हीमा दास 2020 में भारत के लिए लाएंगी गोल्ड, ये रहा सबूत

Daily news network Posted: 2018-04-13 13:37:26 IST Updated: 2018-04-13 18:36:59 IST
हीमा दास 2020 में भारत के लिए लाएंगी गोल्ड, ये रहा सबूत
  • भारत की खिलाड़ी हिमा दास की तारीफ आज हर जगह हो रही हैं और अगर सब कुछ ठिक रहा तो भारतीय एथलेटिक्स हीमा दास

गुवाहाटी

भारत की खिलाड़ी हिमा दास की तारीफ आज हर जगह हो रही हैं और अगर सब कुछ ठिक रहा तो भारतीय एथलेटिक्स हीमा दास 2020 में होने वाले ओलंपिक मैच टोक्यो एथलेटिक में बाजी मार सकती हैं। असम के नागांव जिले में धिंग से कंडुलिमारी नामक एक दूरदराज के गांव की लड़की ने 21वें राष्ट्रमंडल खेलों के सातवें दिन बुधवार को महिलाओं की 400 मीटर स्पर्धा के फाइनल में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया साथ ही फाइनल में वह 51.32 सेकेंड का समय निकालते हुए छठे स्थान पर रहीं।

 


यह हीमा का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है, लेकिन अपना सर्वश्रेष्ठ देने के बाद भी वह पदक तक नहीं ला पाईं। रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने पहले भी उचित प्रशिक्षण के बिना ही पहली बार में ही कोयम्बटूर के जूनियर राष्ट्रीय चैंपियनशिप में 100 मीटर दौड़ के फाइनल में जगह बनाई थी।

 


 हालांकि हिमा का समय विश्व रिकॉर्ड (47.60 सेकेंड) या ओलिंपिक रिकॉर्ड (48.25 सेकंड) के आस पास तो नहीं है, लेकिन हिमा और उनके प्रशंसकों के लिए यह संतोषजनक है क्योंकि कुछ ही महीनों में वह 400 मीटर की दौड़ में शामिल हो गई हैं।

 

 


कैरियर की शुरुआत

 

 उन्होंने 200 मीटर के धावक के रूप में अपने कैरियर की शुरुआत की थी लेकिन कुछ ही महीनों में उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर कई पदक जीते लिए। हिमा ने नैरोबी में विश्व जूनियर एथलेटिक चैंपियनशिप में पांचवें स्थान हासिल किया लेकिन, नैरोबी लौटने के बाद, उन्होंने अपने कोच और मेंटोर के सुझावों को मानते हुए 400 मीटर की रेस में भाग लेने का फैसला किया।

 


 2017 के बाद से हिमा दास के मेंटोर निपन दास ने कहा कि, "हम जानते थे कि 200 मीटर में सफल होना उनके लिए मुश्किल होगा। लेकिन 400 मीटर में वह न केवल एशियाई स्तर पर बल्कि वैश्विक क्षेत्र में अच्छी तरह से कर सकती हैं। इसलिए, राष्ट्रीय कोच राधाकृष्ण नायर के साथ चर्चा करने के बाद, उसने यहां पर सरसुजाई स्टेडियम में 400 मीटर की दूरी पर अभ्यास करना शुरू कर दिया।



400 मीटर के लक्ष्य तक पहुंचने के तुरंत बाद, उन्होंने मार्च 2017 में आयोजित ईस्ट जोन एथलेटिक मीट में स्वर्ण पदक हासिल किया। इसके साथ ही इस साल मार्च में पटियाला में फेडरेशन कप के सीनियर केटेगरी में भी हिमा ने स्वर्ण पदक जीता। अपने इस शानदार प्रदर्शन ने कारण उन्हें राष्ट्रमंडल खेलों में शामिल किया गया।


 खेल के क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले, हिमा एक साधारण लेकिन महत्वाकांक्षी लड़की थी। लेकिन साल 2017 में उनकी किस्मत ने उस वक्त पलटी मारी और उन्हें शारजाय में खेल के निदेशालय द्वारा आयोजित एक शिविर में भाग लेने के लिए निमंत्रण मिला। इसी खेल शिविर से उन्हें असम स्कूल टीम के लिए चुना गया था।

