सुनील देवधर की एक सलाह से बदली इस युवा की किस्मत

Daily news network Posted: 2018-03-10 12:22:24 IST Updated: 2018-06-20 14:25:55 IST
सुनील देवधर की एक सलाह से बदली इस युवा की किस्मत
  • त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में महज तीस साल के सुधांशु दास ने फटिकरॉय विधानसभा सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव जीता

अगरतला।

त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में महज तीस साल के सुधांशु दास ने फटिकरॉय विधानसभा सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव जीता। हैरानी की बात यह है कि सुधांशु की राजनीतिक करियर महज एक साल का ही है। इतना ही नहीं सुधांशु ने संस्कृत भाषा में एमए किया और वे फॉर्मा कंपनी में एमआर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। हालांकि करीब एक साल पहले सुधांशु दास बीजेपी एग्जीक्यूटिव कमेटी के मेंबर इंचार्ज सुनील देवधर के संपर्क में आए। इस दौरान सुधांशु अपनी नौकरी से परेशान थे। सुनील देवधर की सलाह पर उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ी और राजनीतिक क्षेत्र में कदम रखा। खास बात यह है कि 2018 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में सुधांशु फटिकरॉय सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत हासिल की।


 


 बता दें कि चुनाव में उनका सामना सीपीएम के उम्मीदवार तनुबाला मालाकर से था। तनुबाला ने 2013 में फटिकरॉय सीट से विधानसभा चुनाव जीता था। हालांकि इस बार भगवा आंधी में उनकी यह सीट सुधांशु ने छीन ली और उन्होंने तनुबाला को 2829 वोटों से हरा दिया। सुधांशु को 19512 वोट मिले, वहीं तनुबाला के खाते में 16683 वोट आए। बता दें कि फटिकरॉय सीट पर सीपीएम का ही दबदबा रहा है। यहां 11 बार विधानसभा चुनाव हुए हैं, जिसमें सात बार ये सीट सीपीएम के खाते में गई है। तीन बार इस सीट से कांग्रेसी उम्मीदवार जीते हैं। वहीं इस बार ये सीट भाजपा के खाते में गई।

 

 

 


 1967 में जब इस विधानसभा सीट पर पहली बार चुनाव हुए तो यहां से कांग्रेसी उम्मीदवार आरआर गुप्ता को जीत मिली। उनके सामने सीपीआई के उम्मीदवार आरआर कुमार थे। गुप्ता को 7750 तो वहीं कुमार को 5757 वोट मिले। वहीं 1972 में भी आरआर गुप्ता ने इस सीट पर 1053 वोटों से जीत हासिल की। उन्हें 4019 तो वहीं सीपीएम के उम्मीदवार तारानी मोहन सिंहा को 2966 वोट मिले। हालांकि 1977 के चुनाव में कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार बदलकर गोपेश रंजन देब को टिकट दिया। हालांकि उन्हें हार का सामना करना पड़ा। उन्हें सीपीएम के उम्मीदवार तारानी मोहन ने 2692 वोटों से हराया। तारानी को 6057 तो वहीं गोपेश को 3365 वोट मिले। 1983 के चुनाव में तारानी ने लगातार दूसरी बार इस सीट पर जीत दर्ज की। उन्होंने कांग्रेसी उम्मीदवार राधिका रंजन गुप्ता को 1682 मतों से हराया। तारानी को 7580 तो वहीं राधिका को 5898 वोट मिले।

 

 



 1988 में हुए चुनाव में यहां कांग्रेस ने फिर से वापसी की और सुनील चंद्रा दास विजयी रहे। उन्हें 12288 तो वहीं सीपीएम के उम्मीदवार भूदेब भट्टाचार्य को 4299 वोट मिले। हालांकि 1993 के चुनाव में सीपीएम के भूदेब के वापसी करते हुए कांग्रेसी उम्मीदवार सुनील चंद्रा दास को पटखनी दे डाली। भूदेब को 11742 तो वहीं सुनील चंद्रा दास को 6706 वोट मिले। इसके बाद से इस सीट पर सीपीएम का ही कब्जा रहा। 1998 में सीपीएम के उम्मीदवार अनंता पाल, 2003-2008 में बिजोय रॉय और 2013 में तनुबाला मालाकर ने इस सीट से जीत हासिल की थी।