अरुणाचल प्रदेश में भाजपा पर ये है सबसे बड़ा संकट, जानिए

Daily news network Posted: 2019-03-14 08:48:02 IST Updated: 2019-03-14 08:48:02 IST
अरुणाचल प्रदेश में भाजपा पर ये है सबसे बड़ा संकट, जानिए
  • जब से चुनाव आयोग ने लोकसभा चुनाव की तारीख की घोषणा की है तब से पार्टियों में खलबली मची हुई है।जैसा की हम जानते है कि अरुणाचल प्रदेश में 11 अप्रैल को लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ होंगे।

ईटानगर।

जब से चुनाव आयोग ने लोकसभा चुनाव की तारीख की घोषणा की है तब से पार्टियों में खलबली मची हुई है।जैसा की हम जानते है कि अरुणाचल प्रदेश में 11 अप्रैल को लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ होंगे। ऐसे में वहां स्थायी निवासी प्रमाणपत्र (पीआरसी) का मुद्दा शीर्ष पर है। इसको मद्देनजर करते हुए भाजपा मुश्किल में आ गई है।

 

 अरुणाचल प्रदेश में सत्ताधारी भाजपा ने जनता को विश्वास दिलाया कि स्थायी निवासी प्रमाणपत्र (पीआरसी) जारी करने संबंधी विवाद का पार्टी की चुनावी संभावनाओं पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। इसी कड़ी में भाजपा प्रदेश इकाई के अध्यक्ष तापिर गाओ ने मीडिया को बताया कि कुछ निहित स्वार्थी तत्वों ने एक ‘गैर मुद्दे’ को लेकर राज्य में समस्या उत्पन्न की है।

 

 गाओ ने कहा कि स्थाई निवासी प्रमाणपत्र (पीआरसी ) जानबूझकर गढ़ा हुआ एक मुद्दा है, पिछले महीने जो कुछ भी हो हल्ला हुआ वह निहित स्वार्थी तत्वों का काम है। इसका जनता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। गाओ ने आगामी चुनाव की जानकारी देते हुए कहा कि राज्य चुनाव समिति की जल्द ही एक बैठक होगी जिसके बाद पार्टी लोकसभा और विधानसभा दोनों के लिए उम्मीदवारों की घोषणा करेगी।

 

 गाओ ने कहा कि हमें विधानसभा चुनाव के लिए 200 आवेदन प्राप्त हुए हैं जिसमें मेरा और केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरन रिजीजू का लोकसभा के लिए उम्मीदवारों की सूची में नाम आये हैं। अंतिम निर्णय केंद्रीय नेतृत्व की ओर से किया जाएगा। पार्टी सूत्रों के अनुसार रिजीजू अरुणाचल प्रदेश पश्चिम से आम चुनाव लड़ेंगे जबकि गाओ अरुणाचल प्रदेश पूर्व से लड़ेंगे।

 

 उल्लेखनीय है कि इटानगर में पिछले महीने फरवरी में तब प्रदर्शन शुरू हो गए थे जब राज्य सरकार की ओर से नियुक्त एक समिति ने छह गैर अरुणाचली समुदायों के लिए पीआरसी की सिफारिश कर दी। इस दौरान झड़पों में तीन व्यक्तियों की मौत हो गई थी, उसके बाद भाजपानीत सरकार ने एक बयान जारी कर कहा कि पीआरसी मुद्दे को ‘कभी’ फिर से नहीं लिया जाएगा।