 


 


यूथ एथलेटिक चैंपियनशिप के बाद है सुर्खियों में आई हिमा

 

 नवंबर 2017 में हैदराबाद में आयोजित राष्ट्रीय यूथ एथलेटिक चैंपियनशिप के बाद वह सुर्खियों में आई, जहां से उन्हें विश्व युवा चैम्पियनशिप के लिए चुना गया था। जहां उन्हें उनके लक्ष तक पहुंचाने में मैन्टर निपन दास, कोच नबाजमित मलकर, राज्य एथलेटिक बॉडी के सचिव प्रदीप नूनसा और खेल निदेशालय के अधिकारियों ने अन्य लोगों ने उनकी मदद की और उन्हें तकनीकी, वित्तीय और नैतिक रूप से हर मोड़ पर मदद और सहारा दिया।


 इसके साथ ही यह सवाल भी उठता है कि आखिर ऐसा क्या है जो उन्हे उनके खेल के जरिए उन्हे विश्व चैम्पियन बना सकता है। तो बता दें जिस तरह से उन्होंने खेल में अपना प्रदर्शन दिखाया है उससे यह कहना कतई गलत नहीं होगा कि, जिस तरह से प्रदर्शन कर रही है, उससे आने वाले समय में उन्हे विश्व विजेता बनने से कोई नहीं रोक सकता।

 

 


हालांकि, राष्ट्रमंडल खेलों में हिमा द्वारा किए गए प्रदर्शन को उनकी वास्तविक क्षमता को मापने का मापदंड मानना सही नही है, क्योंकि भले ही वह इस बार 7 स्थान पर आई हों लेकिन उनके बढ़ते कदम और आत्मविश्वास को देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि आने वाले समय में वह भारत के लिए गोल्ड जीत सकती हैं।

  

 


इन दो वजहों से हिमा जीत सकती हैं गोल्ड

 

 हिमा का गोल्ड तक का सफर इतना मुश्किल नहीं है क्योंकि पहले तो इस बार के प्रदर्शन से उनका आत्मविश्वास काफी बढ़ गया है इसके साथ ही उनकी अमेरिकी कोच जेलेना की सख्त ट्रेनिंग और निगरानी ने हिमा को एक अच्छी एथलीट के रूप में विकसित किया है। उनकी सबसे अच्छी क्वालिटी यह है उन्हें पता है कि कैसे अंतिम समय में जीत का दांव खेलना है और अपने लक्ष्य को पाना है जिसका उदाहरण हम गोल्ड कोस्ट में देख चुके हैं।


 


फाइनल में पहुंच हीमा ने सबको चौंकाया था

बता दें कि हिमा दास ने महिला 400 मीटर में 51.53 सेकंड का अपना निजी सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए फाइनल में जगह बनाकर सबको चौंका दिया था।  वह सेमीफाइनल में तीसरे स्थान पर रहीं जबकि फाइनल में जगह बनाने वाली आठ धावकों में उन्होंने सातवां सबसे तेज समय निकाला। उन्होंने अपने निजी सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन में 0.44 सेकंड का सुधार किया था। हिमा ने राष्ट्रमंडल खेलों के लिए क्वॉलिफाइ करके सभी को हैरान किया था। बता दें कि हिमा दास के क्वालीफाई करने के बाद प्रदेश भाजपा अध्यक्ष रंजीत दास ने उन्हें बधाई दी थी।


 नगांव के कादुलीमारी गांव की रहने वाली हिमा को बधाई देते हुए रंजीत दास ने कहा था कि पहली बार प्रदेश की किसी धावक ने राष्ट्रमंडल खेलों में अपनी प्रतिभा को दिखाकर देश का नाम रोशन किया है। उन्होंने कहा था कि राज्य में खासकर खेल के क्षेत्र में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है और राज्य सरकार इन प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। वहीं असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने भी ट्वीट कर हिमा दास को शुभकामनाएं दी थीं। ।