खबरों पर नहीं हो रहा था भरोसा, पर सुबह पत्रकारों ने उड़ा दी बासुमतारी परिवार की नींद

Daily news network Posted: 2019-02-16 10:53:49 IST Updated: 2019-02-16 14:02:37 IST
खबरों पर नहीं हो रहा था भरोसा, पर सुबह पत्रकारों ने उड़ा दी बासुमतारी परिवार की नींद
  • मनेश्वर बसुमतारी आज जब वह हम सबके बीच नहीं है, उसकी एक-एक याद परिवार और उसे चाहने वालों के लिए अत्यंत मार्मिक माहौल पैदा कर रही हैं।

गुवहाटी

मनेश्वर बसुमतारी आज जब वह हम सबके बीच नहीं है, उसकी एक-एक याद परिवार और उसे चाहने वालों के लिए अत्यंत मार्मिक माहौल पैदा कर रही हैं। देश की सेवा के जज्बे के साथ 25 साल पहले मनेश्वर बसुमतारी अपनी एक माह की बच्ची को पत्नी की गोद में छोड़ सीआरपीएफ में भर्ती हो गया था। तब से लेकर गुरुवार की शाम पुलवामा में आतंकी हमले में शहीद होने तक उसने अपनी बहादुरी और निष्ठा से सबका दिल जीत लिया था।

 


दो दशक से अधिक समय तक देश की सेवा करने के बाद उसने अपना चरमोत्सर्गत कर न केवल अपने छोट से गांव कोलबारी बल्कि समूचे असम को गौरावान्वित कर दिया है। मनेश्वर के परिवार उसकी यह गाथा बताते हुए जहां एक तरफ गौरवान्वित महसूस कर रहा था, वहीं शोक के अथाह सागर में भी डूब चुका था। उसके बेटे धनंजय बसुमतारी ने बताया कि किस तरह उनका संसार उस एक क्षण में ही बिखर गया, जब शहीदों की सूची में अपने पिता का भी नाम देखा।

 


परिवार को पहले फेसबुक और फिर बाद में टीवी समाचारों के जरिए यह जानकारी मिली थी। उसके बाद भी यह भरोसा था कि शायद यह खबर गलत निकलेगी। लेकिन वैसा नहीं हुआ। फेसबुक पर पहले मिली जानकारी में उदालगुड़ी के बसुमतारी के शहीद होने की खबर मिली थी। वह बाद में गलत साबित हुई। लेकिन सुबह होते ही परिवार पर पहाड़ टूट पड़ा।

 

 


धनंजय के मुताबिक पहले तो उसे लगा कि निश्चित ही यह उसके पिता नहीं होंगे। लेकिन आखिरकार यह पक्का हो गया कि वही हैं। इसके पहले की रात तो इस इत्मीनान के साथ शांति से बीती थी को कोई और बसुमतारी शहीद हुए हैं। सुबह होते ही विभिन्न रिपोर्टरों के पहुंचने से वह सारी बात गलत निकली। शहीद की बेटी दिस्वम्श्री बसुमतारी चाहती है कि भारत सरकार आत्मघाती हमले के मुख्य साजिशकर्ता आतंकी संगठन जैशे-ए-मोहम्मद के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई करे।