सबसे अनोख है देवी का ये मंदिर, यहां पर पूरी होती है हर मन्नत

Daily news network Posted: 2018-05-13 14:51:18 IST Updated: 2018-08-31 11:05:46 IST
सबसे अनोख है देवी का ये मंदिर, यहां पर पूरी होती है हर मन्नत

मासिक धर्म आैरत की पहचान माना जाता है, मासिक धर्म पूर्ण स्त्रीत्व प्रदान करता है इसके बावजूद अगर किसी आैरत को मासिक धर्म आता है तो उसे मंदिर में जाना वर्जित हो जाता है। आज हम आपको एक एेसे मंदिर के बारे में बतानें जा रहे है जहां मासिक धर्म को पवित्र माना जाता है। अगर किसी आैरत को मासिक धर्म आ रहा हाे तो वो पवित्र मानी जाती है। मंदिर में जाकर पूजा भी कर सकती है। वैसे तो हमारे देश में कई मंदिर है जो अपने साथ ही अनेक रहस्य समेटे हुए हैं। वहां का पूजा करने का तरीका भी अलग है। ऐसा ही एक मंदिर है, कामाख्या देवी मंदिर। इस मंदिर में स्त्री की योनि की पूजा की जाती है।

 

 

 


सबसे पुराने शक्तिपीठों में से एक है कामाख्या देवी मंदिर, जो कि गुवाहाटी (असम) से 8 किमी दूर नीलांचल पर्वत पर स्थित है। सभी शक्तिपीठों में कामाख्या शक्तिपीठ को सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। कहते है कि भगवान शिव का सती के प्रति मोह भंग करने के लिए भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के मृत शरीर के 51 हिस्से किए थे। ये हिस्से अलग-अलग स्थानों पर जाकर गिरे, यही स्थान आगे चलकर शक्तिपीठ कहलाए। कामाख्या मंदिर वाले स्थान पर मां सती का योनि भाग गिरा था। यही कारण है कि यहां पर योनि की पूजा की जाती है।

 


 इस मंदिर में देवी की कोई मूर्ति मौजूद नहीं है। यहां पर सिर्फ देवी के योनि भाग की ही पूजा की जाती है। इसके लिए मंदिर में एक कुंड जैसा स्थान है, जो हमेशा फूलों से ढंका रहता है। इससे हमेशा प्राकृतिक झरने का जल निकलता रहता है। कहा जाता है कि इस जल को पीकर आपको सारि बीमारियों से छुटकारा मिल सकता हैं। इस मंदिर के साथ लगे कामदेवी मंदिर में मां की एक मूर्ती भी विराजित है। ऐसा कहा जाता है कि यहां पर जो भी मुरादप मांगी जाती है, वो मुराद पूरी हो जाती है।

 

 


हर साल माता का तीन दिनों के लिए मासिक धर्म होता है। इस दौरान मंदिर को श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिया जाता है। जब मंदिर खुलता है तो बड़ी संख्या में श्रद्धालू यहाँ पूजा के लिए पहुंचते हैं। मंदिर के पास ब्रह्मपुत्र नदी का पानी तीन दिन के लिए लाल हो जाता है। कहा जाता है कि पानी का यह लाल रंग कामाख्या देवी के मासिक धर्म के कारण होता है। ऐसा माना जाता है कि जब मां को तीन दिन के लिए मासिक धर्म होता है, उस समय सफेद रंग का कपड़ा मंदिर के अंदर बिछा दिया जाता है। तीन दिन के बाद जब मंदिर के दरवाजे खोले जाते हैं, तब वो कपड़ा माता के रक्त से भीगकर लाल रंग का हो जाता है। इसे भक्तों को प्रसाद के रूप में दिया जाता है।