रहस्य, रोमांच से भरी हैं अजंता की गुफाएं, जानें क्या हैं खास बातें

Daily news network Posted: 2018-07-03 16:47:49 IST Updated: 2018-07-03 18:27:06 IST
  • विश्व प्रसिद्ध अजंता की गुफाएं हमेशा से ही जिज्ञासा और टूरिस्टों के आकर्षण का केंद्र रही हैं। यहां की सुंदर चित्रकारी व मूर्तियां कलाप्रेमियों के लिए स्वर्ग से कम नहीं हैं।

नर्इ दिल्ली।

विश्व प्रसिद्ध अजंता की गुफाएं हमेशा से ही जिज्ञासा और टूरिस्टों के आकर्षण का केंद्र रही हैं। यहां की सुंदर चित्रकारी व मूर्तियां कलाप्रेमियों के लिए स्वर्ग से कम नहीं हैं। हरियाली की चादर ओढ़े यहां की चट्टानें अपने अंदर छुपे हुए इतिहास की ये धरोहर अपने उस काल की कहानी खामोशी से कहती नजर आती हैं। इसके साथ ही वाघोरा नदी यहां की खूबसूरती में और चार चांद लगा देती है। इन गुफाओं की खोज आर्मी ऑफिसर जॉन स्मिथ व उनके दल ने सन् 1819 में की थी। वे यहां शिकार करने आए थे, तभी उन्हें एक लाइन में 29 गुफाएं नजर आई।घोड़े की नाल के आकार में बनी यह 29 गुफाएं हमेशा से लोगों के लिए रहस्य, रोमांच और कौतूहल का विषय रही हैं।आज आपको वर्ल्ड फेमस इन अजंता गुफाओं के बारे में बताने जा रहा है।

 



यहां की सुंदर चित्रकारी व मूर्तियां बेहद अनमोल हैं। विशालकाय चट्टानें, हरियाली, सुंदर मूर्तियां और इस पर यहां बहने वाली वाघोरा नदी जैसे यहां की खूबसूरती को परिपूर्णता प्रदान करती हैं। ये सभी बड़ी-बड़ी चट्टानों को काटकर बनाई गई हैं। इन गुफाओं को 1983 में वर्ल्ड हेरिटेज की सूची में शामिल किया गया था।औरंगाबाद से 101 किमी दूर उत्तर में अजंता की गुफाएं स्थित हैं। सह्याद्रि की पहाडिय़ों पर स्थित इन 29 गुफाओं में लगभग 5 प्रार्थना भवन और 25 बौद्ध मठ हैं। घोड़े की नाल के आकार में निर्मित ये गुफाओं में 200 ईसा पूर्व से 650 ईसा तक बौद्ध धर्म व संस्कृति का चित्रण है। अजंता की गुफाओं में दीवारों पर खूबसूरत अप्सराओं व राजकुमारियों की विभिन्न मुद्राओं में चित्र उकेरे गए हैं। ये यहां की उत्कृष्ट चित्रकारी व मूर्तिकला के बेहद ही सुंदर नमूने हैं।


 


 दो युगों की कहानी बताती हैं


19वीं शताब्दी की इन गुफाओं को दो भागों में बांटा जा सकता है। एक भाग में बौद्ध धर्म के हीनयान और दूसरे भाग में महायान संप्रदाय की झलक देखने को मिलती है। हीनयान वाले भाग में 2 चैत्य हॉल (प्रार्थना हॉल) और 4 विहार (बौद्ध भिक्षुओं के रहने के स्थान) हैं तथा महायान वाले भाग में 3 चैत्य हॉल और 11 विहार हैं। जिनमें बौद्ध भिक्षुओं की मूर्तियां व चित्र हैं। हथौड़े और छेनी की सहायता से तराशी गई ये मूर्तियां अपने आप में अप्रतिम सुंदरता समेटे हैं।

 

 


 ऐसे पहुंचें अजंता

 औरंगाबाद से अजंता की दूरी 101 किलोमीटर है। मुंबई, पुणे, अहमदाबाद, नासिक, इंदौर, धुले, जलगांव, शिर्डी आदि शहरों से औरंगाबाद के लिए बस सुविधा उपलब्ध है। सोमवार का दिन छोड़कर आप कभी भी अजंता जा सकते हैं। औरंगाबाद रेलवे स्टेशन से दिल्ली व मुंबई के लिए ट्रेन सुविधा भी आसानी से मिल जाती है। औरंगाबाद रेलवे स्टेशन के पास महाराष्ट्र पर्यटन विभाग का होटल भी है।