक हत्या के मैदान से पक्षियों के लिए एक सुरक्षित आश्रय में परिवर्तित हो गई।

 


 द पंगति स्टोरी के निर्माताओं को सिल्वर लोटस अवॉर्ड (रजत कमल) और नकद पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।