मोदी सरकार के कार्यकाल में पहली बार इतना महंगा हुआ सोना, आम जनता को लगा तगड़ा झटका

Daily news network Posted: 2019-07-07 16:44:58 IST Updated: 2019-07-07 16:47:08 IST
मोदी सरकार के कार्यकाल में पहली बार इतना महंगा हुआ सोना, आम जनता को लगा तगड़ा झटका

सरकार द्वारा पीली धातु पर सीमा शुल्क बढ़ाने से बीते सप्ताह सोने में दिल्ली सर्राफा बाजार में सोना 1,200 रुपये उछलकर 35,470 रुपये प्रति दस ग्राम पर पहुंच गया। मोदी सरकार के कार्यकाल में पहली बार सोना 35 हजार रुपये के पार पहुंचा है। वहीं, चांदी 30 रुपए की साप्ताहिक गिरावट में 38,800 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गयी। 



सरकार ने शुक्रवार को संसद में पेश बजट में सोने तथा अन्य बेशकीमती धातुओं पर सीमा शुल्क 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 12.5 प्रतिशत कर दिया। शनिवार को बाजार में इसका तत्काल प्रभाव देखा गया और एक ही दिन में सोना 1,300 रुपये उछल गया। विदेशों में गत सप्ताह सोने-चाँदी पर दबाव रहा और स्थानीय बाजार में भी पहले पाँच दिन में सोना 100 रुपये कमजोर हुआ था। लंदन एवं न्यूयॉर्क से मिली जानकारी के अनुसार, वहाँ सोना हाजिर 9.60 डॉलर की साप्ताहिक गिरावट में 1,399.65 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। अगस्त का अमेरिकी सोना वायदा 11.30 डॉलर लुढक़कर सप्ताहांत पर कारोबार समाप्त होते समय 1,401.20 डॉलर प्रतिशत औंस बोला गया। चाँदी हाजिर 0.31 डॉलर टूटकर 14.97 डॉलर प्रति औंस पर रहा। 




स्थानीय बाजार में बीते सप्ताह बुधवार और शनिवार को छोडक़र शेष कारोबारी दिवस सोने में गिरावट रही। शनिवार की 1,300 रुपये की तेजी अन्य चार दिन की गिरावट पर हावी रही और सोना स्टैंडर्ड 1,200 रुपये की साप्ताहिक बढ़त के साथ 35,470 रुपये प्रति दस ग्राम पर पहुँच गया। सोना बिटुर भी इतनी ही तेजी के साथ सप्ताहांत पर 35,300 रुपये प्रति दस ग्राम बिका। आठ ग्राम वाली गिन्नी भी 450 रुपये की बढ़त में 27,300 रुपये पर पहुँच गयी। आलोच्य सप्ताह में चाँदी में गिरावट रही। चाँदी हाजिर 30 रुपये फिसलकर 38,800 रुपये प्रति किलोग्राम रह गयी। चाँदी वायदा 165 रुपये की साप्ताहिक गिरावट के साथ अंतिम कारोबारी दिवस पर 37,285 रुपये प्रति किलोग्राम बोली गयी। सिक्का लिवाली और बिकवाली पूरी सप्ताह क्रमश: 80 हजार और 81 हजार रुपये प्रति सैकड़ा पर स्थिर रहे। कारोबारियों ने बताया कि सरकार द्वारा सीमा शुल्क बढ़ाने के कारण सोने की कीमत बढ़ी है। आने वाले समय में दोनों कीमती धातुओं का रुख अब विदेशी बाजारों पर ज्यादा निर्भर करेगा।