पत्नी के सपनों के लिए जीते हैं पति आॅनलर, कुछ एेसी है Mary Kom के प्यार की दास्तां

Daily news network Posted: 2018-12-03 13:56:34 IST Updated: 2018-12-08 14:09:30 IST
पत्नी के सपनों के लिए जीते हैं पति आॅनलर, कुछ एेसी है Mary Kom के प्यार की दास्तां
  • भारत की स्टार मुक्केबाज मैरी काॅम से किसी पहचान की मोहताज नहीं हैं। पिछले हफ़्ते दिल्ली में हुर्इ विश्व चैम्पियनशिप के 48 किलो वर्ग के मुकाबले में मैरी काॅम ने छठा गोल्ड जीतकर इतिहास रच दिया।

इंफाल।

भारत की स्टार मुक्केबाज मैरी काॅम से किसी पहचान की मोहताज नहीं हैं। पिछले हफ़्ते दिल्ली में  हुर्इ विश्व चैम्पियनशिप के 48 किलो वर्ग के मुकाबले में मैरी काॅम ने छठा गोल्ड जीतकर इतिहास रच दिया। आपने मैरी काॅम की कहानी 2014 में आई बॉलीवुड फ़िल्म 'मैरी कॉम' के जरिए देखी होगी या कर्इ जगह उनकी कहानी पढ़ी होगी। लेकिन आज हम आपको एेसी कहानी बताने जा रहे हैं जो आपको बताएगी कि कैसे एक पति अपनी पत्नी के सपनों के लिए जीता है। जी हां मैरी काॅम आैर उनके पति के.ऑनलर का कहानी जो अपनी बीवी का हौसला कभी टूटने नहीं देते। रिंग में मैरी कॉम लड़ती हैं तो रिंग के बाहर उनके पति घर से जुड़ी मुश्किल परिस्थितिओं का सामना करते हैं। उनके साथ कदम से कदम मिलाकर चलता है और दोनों के बीच प्रेम, सम्मान और भरोसा कम नहीं होता।

 


 कब, कहां कैसे मिले?

 मैरी काॅम आैर उनके पति ऑनलर के मुताबिक उनकी कहानी रोमानी नहीं बल्कि बेहद सहज तरीक़े से शुरू हुई। पहली मुलाक़ात में पहली नजर का प्यार नहीं बल्कि दोस्ती का हाथ था। एक हिंदी चैनेल से बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि वह के. ऑनलर से साल 2000 में दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में मिली थीं। उन दिनों वो नेशनल गेम्स की तैयारी कर रहीं थीं तो ऑनलर शिलॉन्ग से ग्रैजुएशन की पढ़ाई कर दिल्ली में नौकरी की तलाश में आए थे। वह जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में फ़ुटबॉल खेलने आया करते थे और उसी दौरान उनकी मैरी कॉम से मुलाकात हुई। मैरी कॉम आैर आॅनलर पहले दोस्त के तौर पर ही मिले थे। शादी या प्यार का ख्याल मन में आया ही नहीं था। इस दोस्ती के दौरान दोनों के बीच शुरुआत में ही इतना तालमेल बैठ गया कि दोनों एक दूसरे को समझने लगे थे।'

 

 दो साल के दोस्ती के सफर के बाद किया शादी का फैसला

 फिर ये दोस्ती गहरी होती गई। 2001 में जब मैरी काॅम दिल्ली आ रही थी तभी ट्रेन सफ़र में मैरी कॉम का बैग, पैसा और पासपोर्ट चोरी हो गया था। उस दौरान आॅनलर ने मैरी की हर तरह से मदद की और उनका पासपोर्ट बनाने में मदद की क्योंकि उसके ग़ायब होने के कुछ दिन बाद ही मैरी कॉम को एक प्रतियोगिता में हिस्सा लेने जाना था। इस घटना से दोनों के बीच विश्वास और बढ़ गया। 2002 में विश्व बॉक्सिंग चैंपियनशिप में मैरी कॉम ने गोल्ड मेडल जीता और उनकी इस उपलब्धि के बाद भी ऑनलर से उनसे अपने दिल की बात कह डाली और शादी के लिए पूछा। मैरी ने ज़्यादा समय नहीं बल्कि दो साल में ही रिश्ते को मज़बूत कर लिया था और शादी करने का फैसला कर लिया।

 

