असम में संक्रांति मनाने का अनोखा अंदाज

Daily news network Posted: 2018-01-14 17:10:18 IST Updated: 2018-01-14 17:10:18 IST
  • मकर संक्रति हिंदू धर्म का प्रमुख त्यौहार है, जाे देश के अलग-अलग राज्यों में अलग अलग नाम से मनाया जाता है।

असम

मकर संक्रति हिंदू धर्म का प्रमुख त्यौहार है, जाे देश के अलग-अलग राज्यों में अलग अलग नाम से मनाया जाता है। मकर संक्रंति को तमिलनाडु में पोंगल के रूप में तो आंध्रप्रदेश, ,कर्नाटक आैर केरला में यह त्यौहार संक्रंति के नाम से जाना जाता है। जबकि पंजाब में लोहड़ी के रूप में मनाया जाता है आैर असम में यही त्यौहार भोगली बिहू के नाम से मनाया जाता है।

 

 

 


 आपको बता दें कि असम में भोगली बिहू मनाने को अंदाज ही निराला है। इस त्यौहार को पूरा गांव एक साथ मिलकर मनाता है। इस के लिए गांव के बाहर घास फूस आैर बांस की मदद से एक कुटिया बनार्इ जाती है। जिसे भेला घर कहते हैं। सूर्य अस्त होने के बाद गांव वाले इस भेला घर में एकत्रित होने लगते है आैर फिर शुरू होता है खाने पीने, नाच गाने आैर मौज मस्ती का सिलसिला, जो रात भर चलता है।

 


 


इस त्यौहार की सबसे खास बात तो यह है कि गरीबी आैर अमीरी का बंधन तोड़ कर सब एक साथ इसे मनाते है।  रात में पीठा आैर मछती के कर्इ तरह के पकवान बनते रहते है आैर वहां पर मौजूद सब लोग इन स्वादिष्ट पकवानों का मजा लेते रहते है। इन पकवानों को महिला आैर पुरूष दोनों साथ मिलकर बनाते हैं। एक तरफ तो पकवान बनते रहते है आैर दूसरी अोर लोग बिहू नृत्य करते रहते है। ये नृत्य रात भर चलता है।

 

 

 

 


 भेला घर के पास ही चार बांस लगाकर उस पर पुआल आैर लकड़ी के उंचें गुम्बज को बनाया जाता है, जिसे मेजी कहते है। उरूका के दूसरे दिन सुबह स्नान करने के बाद मेजी को जलाकर भोगाली बिहू की शुरूआत की जाती है । ये त्यौहार कर्इ दिनों तक चलता है। बता दें कि मेजी जलाने की प्रक्रिया होली में होलिका की तरह ही होती  है।