घूमने-फिरने व इतिहास जानने का है शौक तो एक बार जरूर आएं नवरत्न गढ़

Daily news network Posted: 2018-12-21 18:19:48 IST Updated: 2018-12-21 21:05:18 IST
  • रांची-गुमला मार्ग पर स्थित सिसई प्रखंड में है नवरत्न गढ़। अपने अंदर ऐतिहासिक धरोहर को समेटे हुए है। विश्व विरासत में शामिल हो चुका है।

रांची-गुमला मार्ग पर स्थित सिसई प्रखंड में है नवरत्न गढ़। अपने अंदर ऐतिहासिक धरोहर को समेटे हुए है। विश्व विरासत में शामिल हो चुका है। डोइसागढ़, नवरत्न गढ़, रानी लुकई, कमल सरोवर, कपिलनाथ मंदिर, भैरव मंदिर की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और अपने आसपास के नयनाभिराम प्राकृतिक सौंदर्य से पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है।


 

 यह छोटानागपुर के नागवंशी राजाओं की ऐतिहासिक धरोहर है। आज के हाइ-टेक युग से हजारों वर्ष पहले के डोइसागढ़, को आज नगर गांव के नाम से जाना जाता है। कभी यहां किलकारियां गूंजती थी। यहां के लोगों का पहनावा, बोल, खान-पान वर्तमान परिवेश से एकदम भिन्न था।

 


 नागवंशी राजाओं द्वारा बनाये गये अमूल्य भवन खंडहर में तब्दील हो चुके हैं। इतिहास बताता है कि मुगल साम्राज्य से बचने के लिए राजा दुर्जनशाल ने इसका निर्माण करवाया था। खुद राजा दुर्जनशाल ने चारों तरफ पहाड़ों से घिरे स्थल पर नवरत्न गढ़ की स्थापना की थी। नवरत्न गढ़ के चारों तरफ खाई थी। यहां प्रवेश करने का एकमात्र रास्ता हुआ करता था।


 कलांतार में समय बदला। खाई समय के साथ समतल जमीन में बदल गयी। कई भवन जमींदोज हो गये। कुछ शेष हैं, लेकिन आज नवरत्न गढ़ बिल्कुल वीरान है। अमूल्य भवन खंडहर बन चुके हैं। इसका इतिहास अनोखा है, अमूल्य है।

 

 

क्या देखें

 डोइसागढ़ व नवरत्न गढ़ के नयनाभिराम प्राकृतिक सौंदर्य को निहारें। पांच मंजिली वर्गाकार इमारत, 33 इंच मोटी दीवार, रानी वास, कचहरी घर, कमल सरोवर, रानी लुकईयर की भूलभुलैया, गुप्त कमरा, गुबंद के भीतरी भाग में पशुओं के चित्र, घोड़ा, सिंहों से उत्कीर्ण परिपूर्ण आकृति, चारों कोनों पर शीर्ष गुंबदनुमा स्तंभों पर लिपटे बड़े-बड़े नाग, जगन्नाथ मंदिर, भैरव मंदिर, कपिलनाथ मंदिर, मंदिर के गर्भगृह में बड़ी-बड़ी मूर्तियां, धोबी मठ, दीवारों पर मनोहारी चित्रकारी जरूर देखें।

 


  


कैसे पहुंचें, कहां ठहरें

 यह सिसई प्रखंड में है। सिसई से पांच, गुमला से 32 व रांची से 65 किमी दूर है। यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है। डोइसागढ़ तक जाने के लिए पक्की सड़क है। आसपास गांव हैं। ठहरने व खाने-पीने की व्यवस्था नहीं है। होटल सिसई में है। यहां भोजन कर सकते हैं। सिसई में ठहरने की व्यवस्था नहीं है। ठहरने के लिए गुमला व रांची के होटलों में रुका जा सकता है। यहां सुबह सात बजे से शाम पांच बजे तक घूम फिर सकते हैं। यहां के ऐतिहासिक धरोहर व प्राचीन किला को देखने के बाद यहां बार-बार आने का मन करेगा।