अल्मोड़ा: आपका मन मोह लेंगी यहां की संस्कृति और खूबसूरती

Daily news network Posted: 2019-04-04 17:17:51 IST Updated: 2019-04-04 19:08:39 IST
  • हमारा भारत प्रकृति की सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है। भारत में मौजूद ऐसे कई स्थान हैं जहां की खूबसूरती देश के ही नहीं बल्कि विदेशी लोगों को भी अपनी ओर आकर्षित करती है। ऐसी ही खूबसूरती के लिए विख्यात है उत्तराखंड के 13 जिलों में एक अल्मोड़ा जिला।

हमारा भारत प्रकृति की सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है। भारत में मौजूद ऐसे कई स्थान हैं जहां की खूबसूरती देश के ही नहीं बल्कि विदेशी लोगों को भी अपनी ओर आकर्षित करती है। ऐसी ही खूबसूरती के लिए विख्यात है उत्तराखंड के 13 जिलों में एक अल्मोड़ा जिला।



दूर-दूर तक फैले बर्फ की चोटियां इसे और भी खूबसूरत बनाती है, चीड, देवदार के घने जंगलों से भरा मन को रोमांचित करता है और तन को ठंडी -ठंडी हवा देता है। यहां की एक खास बात यहां के मकान पहाड़ नुमा बनाये जाते है जिसमे चीड़, देवदार, तुनी की लकड़ियों का उपयोग किया जाता है। और ये मकान शरद ऋतू के समय गरम और गर्मियों के समय ठंडक देते है।



ग्रीष्मकाल के समय पहाड़ियों को देखने लायक होता है बुरांस के फूल यहां की खूबसूरती को और चार चांद लगा देते है। मंदिर-कुमाऊं के प्रसिद्ध लोक-देवता गोल देवता का मंदिर नन्दा देवी का मंदिर कसार देवी मंदिर यहां से आप पर्वतराज हिमालय के दर्शन भी कर सकते है। अल्मोड़ा के आस पास का सौंदर्य कटारमल मन्दिर जो अल्मोड़ा से महज 17 किलोमीटर की दुरी में मोटर मार्ग कोशी होते हुए कटारमल को वहां से 3 किलोमीटर कच्ची सड़क कटारमल के सूर्य मन्दिर तक जाती है।



कहा जाता है कोर्णाक के सूर्य मन्दिर के बाहर जो झलक है, वह कटारमल मन्दिर में आंशिक रुप में दिखाई देती है यहां की मूर्तियां बारहवीं शताब्दी की बतायी जाती है सूर्य भगवान की मूर्ति सूर्य पद्मासन लगाकर बैठे हुए हैं। यह मूर्ति एक मीटर से अधिक लम्बी और पौन मीटर चौड़ी भूरे रंग के पत्थर में बनाई गई है।



यहां से आगे जाकर कठपुर्निया से एक मोटर मार्ग माता स्याही देवी (सीतला माता) को जाता है सीतला देवी का यहां प्राचीन मंदिर है। इस देवी की इस सम्पूर्ण क्षेत्र में बहुत मान्यता है। इसीलिए सीतलादेवी के नाम से ही इस स्थान का नाम सीतलाखेत पड़ा है।