कॉमनवेल्थ गेम्स में देश का गर्व बनी संजीता चानू, इन वजहों से थी सुर्ख़ियों में

Daily news network Posted: 2018-04-06 15:09:03 IST Updated: 2018-04-06 17:22:11 IST
कॉमनवेल्थ गेम्स में देश का गर्व बनी संजीता चानू, इन वजहों से थी सुर्ख़ियों में
  • ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में चल रहे 21वें कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय वेटलिफ्टर संजीता चानू ने दूसरा गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया है।

इंफाल

ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में चल रहे 21वें कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय वेटलिफ्टर संजीता चानू ने दूसरा गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया है। भारत की स्टार वेटलिफ्टर संजीता चानू ने 53 किलोग्राम वर्ग में गोल्ड मेडल जीता है। इससे पहले उन्होंने 2014 ग्लासगो कॉमनवेल्थ में 48 किग्रा कैटेगरी में यह पदक अपने नाम किया था।

 

 



इससे पहले भारत की मीराबाई चानू ने देश को पहला गोल्ड दिलाया था। उन्होंने स्नैच राउंड में पहले प्रयास में 81 किलोग्राम का वजन उठाया, दूसरे प्रयास में 83 किलोग्राम, जबकि तीसरे प्रयास में चानू ने 84 किलोग्राम का वजन उठाकर कॉमनवेल्थ गेम्स का नया रिकॉर्ड बना दिया है। 53 किलोग्राम की कैटेगरी के स्नैच में यह अब तक का सबसे अधिक वजन है।  इसके साथ ही पुरुष वर्ग में भारत के गुरुराजा ने सिल्वर मेडल जीता था। वेटलिफ्टर गुरुराजा पुजारी ने 56 किलोग्राम कैटेगरी में 249 किग्रा वजन उठाया था। इसके साथ ही भारत के तीन पदक हो गए हैं।

 

 


शुरू से ही हावी रहीं चानू


24 साल की संजीता चानू ने खेल के दौरान अपनी तीन कोशिशों में लगातार 81, 82 और 84 किग्रा वजन उठाते हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में रिकॉर्ड कायम किया। इसके बाद, क्लीन एंड जर्क में पहली कोशिश में 104 और फिर 108 किग्रा वजन उठाया। हालांकि, तीसरी कोशिश में उन्होंने 112 किग्रा वजन ऑप्ट किया, लेकिन फाउल कर गईं। इस तरह कुल 192 किग्रा वजन उठाकर गोल्ड मेडल पर कब्जा किया। उन्होंने खेल में शुरू से दबदबा बना रखा था।


 

 संजीता ने तोड़ा स्वाति सिंह का रिकॉर्ड


2014 ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत की स्वाति ने स्नैच में 83 किग्रा वजन उठाकर रिकॉर्ड बनाया था। इसे शुक्रवार को गोल्ड कोस्ट में संजीता ने 84 किग्रा वजन उठाकर तोड़ दिया। हालांकि, स्वाति सिंह 2014 ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में क्लीन एंड जर्क में 100 किग्रा वजन उठा पाई थीं।


इस वजह से वे चौथे नंबर पर रही थीं, लेकिन गोल्ड जीतने वाली नाइजीरिया की चिका अमालाहा का डोप टेस्ट पॉजिटिव आ जाने की वजह से उनसे यह पदक छीन लिया गया था। इसके बाद दूसरे नंबर पर रहीं पापुआ न्यू गिनी की लोआ टौआ को गोल्ड दे दिया गया था। जबकि तीसरे नंबर पर रहीं भारत की संतोषी मात्सा को सिल्वर दिया गया था। वहीं, चौथे नंबर पर रही स्वाति ब्रॉन्ज जीतने में कामयाब रही थीं।

 


 पुराना प्रदर्शन नहीं दोहरा सकीं


संजीता ने कॉमनवेल्थ सीनियर (मेन एंड वूमेन) वेटलिफ्टिंग चैम्पियनशिप में 195 किग्रा (स्नैच में 85 किग्रा और क्लीन एंड जर्क में 110 किग्रा) वजन उठाकर कॉमनवेल्थ गेम्स कोटा हासिल किया था। हालांकि वह यहां अपने उस प्रदर्शन को दोहराने से चूक गईं।



