बचपन में पत्थर तोड़ने वाला यह खिलाड़ी, अाज भारतीय फुटबॉल के इस सपने को पूरा करने में जुटा

Daily news network Posted: 2018-09-09 13:23:08 IST Updated: 2018-09-09 13:23:08 IST
बचपन में पत्थर तोड़ने वाला यह खिलाड़ी, अाज भारतीय फुटबॉल के इस सपने को पूरा करने में जुटा
  • कहते हैं सपने देखना अच्छी बात है क्योंकि सपने हमें एक न या मुकाम आैर ऊंचाई देते हैं। एेसा ही एक सपना है भारत की अंडर-16 फुटबॉल टीम के मिडफील्डर मेघालय के 15 बरस के मासूम से चेहरे वाले रिकी शाबोन्ग का,

शिलांग।

कहते हैं सपने देखना अच्छी बात है क्योंकि सपने हमें एक न या मुकाम आैर ऊंचाई देते हैं। एेसा ही एक सपना है भारत की अंडर-16 फुटबॉल टीम के मिडफील्डर मेघालय के 15 बरस के मासूम से चेहरे वाले रिकी शाबोन्ग का, जो भारत को अंडर-17 फीफा विश्व कप फुटबॉल के लिए क्वॉलिफाई  करना चाहते हैं। 

 

बचपन में तोड़ते थे पत्थर

रिकी की कहानी ऐसी है कि जिससे देश की किसी भी खेल में नुमाइंदगी करने वाला खिलाड़ी प्रेरित होकर कामयाबी की नई कथा लिख सकता है। बता दें रिकी के जीवन में एक समय एेसा भी था जब वे कुछ पैसों आैर परिवार की मदद करने के लिए पत्थर तोड़ा करते थे। बचपन की इसी मेहनत ने उन्हें बचपन से अभावों से जूझकर शारीरिक और जेहनी तौर पर मजबूत बनाने में अहम रोल अदा किया।


बचपन के संघर्ष ने बना दिया इतना मजबूत

 रिकी को आप पहले पहले देखेंगे तो आपके लिए यह अहसास और अंदाज करना मुश्किल है कि पतला दुबला सा दिखने वाला नौजवान इतना मजबूत खिलाड़ी है।रिकी को मनना है कि उन्हें इतना मजबूत उनके बचपन के संघर्ष ने बनाया है। मेघालय के खासी मिडफीलडर रिकी बताते हैं, 'मैं पैसे कमा अपने परिवार की  कुछ मदद कर सकूं इसके लिए पत्थर तोड़ा करता था। मुझसे परिवार के लिए जो कुछ भी मुमकिन हो सके, मैं वह करना चाहता था। अब मेरा सपना फुटबॉल में बड़ा नाम कमाना है। मेरा परिवार भी मेरे जरिए इसी सपने को जी रहा है। जिंदगी में मैंने भी अपने लिए अपने सपने बुने हैं।  इन्हीं सपनों को पूरा करना चाहता हूं। आप यदि मुझे तुरंत यह सवाल करेंगे कि मेरा सपना क्या है, तो मेरा जवाब होगा भारत को अंडर-17 फीफा विश्व कप फुटबॉल के लिए क्वॉलिफाई कराने की कोशिश करना।'

 

 

अभी तक किसी ने क्वॉलिफाई नहीं किया है फीफा अंडर-17 विश्व कप

 भारत ने अब किसी आयु वर्ग में फीफा विश्व कप के लिए क्वॉलिफाई नहीं किया है। भारत अब तक केवल फीफा अंडर-17 विश्व कप में बतौर मेजबान ही खेला था। रिकी की बतौर मिडफील्डर मजबूती भारत को मलेशिया में एएफसी अंडर-16 चैंपियनशिप के सेमीफाइनल में स्थान दिला कर फीफा अंडर-17 विश्व कप के लिए क्वॉलिफाई करने की कोशिश में अहम साबित हो सकती है। रिकी कहते हैं, 'मैं भारत के लिए मैदान अपनी पूरी ताकत के साथ अपना सब कुछ झोंक दूंगा।'

 

जीवन का इम्तिहान होगा फीफा अंडर-17 विश्व कप

'हमारी निगाह इतिहास बनाने पर तो है ही हमें इसे अमली जामा पहनाने का भी पूरा यकीन है। ग्रुप चरण के मैच मुश्किल होंगे। हर मैच मुश्किल होगा। हम एक समय में केवल एक मैच की बाबत सोंचेंगे। मैच दर मैच ही आगे बढ़ेंगे। हम किसी भी टीम को कम नहीं आंक सकते। ग्रुप चरण में हर टीम पूरी तैयारी के साथ आएगी और हम भी। यह हमारे जीवन का इम्तिहान होगा।'