मुक्केबाजी: अमित, निखत, मीना ने जीते स्वर्ण, पुलवामा के शहीदों को किए समर्पित

Daily news network Posted: 2019-02-20 14:02:37 IST Updated: 2019-02-20 14:03:04 IST
मुक्केबाजी: अमित, निखत, मीना ने जीते स्वर्ण, पुलवामा के शहीदों को किए समर्पित
  • भारतीय मुक्केबाजों ने बुल्गारिया के सोफिया में 70वें स्ट्रांजा मेमोरियल मुक्केबाजी चैम्पियनशिप में मंगलवार को कुल सात पदक अपने नाम किए जिनमें तीन स्वर्ण, एक रजत और तीन कांस्य पदक शामिल हैं।

नई दिल्ली/कोहिमा।

भारतीय मुक्केबाजों ने बुल्गारिया के सोफिया में 70वें स्ट्रांजा मेमोरियल मुक्केबाजी चैम्पियनशिप में मंगलवार को कुल सात पदक अपने नाम किए जिनमें तीन स्वर्ण, एक रजत और तीन कांस्य पदक शामिल हैं। एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाले अमित पंघल (49 किलोग्राम भारवर्ग) इस टूर्नामेंट में स्वर्ण पदक जीतने वाले भारत के इकलौते पुरुष खिलाड़ी हैं।

 


 वहीं महिलाओं में पूर्व वल्र्ड जूनियर चैम्पियन निखत जरीन (51 किलोग्राम) और मेइसनाम मीना कुमारी देवी (54 किलोग्राम) ने अपने-अपने मुकाबले जीत स्वर्ण पदक हासिल किया जबकि पदार्पण कर रहीं मंजू रानी को 48 किलोग्राम भारवर्ग में रजत पदक से संतोष करना पड़ा। अमित मुकाबले के शुरू से ही अपने विपक्षी कजाकिस्तान के टेमिराट्स झुसुपोव पर हावी रहे। उन्हें मुकाबला 5-0 से अपने नाम करने में किसी तरह की परेशानी नहीं आई। अमित का यह इस टूर्नामेंट में लगातार दूसरा स्वर्ण पदक है।

 


 22 साल की निखत जरीन ने फाइनल मुकाबले में फिलिङ्क्षपस की मैग्नो आयरिश को मात दी। निखत ने एकतरफा खेल दिखाया। दो बार की राष्ट्रीय विजेता ने कभी भी अपनी विपक्षी को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया और 5-0 से जीत हासिल की। हैदराबाद की निखत नेअपना दूसरा अंतर्राष्ट्रीय पदक जीत लिया। निखत ने कंधे की चोट से उबरने के बाद वापसी करते हुए स्वर्ण पदक जीता। दो साल पहले निखत के कंधे की सर्जरी हुई थी। उन्होंने पिछले साल अप्रैल में बेलग्राद इंटरनेशनल में भी स्वर्ण पदक जीता था।

 


 नागालैंड की मीना कुमारी ने भारत को दूसरा स्वर्ण दिलाया। हालांकि मीना को स्वर्ण के लिए काफी मेहनत करनी पड़ी। उन्होंने फिलिङ्क्षपस की एइरा विलेजेस को 54 किलोग्राम भारवर्ग के फाइनल में कड़े मुकाबले में 3-2 से पटखनी दी। इन तीनों मुक्केबाजों ने अपने स्वर्ण पदक पुलवामा में आंतकवादी हमले में शहीद हुए सीआरपीएफ के 40 जवानों को समर्पित किए हैं। भारत को हालांकि 48 किलोग्राम भारवर्ग में निराशा हाथ लगी क्योंकि पूर्व विश्व चैम्पियन फिलिङ्क्षपस की ही जोसी गबुको ने भारत की मंजू रानी को 4-0 से परास्त कर उन्हें रजत पदक तक ही रोक दिया। गाबुको का अनुभव युवा मंजू के लिए भारी पड़ा। मंजू को 4-1 से हार मिली थी लेकिन रैफरी द्वारा बाउट खत्म होने के बाद भी पंच मारने के कारण उन्हें चेतावनी मिली और वह एक अंक गंवा बैठीं।


 साल के पहले यूरोपियन मुक्केबाजी टूर्नामेंट में भारतीय महिलाओं द्वारा किया गया यह प्रदर्शन शानदार है। इससे पहले भारतीय महिलाओं ने तीन कांस्य पदक भी हासिल किए। भारत की नीरज (60 किलोग्राम भारवर्ग), लवलिना बोरगोहेन (69 किलोग्राम भारवर्ग) और पवलियाओ बासुमात्री (64 किलोग्राम भारवर्ग) को सेमीफाइनल में हार के साथ कांस्य पदक से ही संतोष करना पड़ा था। इस लिहाज से भारतीय महिलाओं ने इस टूर्नामेंट में कुल छह पदक अपने नाम किए।


 भारत ने बीते साल यूरोप के इस सबसे पुराने एमेच्योर मुक्केबाजी टूर्नामेंट में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया था। भारत ने पिछले साल इस टूर्नामेंट में कुल 11 पदक अपने नाम किए थे जिनमें से दो स्वर्ण पदक थे और छह पदक महिलाओं ने जीते थे। इस साल भी भारतीय महिलाएं छह पदक जीतने में सफल रही हैं।