कॉमनवेल्थ गेम्स में सभी रिकॉर्ड न तोड़ पाने का दुख


संजीता चानू ने क्लीन एंड जर्क की अंतिम कोशिश में 112 किग्रा ऑप्ट किया था, लेकिन वह फाउल कर गईं। यदि इसमें सफल रहतीं तो कॉमनवेल्थ गेम्स में 53 किग्रा वर्ग में सभी रिकॉर्ड (स्नैच और क्लीन एंड जर्क) अपने नाम करने वाली एथलीट बन जातीं।


संजीता को यह रिकॉर्ड न बना पाने का दुख है। गोल्ड जीतने के बाद उन्होंने कहा, 'यदि अंतिम प्रयास में फाउल नहीं करती तो सभी रिकॉर्ड बनाने में सफल हो जाती है। मैं ऐसा करना चाहती थी। मैं यह मौका चूक गई। इसका मुझे दुख है।'


कॉमनवेल्थ गेम्स में 53 किग्रा में टोटल और क्लीन एंड जर्क का रिकॉर्ड पापुआ न्यू गिनी की डिका टौआ के नाम है। टौआ ने 25 जुलाई, 2014 को ग्लासगो में क्लीन एंड जर्क में 111 किग्रा और टोटल 193 किग्रा का वजन उठाया था।

 


 रोल मॉडल

 

 मीराबाई चानू की ही तरह संजीता भी कुंजारानी देवी से बहुत प्रभावित थीं, जिन्होंने वेटलिफ़्टिंग में भारत के लिए ख़ूब नाम कमाया। भारतीय रेलवे की कर्मचारी संजीता स्वभाव से शर्मीली हैं, लेकिन जब वो मैदान पर उतरती हैं तो उनका दूसरा ही रूप देखने को मिलता है। संजीता के लिए मेडल जीतने का सिलसिला बचपन से ही शुरू हो गया था।

 


 2011 में सुर्खियों में आईं थीं चानू

 संजीता पहली बार तब सुर्खियों में आईं, जब 2011 एशियन वेटलिफ्टिंग चैम्पियनशिप में उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल जीता। 2012 में उन्होंने कॉमनवेल्थ वेटलिफ्टिंग चैम्पियनशिप में गोल्ड जीता। 2014 ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में 20 साल की उम्र में 173 किग्रा वजन उठाकर गोल्ड जीता था। तब उन्होंने 171 किग्रा वजन उठाने वालीं मीराबाई चानू को दूसरे स्थान पर धकेल दिया था।

 


 चानू ने अर्जुन पुरस्कार नहीं मिलने पर हाईकोर्ट में अपील की थी

 संजीता को 2017 में अर्जुन पुरस्कार के लिए नहीं चुना गया। इसका विरोध करते हुए उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उनकी दलील थी कि लगातार दो साल से बेहतरीन प्रदर्शन करने के बावजूद उन्हें इस पुरस्कार के लिए नहीं चुना गया। जबकि खेल मंत्रालय ने उनसे कमतर परफार्मेंस देने वाले एथलीट्स को इस पुरस्कार के लिए चुना।

 


 हालांकि हाई कोर्ट ने उनकी अर्जी खारिज कर दी थी। उनसे पहले 2015 में मुक्केबाज मनोज कुमार भी अर्जुन पुरस्कार न मिलने के विरोध में हाईकोर्ट पहुंच गए थे। अदालत के दखल के बाद ही उन्हें अर्जुन पुरस्कार मिला था।


 


मणिपुर के मुख्यमंत्री ने किया इनाम का ऐलान

 


भारत को दूसरा गोल्ड जिताने वाली वेटलिफ्टर संजीता चानू को मणिपुर के सीएम एन बिरेन सिंह ने बधाई दी है और कहा कि 'हमें संजीता चानू और मीरा बाई चानू पर गर्व है, उन्होंने ना सिर्फ मणिपुर को बल्कि देश को भी गौरान्वित किया है। आप दोनों वास्तव में एक महान मणिपुरी मीतीई नेन्गोल हैं जिन्होंने देश का नाम ऊंचा किया है'। इसके साथ ही सीएम एन बिरेन सिंह ने दोनों खिलाडियों को राज्य सरकार की तरफ से 15 लाख रुपए इनाम के तौर पर देने का ऐलान किया है।