गजब! भारत का ये गांव है Asia का सबसे साफ-सुथरा गांव, जानिए इसके पीछे की कहानी

Daily news network Posted: 2018-12-17 18:54:24 IST Updated: 2018-12-21 12:22:49 IST
  • कभी छुट्टियों में किसी बेहद साफ-सुथरे और ऐसे गांव में घूमने का मन करे जहां आज भी आपको सांस लेने के लिए स्वस्थ हवा मिल सके, तो ये खबर आपके बहुत काम आ सकती है। वो इसलिए, क्योंकि यहां जिक्र होने जा रहा है ऐसे ही एक साफ-सुथरे और स्वस्थ जलवायु वाले गांव का। इस गांव का नाम है मावलिननॉन्ग।

कभी छुट्टियों में किसी बेहद साफ-सुथरे और ऐसे गांव में घूमने का मन करे जहां आज भी आपको सांस लेने के लिए स्वस्थ हवा मिल सके, तो ये खबर आपके बहुत काम आ सकती है। वो इसलिए, क्योंकि यहां जिक्र होने जा रहा है ऐसे ही एक साफ-सुथरे और स्वस्थ जलवायु वाले गांव का। इस गांव का नाम है मावलिननॉन्ग। 


 

मेघालय का ये गांव एशिया का सबसे साफ़-सुथरा गांव है। 2003 में मावलिननॉन्ग को एशिया के सबसे साफ़ गांव का दर्जा मिला था। वहीं 2005 में इसे भारत के सबसे साफ़-सुथरे गांव के रूप में चुना गया। यहां आपको ये भी बता दें कि साफ़-सफ़ाई के मामले में अव्वल रहने के साथ-साथ इस गांव की साक्षरता दर भी 100 फ़ीसदी है। आपको ये भी जानकर हैरत होगी कि इस गांव के अधिकतर लोग अंग्रेजी भाषा में ही बात करते हैं। 2007 से ही इस गांव के सभी घरों में टॉयलेट बने हुए हैं। साल 2014 की जनगणना के अनुसार इस गांव में केवल 95 परिवार रहते हैं।


 

अब आपको सुनाते हैं इस गांव के साफ-सुथरा होने की कहानी। करीब 100 साल पहले यहां हैजा फ़ैल गया था। किसी भी तरह की मेडिकल सुविधा न होने की वजह से इस बीमारी से छुटकारा पाने के लिए सिर्फ़ सफ़ाई ही एकमात्र तरीका बच गया था। उस वक्त से लेकर आज तक इस गांव के लोग सफ़ाई को लेकर बेहद सजग रहते हैं।

 


इस गांव के लोग सफाई को लेकर इतने जागरूक हैं कि अगर सड़क पर चलते किसी शख़्स को कचरा नज़र आ जाये तो वो वहीं रुककर पहले कचरे को डस्टबिन में डालता है फिर आगे बढ़ता है। इस गांव के लोग सफाई को बनाए रखने के लिए घरों से निकलने वाले कूड़े-कचरे को बांस से बने डस्टबिन में जमा करने के बाद उसे खेती के लिए खाद के तौर पर इस्तेमाल करते हैं।