त्रिपुरा में स्टालिन-लेनिन की जयंती मनाई जाती है, लेकिन टैगोर और विवेकानंद की नहीं : अमित शाह

Daily news network Posted: 2018-02-12 09:08:06 IST Updated: 2018-02-12 09:08:06 IST
त्रिपुरा में स्टालिन-लेनिन की जयंती मनाई जाती है, लेकिन टैगोर और विवेकानंद की नहीं : अमित शाह
  • बीजेपी त्रिपुरा में हिंसा की राजनीत को विकास की राजनीति में बदलना चाहती है

अगरतला।

बीजेपी त्रिपुरा में हिंसा की राजनीत को विकास की राजनीति में बदलना चाहती

है। त्रिपुरा में स्टालिन और लेनिन की जयंती मनाई जाती है, लेकिन टैगोर और विवेकानंद की नहीं। ये कहना है भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का।

 

 

 

त्रिपुरा में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह एक रैली में लोगों से अपील करते हुए कहा कि बीजेपी को राज्य की सत्ता में इस बार लाइए, हम को पांच साल में मॉडल राज्य बनाकर देंगे। अमित शाह ने राज्य की कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यहां पर लाल भाइयों की सरकार है। मैं पूछना चाहता हूं कि यहां के सरकारी कर्मचारियों को 7 वें वेतन आयोग के तहत सैलरी मिलती है क्या? 

 

 

 

 


अमित शाह ने आगे यह भी कहा कि यहां की जनता को दबाया जाता है। उनको वोट देने के लिए जाने नहीं दिया जाता। मैं पूरी सीपीएम को कहना चाहता हूं कि इस बार मुकाबला भाजपा से है, संभल जाइए। राहुल गांधी का नाम लिए बगैर शाह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस प्रमुख ने इन चुनावों में वोटकटवा उम्मीदवार उतारे हैं, ताकि मुख्यमंत्री माणिक सरकार की अगुआई वाली माकपा सरकार को दोबारा सत्ता में आने में मदद मिल सके।

 

 


पिछले विधानसभा चुनाव तक कांग्रेस की स्थिति मुख्य विपक्षी दल की थी, लेकिन बाद में पार्टी की स्थिति में जबरदस्त ह्रास हुआ, क्योंकि विधायकों सहित इसके कई नेताओं ने भाजपा का दामन थाम लिया। बता दें कि अमित शाह ने मोहनपुर, चौमानू और तेलियामूरा टाउन हॉल में जनसभा को संबोधित किया।

 

 


गौरतलब है कि त्रिपुरा में 60 सीटों पर विधानसभा का चुनाव 18 फरवरी को होने जा रहा है और इसके परिणाम तीन मार्च को जारी होंगे। वहीं, सबसे ज्यादा संपत्ति रखने वाले शीर्ष 10 उम्मीदवारों में सात भाजपा के और तीन कांग्रेस के हैं। इसी बीच बता दें कि त्रिपुरा विधानसभा का चुनाव लड़ रहे 297 उम्मीदवारों में से 22 उम्मीदवारों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। संवैधानिक सुधार की दिशा में काम कर रहे एक गैर सरकारी संगठन ने पिछले ही दिनों यह दावा किया था। गैर सरकारी संगठन त्रिपुरा इलेक्शन वॉच के द्वारा किए गए एक अध्ययन में बताया गया है कि 17 उम्मीदवारों के खिलाफ दंगा, हत्या, आपराधिक धमकी और बलात्कार के आरोप हैं।