त्रिपुरा में बजरंग दल और वीएचपी के समर्थकों ने मुसलमानों को धमकाया

Daily news network Posted: 2018-04-05 15:19:48 IST Updated: 2018-04-05 15:19:48 IST
त्रिपुरा में बजरंग दल और वीएचपी के समर्थकों ने मुसलमानों को धमकाया
  • त्रिपुरा में भाजपा के सत्ता में आते ही हिंदूवादी संगठनों की गतिविधियां तेज हो गई है। गत रविवार को बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद के करीब 600 समर्थकों ने रैली निकाली। इनके हाथों में हथियार और भगवा झंडे थे।

अगरतला।

त्रिपुरा में भाजपा के सत्ता में आते ही हिंदूवादी संगठनों की गतिविधियां तेज हो गई है। गत रविवार को बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद के करीब 600 समर्थकों ने रैली निकाली। इनके हाथों में हथियार और भगवा झंडे थे। प्रदर्शन के दौरान वे लोगों को गो हत्या नहीं करने के लिए चेता रहे थे। भीड़ ने देश नहीं बांटने देंगे, गाय नहीं काटने देंगे जैसे नारे लगा रहे थे। रैली पश्चिम त्रिपुरा के जॉयनगर गांव में निकाली गई। रैली में शामिल वीएचपी और बजरंग दल के समर्थकों ने कथित रूप से लोगों को धमकाया कि अगर उन्होंने गो हत्या बंद नहीं की तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। 


 

इसके अलावा प्रदर्शनकारियों के समूह ने गांव में कथित रूप से मुसलमानों को रोका और उन्हें अपने आधार कार्ड दिखाने को कहा व उनसे अपनी नागरिकता साबित करने को कहा। रैली का नेतृत्व कर रहे वीएचपी के संगठन सचिव अमल चक्रवर्ती ने कहा, सीपीएम के शासन के दौरान यहां गो हत्या को बढ़ावा मिला। यह हिंदू मोहल्ला है और हम उन्हें अपने लोगों को धमकाने और हमारी गो माता को नुकसान नहीं पहुंचाने देंगे। इन लोगों के पास आधार कार्ड तक नहीं है। अगर उन्होंने गैर कानूनी रूप से गो हत्या जारी रखी तो हमें कार्रवाई  के लिए मजबूर होना पड़ेगा। 




रैली के दौरान लगाए गए नारों की कांग्रेस औस सीपीएम ने निंदा की। त्रिपुरा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वर्किंग प्रेसिडेंट प्रद्योत किशोर माणिक्य ने एक न्यूज चैनले से कहा, जानवरों के कत्ल पर प्रतिबंध का फैसला राज्य सरकार को लेना है। अगर बजरंग दल और वीएचपी के कार्यकर्ताओं को किसी गैर कानूनी कत्ल के बारे में पता है तो उन्हें पहले पुलिस में शिकायत दर्ज कराई चाहिए बजाय कानून अपने हाथ में लेने और अल्पसंख्यक समुदाय को धमकाने के। मेरा व्यक्तिगत रूप से मानना है कि गैर कानूनी बूचडख़ाने बंद होने चाहिए।




 सीपीएम नेता पबित्र कर ने कहा कि रविवार की रैली देश के विभिन्न भागों में भाजपा के शासन के तहत बढ़ रही धार्मिक असहिष्णुता का सबूत है। अल्पसंख्यक आबादी आश्चर्यचकित है और रविवार को वीएचपी की रैली के बाद वे अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। यह सरकार की ड्यूटी है कि वह राज्य में शांति बनाए रखे। आपको बता दें कि त्रिपुरा में जब सीपीएम सत्ता में थी तब राज्य सरकार ने कहा था कि वह कत्ल के लिए मवेशियों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने संबंधी नरेन्द्र मोदी सरकार के विवादित नोटिफिकेशन को लागू नहीं करेगी।



 सीपीएम के स्टेट सेक्रटरी बिजान धर ने कहा कि लोगों का बड़ा वर्ग खासतौर पर दलित समुदाय मवेशियों के चमड़े के व्यापार में संलग्न है। किसान भी मवेशियों की खरीद फरोख्त करते हैं। अल्पसंख्यक जो प्रोटीन के स्रोत के लिए मवेशियों पर निर्भर है, सीधे प्रभावित होंगे।