भारत के पूर्व का स्विट्जरलैंड है सिक्किम, एक बार जरूर देखें यहां की खूबसूरती

Daily news network Posted: 2019-05-16 16:03:39 IST Updated: 2019-05-16 20:38:14 IST
  • पूर्वोतर भारत के सबसे खूबसूरत हिस्से की बात करें तो सबसे पहला नाम सिक्किम का ही आता है। दुनिया में पर्वतों की तीसरी सबसे ऊंची चोटी कंचनजंगा के मनमोहक व्यू के साथ इसे भारत के पूर्व का स्विट्जरलैंड भी कहा जाता है।

पूर्वोतर भारत के सबसे खूबसूरत हिस्से की बात करें तो सबसे पहला नाम सिक्किम का ही आता है। दुनिया में पर्वतों की तीसरी सबसे ऊंची चोटी कंचनजंगा के मनमोहक व्यू के साथ इसे भारत के पूर्व का स्विट्जरलैंड भी कहा जाता है। पर्यटकों से भरा रहने वाला ये सिक्किम हर साल 16 मई को अपना फांउडेशन डे मनाता है। आज ही के दिन 1975 को यह भारत का 22वां राज्य बना था। इस मौके पर आज हम बताएंगे कि इस छोटे से राज्य में पर्यटकों के लिए क्या खास है। जो सभी पर्यटकों का दिल चुरा लेता है। इस वेकेशन आप भी अपने दोस्तों और परिवार वालों के साथ यहां घूमने का प्लान बना सकते हैं।



 सोम्गो लेक

 यह झील एक किलोमीटर लंबी, अंडाकार है। स्थानीय लोग इसे बेहद पवित्र मानते हैं। मई और अगस्त के बीच झील का इलाका बेहद खूबसूरत हो जाता है। दुर्लभ किस्मों के फूल यहां देखे जा सकते हैं। इनमें बसंती गुलाब, आइरिस और नीले-पीले पोस्त शामिल हैं। झील में जलीय और पक्षियों की कई प्रजातियां मिलती हैं। लाल पांडा के लिए भी यह एक मुफीद जगह है। सर्दियों में झील का पानी जम जाता है।

 


नाथुला दर्रा

 14,200 फीट की ऊंचाई पर, नाथु-ला दर्रा भारत-चीन सीमा पर स्थित है। सिक्किम को चीन के तिब्बत स्वशासी क्षेत्र से जोड़ता है। यह यात्रा अपने आप में आनंद देने वाला अनुभव है। धुंध से ढंकी पहाड़ियां, टेढ़े-मेढ़े रास्ते और गरजते झरने और रास्ता तो अद्भुत है। इस जगह जाने के लिए पर्यटकों के पास परमिट होना चाहिए।

 


पेलिंग

 पेलिंग तेजी से लोकप्रिय पर्यटन स्थल बनता जा रहा है। 6,800 फीट की ऊंचाई पर स्थित इसी जगह से दुनिया की तीसरी सबसे ऊंची चोटी माउंट कंचनजंघा को सबसे करीब से देखा जा सकता है। यह स्थान तो खूबसूरत है ही, पेलिंग के अन्य आकर्षण हैं सांगा चोइलिंग मोनास्ट्री, पेमायंगत्से मोनास्ट्री और खेचियोपालरी लेक।

 


बाबा मंदिर, एक सैनिक देता है पहरा

 बहुत सुना था कि सिक्किम में एक सैनिक का मंदिर है जो आज भी सरहदों पर पहरा देते हैं। बाबा मंदिर से मशहूर यह मंदिर छांगू लेक के भी ऊपर है। यह भारतीय सेना के जवान हरभजन सिंह का मंदिर है। लोग कहते हैं कि बाबा हरभजन सिंह आज भी अपनी ड्यूटी करते हैं। इतना ही नहीं आज भी चीन के साथ जब बैठक होती है तो उनकी कुर्सी खाली रखी जाती है, उनके सामने खाने-पीने का सामान परोसा जाता है और यह माना जाता है कि वे वहां बैठे हैं।

 


सिक्किम का आखिरी गांव लाचुंग

 अगले दिन लाचुंग जाने का कार्यक्रम था। यह सिक्किम का छोटा सा कस्बा है. लेकिन यहां रूक कर पर्यटक नॉर्थ सिक्किम की यमथांग घाटी और जीरो प्वाइंट जाते हैं। यमथांग घाटी का प्रवेश द्वार है लाचुंग। इन कस्बों में रूकने के लिए सामान्य से होटल मिलते हैं जिनमें सुविधाओं के नाम पर रहने, सोने और खाने का इंतजाम होता है। वैसे जो पहाड़ के सफर पर निकले उसे इससे ज्यादा और चाहिए भी क्या? कठिन था पहाड़ों का 115 किमी का सफर। चुंगथांग होते हुए खूबसूरत पहाड़ी रास्ते से हम 8500 फीट ऊपर स्थित लाचुंग पंहुचे।


गंगटोक

 सिक्किम की राजधानी गंगटोक न सिर्फ प्राकृतिक खूबसूरती के लिए मशहूर है, बल्कि यहां लोग याक सफारी, केबल राइड और अडवेंचर ऐक्टिविटीज करने के लिए भी आते हैं। गंगटोक में वकेशन मनाना आपके लिए पैसा वसूल एक्सपीरियंस होगा। वैसे तो आप यहां सारे मौसम एंजॉय कर सकते हैं, लेकिन गंगटोक घूमने का बेस्ट टाइम बसंत ऋतु होता है।

 


युक्सोम

 यह सिक्किम की पहली राजधानी थी। इतिहास कहता है कि सिक्किम के पहले श्रेष्ठ शासक ने 1641 में तीन विद्वान लामाओं से इस शहर का शुद्धिकरण कराया था। नोर्बुगांगा कोर्टेन में इस समारोह के अवशेष आज भी मौजूद है। इस जगह को पवित्र स्थान समझा जाता है, क्योंकि सिक्किम का इतिहास ही यहां से शुरू होता है। यह प्रसिद्ध माउंट कंचनजंघा की चढ़ाई के लिए बेस कैम्प भी है।

 


जानें से पहले जान लें ये बातें

 मौसम का हाल जान लें। परमिट जरूर ले लें। गरम कपड़े पहन कर निकलें, विशेष रूप से इनर, टोपा और दस्ताने। जंगल में किसी फूल को छूने से पहले उसके बारे में पता कर लें। पहाड़ों में सफर की शुरुआत सुबह-सुबह करें। खाने-पीने का सामान अपने साथ रखें।

 


कैसे पहुंचे

 गंगटोक जाने के लिए करीबी एयरपोर्ट बागडोगरा है जो करीब 124 किमी दूर है। नजदीकी रेलवे स्टेशन न्यू जलपाईगुड़ी है जिसके बीच की दूरी करीब 120 किमी है। दोनों जगह से प्राइवेट या शेयर्ड टैक्सी से गंगटोक पहुंच सकते हैं।