भाजपा सरकार ने अपनी ही पार्टी के नेता को देशद्रोही बताकर जेल में डाल दिया

Daily news network Posted: 2019-02-23 10:34:04 IST Updated: 2019-02-23 18:47:07 IST

अगरतला।

पांच माह पहले भाजपा के एक कार्यकर्ता को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम(एनएसए)के तहत गिरफ्तार किया गया था। उसे बुधवार की मध्य रात्रि रिहा किया गया। भाजपा नेता वेस्ट त्रिपुरा के जिरानिया उपखंड से ताल्लुक रखते हैं। एक वेबसाइट से बातचीत में केशव सरकार ने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ खुद उनकी ही पार्टी के कार्यकर्ताओं ने राजनीतिक साजिश रची, इस कारण उन्हें जेल जाना पड़ा।

 

 

 


सरकार ने कहा, मेरे खुद की पार्टी के कार्यकर्ताओं ने मेरे खिलाफ राजनीतिक साजिश रची। वे चाहते थे कि 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा जिरानिया विधानसभा क्षेत्र में हार जाए। वहीं दूसरी ओर मैं पार्टी

 के फैसले के साथ खड़ा रहा और जमकर प्रचार किया। जब वे अपनी योजना में विफल हो गए तो नेताओं के एक समूह ने मेरे खिलाफ साजिश रची और मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब को मेरे खिलाफ गलत

 जानकारी दी। पिछले साल 9 अक्टूबर को 37 वर्षीय इस राजनीतिक कार्यकर्ता को एनएसए के तहत गिरफ्तार किया गया।

 

 


 सरकार जो ठेकेदारी का काम करते हैं, का राजनीतिक कार्यकर्ता के रूप में लंबा इतिहास है। वह 2016 तक कांग्रेस के साथ थे। 2017 में भाजपा में शामिल होने से पहले वह कांग्रेस छोडक़र तृणमूल कांग्रेस में

 शामिल हुए थे। भाजपा विधायक सुशांता चौधरी ने सरकार की गिरफ्तारी की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि बंदी लंबे समय से एंटी लेफ्ट सॉल्जर है। जस्टिस संजॉय कारोल व जस्टिस सुभाशीष तलापात्रा

 की खंडपीठ ने बुधवार को सरकार को रिहा करने का आदेश दिया। सरकार के वकील पीजूष कांति विश्वास ने कहा कि उसे गलत तरीके से हिरासत में लिया गया था।

 

 

 


गिरफ्तारी के तुरंत बाद हमने आरोपी की ओर से रिप्रजेंटेशन सौंपा लेकिन अथॉरिटीज ने इस पर विचार ही नहीं किया। यह गलत था, इसलिए हमने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। माननीय कोर्ट ने हमारे तर्कों को समझा और रिहाई का आदेश दिया। इस बीच परिवार के लोगों का कहना है कि वे सरकार की रिहाई से खुश हैं। मां संध्यारानी सरकार ने कहा कि वह कोर्ट के फैसले से खुश व संतुष्ट हैं। भाई समिरन सरकार ने केशव को रिहा करने के लिए हाईकोर्ट के प्रति अपना आभार प्रकट किया। सरकार ने कहा कि वह फिर से मुक्त होकर खुश है। बकौल सरकार, मुझे बिशालगढ़ की सेंट्रल जेल में रखा गया। जेल प्रशासन ने मुझे किसी तरह से परेशान या प्रताडि़त नहीं किया लेकिन मैं बिना किसी अपराध के जेल में कैद रहा। मैं राजनीतिक साजिश का पीडि़त हूं।

 

 

 


हालांकि उसने कहा कि वह किसी भी वक्त भाजपा नहीं छोड़ेंगे। बकौल सरकार मैं पूरी जिंदगी माकपा से लड़ूंगा। भाजपा सरकार के खिलाफ मानहानि का केस करने से उन्हें राजनीतिक लाभ मिलेगा। मैं ऐसा कभी नहीं करूंगा। सरकार ने कहा कि वह भाजपा के उस गुट के साथ शांति से काम करेंगे जिनके कारण वह गिरफ्तार हुए। वे मुझे सीन से हटाना चाहते थे। यह राजनीतिक बदला था। मुझे बहुत दुख हुआ लेकिन मैंने इसे पीछे छोड़ दिया। मुख्यमंत्री को भी मेरे बारे में गलत जानकारी दी गई। यह सब दुर्भाग्यपूर्ण था। सरकार से पहले ऑल त्रिपुरा टाइगर फोर्स(एटीटीएफ)के चीफ रंजीत देबबर्मा को गिरफ्तार किया गया था। 2013 में उनके खिलाफ एनएसए लगाया गया था। इस उग्रवादी नेता की बड़ी संख्या में हुई हत्याओं, अपहरण, भारत के खिलाफ जंग छेडऩे, साजिशें रचने व अन्य मामलों में तलाश थी।