अरुणाचल प्रदेश में सप्लाई होने वाली जहरीली शराब पीने से चार लोगों की मौत

Daily news network Posted: 2018-03-14 13:16:41 IST Updated: 2018-03-14 13:55:01 IST
अरुणाचल प्रदेश में सप्लाई होने वाली जहरीली शराब पीने से चार लोगों की मौत
  • देश की राजधानी दिल्ली से सटे खोड़ा से अरुणाचल प्रदेश में सप्लाई के लिए बनाई जा रही जहरीली शराब पीने से चार लोगों की मौत

ईटानगर

देश की राजधानी दिल्ली से सटे खोड़ा से अरुणाचल प्रदेश में सप्लाई के लिए बनाई जा रही जहरीली शराब पीने से चार लोगों की मौत ने इलाके में अवैध तरीके से चल रहे शराब के धंधे का खुलासा कर दिया है। पुलिस-प्रशासन और आबकारी विभाग के सुस्त रवैये के कारण यह अवैध कारोबार जोरों शोरों से चल रहा था।


 



आबकारी विभाग की एक खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक, जिले के 49 गांवों और कॉलोनियों के 199 ऐसे पॉइंट है जहां अवैध शराब का कारोबार होता है। यह रिपोर्ट अवैध शराब के कारोबार को रोकने के लिए पुलिस-प्रशासन की कार्रवाई की पोल खोलती है। आबकारी विभाग की अब तक की गई जांच में पता लगा है कि खोड़ा में शराब की तस्करी हरियाणा से की गई थी। जो शराब की बोतल खोड़ा में मिली है वह शराब अरुणाचल प्रदेश में सप्लाई के लिए बनाई गई थी।

 

 



अभी तक की जांच में पता चला है कि जो शराब खोड़ा में बरामद हुई है उस पर हरियाणा का हॉलमार्क है। शराब देसी नहीं थी। खोड़ा से मिली शराब की बोतल की सप्लाई अरुणाचल प्रदेश में होनी थी। यह शराब तस्करी करके खोड़ा कैसे लाई गई इसकी जांच की जा रही है। शराब की तस्करी के सभी मामले में तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।


 



शराब के कारोबारीयों की माने तो, इस धंधे में कम लागत पर अधिक मुनाफा होता है, 40 रुपये की शराब की बोतल 100 रुपये में बिक जाती है। कानून की पेचीदगियों का लाभ आपराधियों को मिल जाता है। दरअसल अवैध रूप से बेची जाने वाले शराब पर अंकुश लगाने के लिए आबकारी अधिनियम में कड़ी सजा का प्रावधान नहीं है। ऐसे में आबकारी विभाग जब भी किसी को कच्ची शराब के साथ पकड़ता है तो उसका धारा 60 में चालान होता है। जिसमें आरोपी को तुरंत जमानत मिल जाती है।

 

 

 


आबकारी टीम यदि शराब के साथ शराब बनाने के उपकरण को भी जब्त करती है तो धारा 60-दो में कार्रवाई होती है। जिसमें अभियुक्त कोर्ट से एक दो दिन में जमानत पर छूट जाता है। इसी तरह टीम को छापेमारी के दौरान केमिकल मिलता है तो अभियुक्त का चालान खाद्य पदार्थ में मिलावट की आईपीसी की धारा 272 में किया जाता है, जिसमें भी आसानी से जमानत मिल जाती है।