 शादी में आर्इ कर्इ चुनौतियां

 लेकिन इस शादी के लिए ना लड़की वाले तैयार थे ना लड़के वाले। मैरी कॉम के मां-बाप इस शादी के ख़िलाफ़ थे क्योंकि उनको लगा कि वे बॉक्सिंग छोड़ देंगी और अपने करियर पर ध्यान नहीं देंगी। उन्हें लोग-समाज का भी डर था कि लोग कहेंगे कि बॉक्सर थी और अब शादी करके घर बैठ गई है। यहां तक कि मैरी कॉम के कोच तक इस रिश्ते से नाख़ुश थे। लेकिन सभी की बातों को, तानों को दरकिनार करते हुए मैरी कॉम और ऑनलर ने शादी करने की ठान ली और फिर 2005 में शादी के बंधन में बंध गए। शादी के बाद ही 2005 में रूस में आयोजित हुए विश्व बॉक्सिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल लाकर उन्होंने मानों बिना कुछ बोले बिना अपने मुक्कों से जवाब दे दिया। शादी के बाद उनके पति हमेशा उनका साथ देते रहे। उनकी ट्रेनिंग का हिस्सा बनते, वह ट्रेनिंग के लिए जातीं तो घर का ध्यान रखते और साथ ही साथ नौकरी पर भी जाते।


 रिश्ते की ताकत है दोनों की समझदारी

 आॅनलर बताते है कि बॉक्सर्स बहुत ग़ुस्से वाले होते हैं आैर मैरी कॉम बहुत जल्दी ग़ुस्सा हो जातीं हैं। ऐसे में मैं या तो उस जगह से चला जाता हूं ताकि वो शांत हो जाएं या फिर अचानक से कुछ और टॉपिक पर बात छेड़ देता हूं ताकि उसका ध्यान कहीं और चला जाए और वह थोड़ी शांत हो जाए। जब वो शांत हो जाती है तो हम बैठकर बातें करते हैं। इसमें संयम मुझे ही रखना पड़ता है।'वो बताते हैं, ''दोस्ती के दौरान ही मैं मैरी कॉम को समझने लगा था और उन्हें अच्छे से पता है कि मैरी कॉम के ग़ुस्से से कैसे निपटना है। ''शादी के बाद मैरी कॉम ने कई ख़िताब अपने नाम किए। 2005 में ताइवान के काओशियुंग शहर में हुए एशियन चैंपियनशिप में गोल्ड, 2006 में नई दिल्ली में आयोजित विश्व चैंपियनशिप में गोल्ड जीते।

 

 मैरी के पीछे का मां का किरदार निभाते हैं आॅनलर

 फिर चुनौती आई जब मैरी कॉम गर्भवती हुईं। उस वक़्त मैरी कॉम अपने करियर में अच्छा कर रहीं थीं, लेकिन दोनों ने परिवार को बढ़ाने का फ़ैसला किया और 2007 में उनकी ज़िंदगी में दो जुड़वा बच्चों ने दस्तक दी। लेकिन अब मैरी कॉम के सपनों का क्या? क्या ममता के आंचल में उनके सारे सपने हमेशा के लिए छिप जाते? उनका दृढ़ संकल्प और उनके पति के साथ ने मैरी कॉम के सपनों को कभी ख़त्म होने ही नहीं दिया। ऑनलर बताते हैं कि मैरी कॉम जब ट्रेनिंग के लिए जाती थीं तो वो पीछे से बच्चों का हर तरह से ध्यान रखते हैं। उनके घर के काम में उनके सास-ससुर भी हाथ बँटाते। ऑनलर ने ग्रैजुएशन के साथ-साथ मणिपुर यूनिवर्सिटी से एम. ए भी किया था। लेकिन वो अपना सब कुछ मैरी कॉम के सपनों में तलाशने लगे।

 

 बच्चों को जन्म देने के बाद डॉक्टर ने कहा था कि तीन साल तो लगेंगे फ़िट होने के लिए लेकिन मैंने एक साल में ही अपने आपको को बॉक्सिंग रिंग के लायक कर लिया'2007 में दो जुडवा बच्चों को जन्म देने के बाद मैरी कॉम ने ठीक एक साल बाद 2008 में गुवाहाटी में हुए एशियन चैंपियनशिप में भाग लिया और सिल्वर मेडल जीता। इसके बाद उसी साल चीन में हुए विश्व बॉक्सिंग चैंपियनशिप में गोल्ड जीता।