NRC अपडेट की समय सीमा बढ़ाने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

Daily news network Posted: 2018-04-01 19:25:26 IST Updated: 2018-04-01 19:25:26 IST
NRC अपडेट की समय सीमा बढ़ाने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार
  • एनआरसी अपडेट की समय सीमा बढ़ाने से सुप्रीम कोर्ट इनकार कर दिया है। असम में पंचायत चुनावों के मद्देनजर राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के अंतिम प्रकाशन की 31 मई की समय सीमा आगे बढ़ाने से यह कहते...

नई दिल्ली।

एनआरसी अपडेट की समय सीमा बढ़ाने से सुप्रीम कोर्ट इनकार कर दिया है। असम में पंचायत चुनावों के मद्देनजर राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के अंतिम प्रकाशन की 31 मई की समय सीमा आगे बढ़ाने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि ये चुनाव इस प्रक्रिया में बाधक नहीं बनने चाहिए।


 शीर्ष अदालत ने इस समय एनआरसी तैयार करने की प्रक्रिया में व्यस्त अतिरिक्त उपायुक्त स्तर के अधिकारी को अगले महीने होने वाले स्थानीय चुनावों के लिए उपलब्ध करा दिया।


 जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस आरएफ नरीमन की पीठ ने कहा, 'हम पहले ही कह चुके हैं कि एनआरसी के अपडेट की तारीख 31 मई 2018 है और अगले 30 दिन यानी 30 जून तक आंकड़ों का मिलान किया जाएगा। यह इससे आगे नहीं जा सकता और अंतिम मसौदा उस समय तक तैयार हो जाना चाहिए। आप अपने अतिरिक्त कर्मचारियों को तैनात कीजिये या पड़ोसी राज्यों से अनुरोध कीजिए, परंतु इस काम में लगा कोई भी कर्मचारी  उपलब्ध नहीं कराया जायेगा।'


 पीठ ने यह टिप्पणी उस वक्त की जब राज्य सरकार ने अगले महीने हो रहे पंचायत चुनावों का जिक्र करते हुये नागरिक रजिस्टर तैयार करने के काम में लगे कर्मचारियों को चुनाव में तैनात करने की अनुमति देने का अनुरोध किया। असम में अवैध प्रवासियों की पहचान के लिये यह रजिस्टर तैयार किया जा रहा है।


 पीठ ने कहा कि राज्य में पंचायत चुनावों में हस्तक्षेप करने का उसका कोई इरादा नहीं है और ये निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार ही होने चाहिए। परंतु ये चुनाव राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर तैयार करने में बाधक नहीं होने चाहिए।


 असम की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि राज्य के पंचायत संविधान नियमों के अनुसार इन चुनावों को कराने के लिये उपायुक्त जिम्मेदार हैं पर वह इस समय नागरिक रजिस्टर तैयार करने के काम मे व्यस्त हैं।


 उन्होंने कहा, 'जब हमने उपायुक्त से चुनाव कार्य के लिये कहा तो एनआरसी के राज्य समन्वयक प्रतीक हजेला ने कहा कि यह न्यायालय की अवमानना होगी क्योंकि किसी भी अधिकारी को दूसरे काम में नहीं लगाया जा सकता।'


 इस पर पीठ ने कहा कि यदि कानूनी अनिवार्यता है तो प्रत्येक जिले के अतिरिक्त उपायुक्त को स्थानीय निकाय के चुनावों के लिये उपलब्ध कराया जा सकता है लेकिन किसी भी अन्य अधिकारी को इसके अलावा अन्य कार्य करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

 

 इस बीच, पीठ ने न्यायालय में मौजूद अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल से कहा कि उसे अपने सूत्रों से जानकारी मिली है कि भारत के महापंजीयक इस काम में अड़ंगा डाल रहे हैं। इस पर वेणुगोपाल ने कहा कि क्या आपका तात्पर्य यह है कि भारत के महापंजीयक नागरिक रजिस्टर तैयार करने के काम में विलंब कर रहे हैं।


 पीठ ने कहा, 'हां, हमें इस बारे में गोपनीय रिपोर्ट मिली है। यदि  ऐसा होगा तो हम भारत के महापंजीयक को बदलने का आदेश देने में संकोच नहीं करेंगे।' न्यायालय इस मामले में अब आठ मई को आगे सुनवाई करेगा।