अभी भी खदान कर्मियों के बचावकार्य में लगी है टीम, गांव वालों से नहीं मिल पा रही कोर्इ मदद

Daily news network Posted: 2019-01-11 11:26:56 IST Updated: 2019-01-12 10:48:41 IST
अभी भी खदान कर्मियों के बचावकार्य में लगी है टीम, गांव वालों से नहीं मिल पा रही कोर्इ मदद
  • मेघालय के ईस्ट जयंतिया हिल्स में स्थित कसान गांव में पानी से भरे कोयला खदान में 15 खनिकों के फंसे हुए करीब एक महिने होने वाला है। यह घटना 13 दिसंबर को घटित हुई थी जिसमें नजदीकी गांव के ही मजदूर फंस गए थे...

गुवाहाटी।

मेघालय के ईस्ट जयंतिया हिल्स में स्थित कसान गांव में पानी से भरे कोयला खदान में 15 खनिकों को फंसे हुए करीब एक महिने होने वाले हैं। यह घटना 13 दिसंबर को घटित हुई थी जिसमें नजदीकी गांव के ही मजदूर फंस गए थे। नौसेना, एनडीआरएफ, ओडिशा फायर सर्विस, कोल इंडिया लिमिटेड,किर्लोस्कर, एसडीआरएफ सहित तमाम एजेंसियां बचाव कार्य में लगी हुई है बावजूद परिणाम ढाक के तीन पात कहावत को चरितार्थ कर रहा है।

 

अब तो राज्य सरकार सीधे निशाने पर सधी हुई है। विपक्ष लगातार हल्ला बोल रही है। मालूम हो कि जिस जगह खदान हादसा हुआ है उसके आस-पास पचास से अधिक छोटे-छोटे शाॅफ्ट है। अधिकांश शाॅफ्ट में पानी भरा हुआ है। शुरूआती दौर में एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की बचाव दल ने छोटे पंपों से पानी को बाहर किया। कामयाबी नहीं मिली तो नौसेना, फायर ओडिशा सर्विस सहित अन्य एजेंसिया भी मदद में लग गई है। 100 हार्स पावर के पंपों के आने के बाद भी स्थिति जस की तस है।


नौसेना और एनडीआरएफ, ओडिशा फायर सर्विस, कोल इंडिया आदि से आए अधिकारी व सदस्य अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहे है कि कोई सकारात्मक अथवा करिश्माई नजीजे सामने आ जाए। बचाव अभियान में लगे बचाव कर्मियों को जिला प्रशासन मदद कर रही है। किंतु सवाल उठ रहे हैं कि जिन चीजों की जरूरत शुरूआती दौर में ही मुहैया कराया जाना चाहिए था। वह घटना के करीब एक सप्ताह अथवा 10 दिन बाद कराया गया।

 

 

बचाव अभियान में जुटी एक एजेंसी के अधिकारी ने नाम न बताने के शर्त पर बताया कि अभियान में स्थानीय निवासियों (गांव) की तरफ से कोई समर्थन नहीं मिल रहा है। सरकार या जिला प्रशासन ही सब कुछ करे इतना ही सीमित नहीं, स्थानीय समाज का भी कुछ जिम्मेदारी बनता है। करीब एक महीने होने वाले है। स्थानीय या आसपास के लोगो को भी उनके साथ लग जाना चाहिए था। बाहर से लोग आकर काम कर रहे है पर सरकार व जिला प्रशासन को छोड़ स्थानीय समाज से कोई सहयोग नहीं मिल रहा है।

 

 मालूम हो कि यह एक राष्ट्रीय आपदा है। बाहर किसी राज्य में कोई मामूली सा घटना होने पर स्थानीय लोग भी पूर्णतः सहयोग ही नहीं खाने-पीने के सामान के साथ भी लोग मैदान में उतर आते हैं। ज्ञात हो कि शुरूआती समय में कांग्रेस ने कई खामियों को गिनाया भी था। फिलहाल ध्यान देने योग्य है कि कसान गांव में जो घटना घटी है इसे देखने के लिए बहुत से लोग आ रहे हैं। घटनास्थल एक पर्यटन स्थल में तब्दील हो गया है। परंतु बचाव कार्य में लगी है यह किसी को नजर आ रहा है।