देश में सबसे बेहतरीन अनानास उगता है इस जगह, लेकिन सामने है बड़ी समस्या

Daily news network Posted: 2019-06-15 14:00:10 IST Updated: 2019-06-15 14:00:10 IST
देश में सबसे बेहतरीन अनानास उगता है इस जगह, लेकिन सामने है बड़ी समस्या

दुनिया भर में त्रिपुरा को सर्वाधिक अनानास उत्पादक के रूप में जाना जाता है। राज्य ने मई माह में 193.10 मेट्रिक टन अनानास को देश के विभिन्न राज्यों और बांग्लादेश को बेचा हैं। इसमें 113 मेट्रिक टन उच्च गुणवत्ता वाली ‘रानी’ किस्म की अनानास शामिल है। त्रिपुरा दुनिया की सबसे उच्चतम किस्म की अनानास का उत्पादन करता है, जिसकी बाहर काफी मांग है, लेकिन राज्य अपने इस उच्च गुणवत्ता के उत्पाद को बांग्लादेश के अलावा किसी और देश को निर्यात नहीं कर पाता है। मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार त्रिपुरा के अनानास उत्पादकों ने लगभग 100 मेट्रिक टन 'रानी' किस्म की अनानास बांग्लादेश को निर्यात किया हैं। 6 मेट्रिक टन गुवाहाटी को, 7 मेट्रिक टन 'रानी' अनानास कोलकाता और दिल्ली भेजा है।

 

 

 

टीएनएम रिपोर्ट के अनुसार अधिकारियों का कहना है, त्रिपुरा सरकार ने त्रिपुरा उद्योगिक विकास निगम (टीआईडीसी) की अनानास की फूड प्रोसेसिंग में मदद के जरिए इस बार अनानास को बांग्लादेश और देश के अन्य भागों में बेचा जा सका। मीडिया ने त्रिपुरा के उद्यान विभाग के आला अधिकारियों के हवाले से बताया कि राज्य सरकार अनानास के उत्पादकों और व्यापारियों को सहायता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं और इस दिशा में सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे।

 

 

पिछले साल राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने अनानास को त्रिपुरा राज्य का राजकीय फल घोषित किया था। राज्य के अनानास उत्पादकों को अपने उत्पाद को बाहर बाजार में बेचने में सबसे बड़ी समस्या का सामना करना पड़ता हैं। किसानों ने कई बार सरकार को इस समस्या से अवगत कराया हैं लेकिन उन्हें निराशा ही हाथ लगी हैं। राज्य में अनानास का उत्पादन कई गुना बड़ा हैं लेकिन देशी और विदेशी व्यापारी इस उत्पाद को खरीदने में रुचि नहीं दिखाते हैं। राज्य में इस उत्पाद को लेकर हालत यहां तक हो गए हैं कि दौदरणी कस्बे में किसानों को एक मेट्रिक टन अनानास के फल को जमीन में दबाना पड़ा क्योंकि इसे खरीदने के लिए कोई व्यापारी आया ही नहीं। वहीं राज्य के सोनामुरा कस्बे में इस साल 500 से अधिक किसानों ने काफी रुपया लगा के अनानास उगाया था लेकिन अनानास की खरीद नहीं होने कि वजह से उत्पादकों को नुकसान हुआ है और उनमें काफी निराशा भी हैं।