इस राज्य में छह महीने और लागू रहेगा अफस्पा कानून, सरकार ने बढ़ाया समय

Daily news network Posted: 2019-09-08 08:45:11 IST Updated: 2019-09-09 17:02:17 IST
  • भाजपा नीत असम सरकार ने असम में कानून-व्यवस्था से जुड़े ताजा हालातों को देखते हुए आर्म्ड फोर्सेज (स्पेशल पावर्स) एक्ट-1958 यानी अफस्पा को छह महीने और लागू रखने का निर्णय लिया है।

नई दिल्ली/गुवाहाटी।

भाजपा नीत असम सरकार ने असम में कानून-व्यवस्था से जुड़े ताजा हालातों को देखते हुए आर्म्ड फोर्सेज (स्पेशल पावर्स) एक्ट-1958 यानी अफस्पा को छह महीने और लागू रखने का निर्णय लिया है। सरकार की तरफ से शनिवार को दी गई जानकारी के मुताबिक, अफस्पा को 28 अगस्त से ही अगले छह महीने के लिए प्रभावी घोषित कर दिया गया है।

 


 इस कानून के तहत सुरक्षा बलों को अभियान चलाने, किसी को बिना पूर्व नोटिस दिए कभी भी और कहीं भी गिरफ्तार करने का विशेष अधिकार मिल जाता है।

 


 बयान के मुताबिक, पिछले छह महीने की कानून-व्यवस्था की हालत की समीक्षा के परिणामस्वरूप राज्य सरकार ने गृह व राजनीतिक विभाग के जरिए अफस्पा के अनुच्छेद-3 पूरे असम राज्य को 28 अगस्त से 'अशांत क्षेत्र' घोषित करने की अधिसूचना जारी की है। यह स्थिति छह महीने या उससे पहले अधिसूचना वापस लिए जाने तक लागू रहेगी।


 


1990 से लागू है अफस्पा

 असम में पहली बार अफस्पा कानून को नवंबर, 1990 में लागू किया गया था। इसके बाद से यह कानून लगातार लागू रहा है। सितंबर, 2017 में इसकी शक्तियां राज्य सरकार के हवाले करते हुए उसे ही इसे जारी रखने पर निर्णय लेने के लिए कहा गया था।

 

अफस्पा क्या है?


सशस्त्र सेना विशेषाधिकार कानून (AFSPA) की जरूरत उपद्रवग्रस्त पूर्वोत्तर में सेना को कार्यवाही में मदद के लिए 11 सितंबर 1958 को पारित किया गया था। जब 1989 के आस पास जम्मू कश्मीर में आतंकवाद बढ़ने लगा तो 1990 में इसे वहां भी लागू कर दिया गया था। वर्तमान में, AFSPA पूरे असम, नागालैंड, मणिपुर (इम्फाल नगरपालिका क्षेत्र को छोड़कर), अरुणाचल प्रदेश के 3 जिलों तिरप, चांगलांग और लोंगडिंग के साथ-साथ असम से लगने वाले अरुणाचल प्रदेश के अधिकार क्षेत्र वाले के 8 पुलिस स्टेशनों में अभी भी लागू है।


 किसी राज्य या क्षेत्र को डिस्टर्ब क्षेत्र कब घोषित किया जाता है?

 जब किसी क्षेत्र में नस्लीय, भाषीय, धार्मिक, क्षेत्रीय समूहों, जातियों की विभिन्नता के आधार पर समुदायों के बीच मतभेद बढ़ जाता है, उपद्रव होने लगते हैं तो ऐसी स्थिति को सँभालने के लिये  केंद्र या राज्य सरकार उस क्षेत्र को “डिस्टर्ब” घोषित कर सकती है।


अधिनियम की धारा (3) के तहत, राज्य सरकार की राय का होना जरूरी है कि क्या एक क्षेत्र “डिस्टर्ब” है या नहीं। एक बार “डिस्टर्ब” क्षेत्र घोषित होने के बाद कम से कम 3 महीने तक वहाँ पर स्पेशल फोर्स की तैनाती रहती है।