तीन समुद्रों का संगम स्थल है कन्याकुमारी, अद्भुत है सूर्योदय और सूर्यास्त का नजारा

Daily news network Posted: 2018-10-09 18:24:28 IST Updated: 2018-10-09 20:45:00 IST
  • कन्याकुमारी को अक्सर धार्मिक स्थल के रूप में मान्यता दी जाती है लेकिन यह शहर आस्था के अलावा कला व संस्कृति का भी प्रतीक रहा है। तीन समुद्रों हिंद महासागर, अरब सागर, बंगाल की खाड़ी के संगम पर स्थित यह शहर 'एलेक्जेंड्रिया ऑफ ईस्ट' भी कहा जाता है।

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 कन्याकुमारी को अक्सर धार्मिक स्थल के रूप में मान्यता दी जाती है लेकिन यह शहर आस्था के अलावा कला व संस्कृति का भी प्रतीक रहा है। तीन समुद्रों हिंद महासागर, अरब सागर, बंगाल की खाड़ी के संगम पर स्थित यह शहर 'एलेक्जेंड्रिया ऑफ ईस्ट' भी कहा जाता है। दूर-दूर फैले समंदर की विशाल लहरों के बीच आपको यहां जो सबसे अधिक लुभा सकता है वह है यहां का सूर्योदय और सूर्यास्त का नजारा। चारों ओर प्रकृति के अनंत स्वरूप को देखकर ऐसा लगता है मानो पूर्व में सभ्यता की शुरुआत यहीं से हुई थी।


 जब आप कन्याकुमारी मंदिर यानी माता अम्मन के मंदिर जाते हैं तो यह आवाज आपकी आस्था को और बढ़ाने का काम करेगी। मान्यता के अनुसार देवी आदिशक्ति के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक कन्याकुमारी माता (अम्मन) मंदिर भी है। तीन समुद्रों के संगम स्थल पर स्थित यह एक छोटा-सा मंदिर है जो मां पार्वती को समर्पित है। लोग मंदिर में प्रवेश करने से पहले 'त्रिवेणी संगम' में डुबकी लगाते हैं, जो त्रिवेणी मंदिर के बाईं ओर 500 मीटर की दूरी पर स्थित है। मंदिर का पूर्वी प्रवेश द्वार को हमेशा बंद रखा जाता है, क्योंकि मंदिर में स्थापित देवी के आभूषणों की रोशनी से समुद्री जहाज इसे लाइटहाउस समझने की भूल कर बैठते हैं और जहाज को किनारे करने के चक्कर में दुर्घटनाग्रस्त हो जाते हैं!


 यदि यह कहें कि कन्याकुमारी आने की सबसे बड़ी वजहों में एक यह भी है कि लोग कुदरत की सबसे अनूठी चीज देखने आते हैं तो गलत नहीं होगा। यह अनूठी चीज है चांद और सूरज का एक साथ नजारा। पूर्णिमा के दिन यह नजारा और हसीन होता है। दरअसल, पश्चिम में सूरज को अस्त होते और उगते चांद को देखने का अद्भुत संयोग केवल यहीं मिलता है। 31 दिसंबर की शाम इस साल को विदा कीजिए और अगले दिन तड़के वहीं जाकर नए साल की आगवानी करने का सुख भी पा सकते हैं आप। यकीनन यह दृश्य इतना अद्भुत होता है इसे देखना अलग ही तरह का रोमांच है।


 यहां आप स्वामी विवेकानंद के प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए बनाए गए रॉक मेमोरियल, 'थिरुक्कुरल' काव्य ग्रंथ की रचना करने वाले अमर तमिल कवि थिरुवल्लुअर की प्रतिमा मुख्य दर्शनीय स्थल हैं। इसके अलावा आप यहां समुद्र तट पर स्थापित गांधी मंडप भी घूम सकते हैं। जहां महात्मा गांधी की चिता की राख रखी हुई है। यहां आप गांधीजी के संदेश और उनके जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं के चित्र देख सकते हैं।

 


 कैसे पहुंचें-

 नजदीकी एयरपोर्ट केरल का तिरुअनंतपुरम है जो कन्याकुमारी से 89 किलोमीटर दूर है। यहां से बस या टैक्सी के माध्यम से कन्याकुमारी पहुंचा जा सकता है। कन्याकुमारी चेन्नई सहित भारत के प्रमुख शहरों से रेल मार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है। बस द्वारा कन्याकुमारी जाने के लिए त्रिची, मदुरै, चेन्नई, तिरुअनंतपुरम और तिरुचेन्दूर से नियमित बस सेवाएं हैं।