जानिए नागरिकता संशोधन विधेयक से जुड़ी कुछ खास बातें

Daily news network Posted: 2019-01-10 10:09:50 IST Updated: 2019-01-11 08:40:20 IST
जानिए नागरिकता संशोधन विधेयक से जुड़ी कुछ खास बातें
  • भारी विरोध के बाद लोकसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक पास तो हुआ लेकिन राज्यसभा में इसे मंजूरी नहीं मिल पार्इ।

नई दिल्ली।

भारी विरोध के बाद लोकसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक पास तो हुआ लेकिन राज्यसभा में इसे मंजूरी नहीं मिल पार्इ। बिल को लेकर सदन में हंगामा हुआ और बैठक स्थगित भी करनी पड़ी। अब यह विधेयक अगले सत्र में पेश किया जा सकता है। असम सहित पूरे पूर्वोत्तर में इसका जोरदार विरोध हो रहा है। आइए जानते हैं कि क्या है नागरिकता संशोधन विधेयक और इस पर हंगामा क्यों हो रहा है।

 


 नागरिकता संशोधन विधेयक?

 यह विधेयक पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आने वाले गैर मुस्लिमों के लिए भारत की नागरिकता आसान बनाने के मकसद से लाया गया है। इसके अमल में आने के बाद वे भारत आने पर 12 के बजाय छह साल बाद ही नागरिकता हासिल कर सकते हैं। 1985 के असम समझौते के मुताबिक 24 मार्च 1971 से पहले राज्य में आए प्रवासी ही भारतीय नागरिकता के पात्र थे। लेकिन नागरिकता (संशोधन) विधेयक में यह तारीख 31 दिसंबर 2014 कर दी गई है।


धार्मिक पहचान के आधार पर नागरिकता को लेकर पर भाजपा का तर्क?

 कांग्रेस सहित कई दलों ने नागरिकता (संशोधन) विधेयक का विरोध किया है। उनका कहना है कि धर्म के आधार पर नागरिकता नहीं दी जा सकती क्योंकि भारत धर्मनिरपेक्ष देश है।वहीं, भाजपा का कहना है कि नागरिकता (संशोधन) विधेयक से असम को मुस्लिम बहुल बनने से बचाया जा सकेगा। असम के वित्त मंत्री और पूर्वोत्तर में भाजपा के मुख्य रणनीतिकार हिमंत बिस्वा सरमा तो यह तक कह चुके हैं कि अगर यह विधेयक कानून नहीं बना तो असम ‘जिन्ना के रास्ते पर’ चला जाएगा। उधर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसे विभाजन के समय हुई गलतियों का प्रायश्चित बता चुके हैं।


 असम समेत पूर्वोत्तर के राज्यों में विरोध

 असम के मूलनिवासी बाहरी लोगों की पहचान हिंदू-मुस्लिम आधार पर नहीं करते। वे उन हिंदू बंगालियों को भी बाहरी मानते हैं जो बांग्लादेश से वहां आए हैं। असमिया भाषी लोगों का मानना है कि बांग्लाभाषी उनकी सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान के लिए बड़ा खतरा हैं। पूर्वोत्तर के बाकी राज्यों की एक बड़ी आबादी भी ऐसा ही मानती है।


 बांग्लाभाषी लोगों का रुख

 असम की बराक घाटी में बांग्लादेश से आए हिंदू प्रवासियों की बड़ी आबादी है। ये लोग नागरिकता (संशोधन) विधेयक के पक्ष में है। उनका मानना है कि इससे उन्हें नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) के मामले में भी मदद मिलेगी। इस कवायद के तहत अवैध घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें वापस भेजा जाना है। अभी भी असम के 40 लोग इस रजिस्टर से बाहर हैं। उधर, बांग्लाभाषी मुस्लिम आबादी का रुख उलट है। वह इस मुद्दे पर असम गण परिषद जैसे स्थानीय संगठनों के साथ है जो इस विधेयक का विरोध कर रहे हैं।

 


असंतोष को शांत करने के लिए भाजपा क्या कररही है?

 केंद्र सरकार का कहना है कि मूलनिवासियों को इस विधेयक से आशंकित होने की जरूरत नहीं है. उसके मुताबिक संविधान के अनुच्छेद 371 और असम समझौते की धारा छह के जरिये मूल निवासियों के राजनीतिक अधिकारों और सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखा जा सकता है। इनमें उनके लिए संसद और विधानसभा में सीटें आरक्षित करने जैसे प्रावधान हैं।