अर्जुन पुरस्कार न जीतने की कसक बाकी, क्या गोल्ड दिला पाएगा संजीता को ये सम्मान?

Daily news network Posted: 2018-04-07 12:04:13 IST Updated: 2018-04-07 12:32:06 IST
अर्जुन पुरस्कार न जीतने की कसक बाकी, क्या गोल्ड दिला पाएगा संजीता को ये सम्मान?
  • मणिपुर की संजीता चानू ने कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतकर देश का मान बढ़ाया है लेकिन बावजूद इसके संजीता के मन में पिछले साल योग्यता होने के बाद भी अर्जुन अवॉर्ड नहीं मिलने की कसक अभी बाकी है

इंफाल

मणिपुर की संजीता चानू ने कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतकर देश का मान बढ़ाया, लेकिन बावजूद इसके संजीता के मन में पिछले साल योग्यता होने के बाद भी अर्जुन अवॉर्ड नहीं मिलने की कसक अभी बाकी है। मीडिया रिपोर्ट् के अनुसार, संजीता ने कहा कि उन्हें अब तक समझ में नहीं आता है कि योग्यता के बाद भी मुझे अर्जुन अवॉर्ड क्यों नहीं दिया गया।

 

 

 इस साल गोल्ड जीतने के बाद संजीता की उम्मीदें बढ़ गई हैं। उनका कहना है, 'शायद यह गोल्ड इस बार उन्हें जरूर यह अवॉर्ड दिला देगा।' गोल्ड जीतने के बाद संजीता से मिलने के लिए खेल पदाधिकारी भी पहुंचे। वहां भी उन्होंने कहा कि पिछली बार ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड जीतने के बावजूद अर्जुन अवॉर्ड नहीं दिया गया, शायद इस बार उन्हें यह अवॉर्ड मिले।



अर्जुन पुरस्कार ना मिलने पर संजीता ने बयां किया दर्द

 

 संजीता का कहना है, 'ग्लासगो के सभी गोल्ड मेडलिस्ट को यह अवॉर्ड दे दिया गया, लेकिन मुझे इस लायक नहीं समझा गया। मेरे साथ ऐसा क्यों हुआ यह बात मुझे अब तक समझ नहीं आई है। संजीता ने मुश्किल परिस्थितियों का सामना करते हुए गोल्ड कोस्ट  में गोल्ड जीता। उन्होंने यह गोल्ड 53 किलो में जीता है। इस वर्ग में कभी किसी भारतीय ने गोल्ड नहीं जीता। मणिपुर की वेटलिफटर ने यह गोल्ड बेहद विपरीत परिस्थतियों में जीता है। वर्ल्ड चैंपियनशिप के दौरान लगी पीठ की चोट से जूझते हुए उन्होंने यह गोल्ड जीता है।

 


 चानू ने अर्जुन पुरस्कार नहीं मिलने पर हाईकोर्ट में अपील की थी

 

 संजीता को 2017 में अर्जुन पुरस्कार के लिए नहीं चुना गया। इसका विरोध करते हुए उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उनकी दलील थी कि लगातार दो साल से बेहतरीन प्रदर्शन करने के बावजूद उन्हें इस पुरस्कार के लिए नहीं चुना गया। जबकि खेल मंत्रालय ने उनसे कमतर परफार्मेंस देने वाले एथलीट्स को इस पुरस्कार के लिए चुना।


 हालांकि हाई कोर्ट ने उनकी अर्जी खारिज कर दी थी। उनसे पहले 2015 में मुक्केबाज मनोज कुमार भी अर्जुन पुरस्कार न मिलने के विरोध में हाईकोर्ट पहुंच गए थे। अदालत के दखल के बाद ही उन्हें अर्जुन पुरस्कार मिला था।


 


 कॉमनवेल्थ गेम्स में सभी रिकॉर्ड न तोड़ पाने का दुख

 


संजीता चानू ने क्लीन एंड जर्क की अंतिम कोशिश में 112 किग्रा ऑप्ट किया था, लेकिन वह फाउल कर गईं। यदि इसमें सफल रहतीं तो कॉमनवेल्थ गेम्स में 53 किग्रा वर्ग में सभी रिकॉर्ड (स्नैच और क्लीन एंड जर्क) अपने नाम करने वाली एथलीट बन जातीं।


संजीता को यह रिकॉर्ड न बना पाने का दुख है। गोल्ड जीतने के बाद उन्होंने कहा, 'यदि अंतिम प्रयास में फाउल नहीं करती तो सभी रिकॉर्ड बनाने में सफल हो जाती है। मैं ऐसा करना चाहती थी। मैं यह मौका चूक गई। इसका मुझे दुख है।' कॉमनवेल्थ गेम्स में 53 किग्रा में टोटल और क्लीन एंड जर्क का रिकॉर्ड पापुआ न्यू गिनी की डिका टौआ के नाम है। टौआ ने 25 जुलाई, 2014 को ग्लासगो में क्लीन एंड जर्क में 111 किग्रा और टोटल 193 किग्रा का वजन उठाया था।