अरुणाचल में एक जनवरी नहीं बल्कि इस माह में मनाया जाता है नया साल, ये है इसके पीछे का कारण

Daily news network Posted: 2018-04-05 16:39:36 IST Updated: 2018-06-24 17:08:14 IST
अरुणाचल में एक जनवरी नहीं बल्कि इस माह में मनाया जाता है नया साल, ये है इसके पीछे का कारण
  • पूर्वोत्तर राज्य अरुणाचल प्रदेश में हर साल मोपिन फेस्टिवल बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। यह आलो जिले का मुख्य फेस्टिवल है। जिसे हर साल पांच अप्रैल को मनाया जाता है। इस फेस्टिवल को यहां की गालो ट्राईबल नए साल के रूप मे मनाती है।

पूर्वोत्तर राज्य अरुणाचल प्रदेश में हर साल मोपिन फेस्टिवल बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। यह आलो जिले का मुख्य फेस्टिवल है। जिसे हर साल पांच अप्रैल को मनाया जाता है। इस फेस्टिवल को यहां की गालो ट्राईबल नए साल के रूप मे मनाती है।

 


 बता दें कि ये फेस्टिवल पूरे एक हफ्ते तक चलता है। पहली अप्रैल से शुरू होने वाला यह फेस्टिवल 7-8 अप्रैल तक समाप्त होता है। फेस्टिवल में शुरू के दो दिनों मे विभिन्न सांस्कृतिक प्रतियोगिताएं आयोजित होती है। और तीसरे दिन पुजारी का स्वागत किया जाता है, चौथे दिन ईटानगर मे बने मोपिन ग्राउंड मे इनके पुजारी आते है और इसी दिन मोपिन ग्राउंड मे राइस बीयर तथा अन्य खाने-पीने की चीजें तैयार की जाती है।

 पांचवे दिन मुख्य समारोह होता है और इसी दिन मोपिन देवी की स्थापना की जाती है। और गालो ट्राईब के लोग अपने यहां लंच और डिनर आयोजित करते है जिसमे सभी लोग आमंत्रित होते हैं।

 

छठे दिन दिन फिर से सभी लोग सुबह मोपिन ग्राउंड मे इकठ्ठा होते है और

आयोजित जगह पर लंच और डिनर करने जाते है। और यहां भी खूब डांस वगैरा होता

है। और एक अच्छी बात ये होती है कि आम जनता के आने-जाने के लिए बस वगैरा की

सुविधा भी लोगों को उपलब्ध कराई जाती है।

जिससे उन्हें आने-जाने मे परेशानी ना हो। सातवें दिन मोपिन नाईट मनाई जाती

है जिसमे खूब नाच-गाना होता है। और आठवें दिन इस फेस्टिवल का समापन होता

है।

 

इस फेस्टिवल के माध्यम से लोगों को ये सन्देश जाता है कि खेती का मौसम शुरू

हो गया है। मोपिन देवी के आशीर्वाद से और व्यक्ति की कड़ी मेहनत से

समृद्धि, अच्छी सेहत और धरती पर रहने वाले सभी वन्य जीव-जन्तुओं को

संरक्षित किया जा सकता है।

इस फेस्टिवल के माध्यम से लोगों को ये सन्देश जाता है कि खेती का मौसम शुरू

हो गया है। मोपिन देवी के आशीर्वाद से और व्यक्ति की कड़ी मेहनत से

समृद्धि, अच्छी सेहत और धरती पर रहने वाले सभी वन्य जीव-जन्तुओं को

संरक्षित किया जा सकता है।

 


मोपिन कृषि की देवी का नाम है। मोरिन मां ने सबसे पहले अबू तानी (तानी

ग्रुप का पहला व्यक्ति जो सबसे पहले धरती पर आया था।) को बोने की कला सिखाई

थी। ना केवल खेती की कला सिखाई बल्कि मोपिन और उनकी दो बेटियों पींकू

पिंटव और दौदव तामव ने खेती और बोने के काम आने वाली वस्तुएं और बीज अबू

तानी को दिखाए और उनका प्रयोग करना भी सिखाया।

इस दिन सभी बड़े और बच्चे सफ़ेद रंग के कपडे पहनते है क्यूंकि सफेद शुद्धता

और शान्ति का प्रतीक है। महिलाएं हरे मोतियों की लम्बी सी माला पहनती है

तथा कमर मे करधनी सी पहनती है। और सभी पुरुष सफेद रंग की जैकट और नीले रंग

के मोतियों की माला पहनते है। और कुछ लोग सफ़ेद टोपी पहनते है तो कुछ लोग

बम्बू की बनी टोपी भी पहनते है।


बता दें कि मोपिन फेस्टिवल के दौरान मिथुन की बलि चढ़ाई जाती है। और बलि चढाने के पहले लोग मिथुन की पूजा करते है, और बलि के बाद मिथुन के बाल और रक्त को लोग अपने-अपने घर ले जाते है क्यूंकि इसे बहुत पवित्र माना जाता है। मिथुन की बलि के बाद एक बार फिर सभी लोग चावल का पेस्ट सभी को बिलकुल उसी तरह लगाते है जिस तरह होली मे हम लोग गुलाल लगाते है।