रिमझिम बारिश का मजा लेना है तो जरूर जाएं शिलांग की वादियों में

Daily news network Posted: 2018-04-04 15:19:30 IST Updated: 2018-04-04 15:38:03 IST
रिमझिम बारिश का मजा लेना है तो जरूर जाएं शिलांग की वादियों में
  • देश के अन्य हिस्सो में जहां गर्मी दस्तक दे चुकी है, तो वहीं मेघालय की राजधानी शिलांग में मौसम बड़ा ही खुशनुमा हो रहा है।

शिलांग।

देश के अन्य हिस्सो में जहां गर्मी दस्तक दे चुकी है, तो वहीं मेघालय की राजधानी शिलांग में मौसम बड़ा ही खुशनुमा हो रहा है। प्रकृतिक सौदर्य के बीच रिमझिम बरसात टूरिस्टों को खूब भा रही है। पिछले कुछ दिनों में मौसम ने पर्यटकाें के चेहरे पर खुशी बिखेर दी है। हर दिन रिमझिम बरिश के बीच पहाड़ों की खूबसूरती देखते ही बनती है। एेसे में खूबसूरत मौसम में शहर के खूबसूरत पार्क चार चांद लगा देते हैं। टूरिस्टों का कहना है कि कर्इ तरह के फूल आैर ठंडा मौसम, धूप में घंटों बैठना यहां आना सार्थक लग रहा है।  


 शिलांग में घूमने लायक जगह


अगर आप भी गर्मी से राहत आैर हसीन मौसम का लुत्फ उठाना चाहते है तो शिलांग जरूर जाए। अगर आप शिलांग जाते है तो शिलांग पिक, एलीफेंट फाॅल्स, वर्ल्ड लेक, उमियम झील आदि स्थानों को घूम सकते हैं। शिलांग का प्रकृतिक दृश्य हमेशा से हरा भरा रहता है जो आपको एक अलग ही आनंद देगा।

 


 एलिफेंटा फॉल


यह शिलांग शहर से करीब 12 किमी दूर है। इस वॉटरफॉल की खूूबसूरती देखते ही बनती है। इसके नाम के पीछे एक रोचक कहानी है। इस वॉटरफॉल का असली नाम था शैद लई पटेंग खोशी (Ka kshaid lai pateng khohsiew) यानी कि तीन हिस्से वाला वॉटरफॉल है। बाद में अंग्रेजों ने इसका नाम बदल कर एलिफेंटाफॉल रख दिया, क्योंकि इस फॉल के पास एक पत्थर था, जो हाथी जैसा दिखता था।  हालांकि 1897 में आए भूकंप में वो पत्थर नष्ट हो गया, लेकिन वॉटरफॉल का नाम बदला नहीं गया।


 स्वीट फॉल

शिलांग में ही स्थित स्वीट फॉल इस शहर का सबसे खूबसूरत वॉटरफॉल माना जाता है। लेकिन स्थानीय लोगों का मानना है कि ये वॉटरफॉल हॉन्टेड है। मेघालय में सबसे ज्यादा खुदकुशी और मौत की घटनाएं इसी वॉटरफॉल में हुई हैंं। ऐसा कहा जाता है कि अगर आप विषम संख्या के लोगों के साथ इस वॉटरफॉल को देखने जाएंगे तो सम संख्या में ही वहां से लौटकर आएंगे।

 शिलांग पीक


समुद्र तल से करीब 1900 मीटर ऊंची शिलांग पीक शिलांग की सबसे ऊंची चोटी है। यहां से आप पूरे शहर का खूबसूरत नजारा देख सकते हैं। यह शहर का एक ऐसा पर्यटन स्थल है, जहां सबसे ज्यादा पर्यटक आते हैं। ऐसा माना जाता है कि इसी पर्वत के कारण इस शहर का नाम शिलांग पड़ा। यहां के स्थानीय लोगों का मानना है कि उनके देवता लीशिलांग इस पर्वत पर रहते हैं। 

 


वार्डस झील


शहर के बीचोबीच स्थित वार्डस झील शिलांग की एक और चर्चित जगह है। ब्रिटिश शासनकाल के दौरान विलियम वार्ड असम के मुख्य आयुक्त हुआ करते थे। उसी समय इस झील का निर्माण किया गया, जिससे इसका नाम वार्डस झील पड़ा। घोड़े की नाल के आकार का यह झील कभी राजभवन का हिस्सा हुआ करती थी। स्थानीय लोग इस झील को ‘नन पोलोक’ या ‘पोलोक झील’ के नाम से भी पुकारते हैं। यहां आप बोटिंग कर सकते हैं। साथ ही झील में मौजूद मछलियों को दाने डालने का भी मजा ले सकते हैं।