CPM के राज में सुनील देवधर को लगा डर, तो अमित शाह ने किया दूर

Daily news network Posted: 2018-03-14 09:37:25 IST Updated: 2018-09-15 05:11:55 IST
CPM के राज में सुनील देवधर को लगा डर, तो अमित शाह ने किया दूर
  • त्रिपुरा में भाजपा की जीत में अहम भूमिका निभाने वाले सुनील देवधर को त्रिपुरा में काम करते हुए भय महसूस हो रहा था, ऐसा हम नहीं बल्कि खुद सुनील देवधर ने बताया है।

अगरतला

त्रिपुरा में भाजपा की जीत में अहम भूमिका निभाने वाले सुनील देवधर को त्रिपुरा में काम करते हुए भय महसूस हो रहा था, ऐसा हम नहीं बल्कि खुद सुनील देवधर ने बताया है।

 

 



सुनील देवधर ने बताया कि माकपा सरकार के कार्यकाल में भाजपा कार्यकर्ताओं पर लगातार हमले हो रहे थे। राज्य के मौजूदा मुख्यमंत्री बिप्लब देब के घर पर भी हमले हुए थे। भाजपा के 11 कार्यकर्ताओं की हत्या हो चुकी थी। उन्होंने कहा कि मुझ पर भी हमले का डर था, लेकिन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के आश्वासन के बाद मेरा डर खत्म हो गया। 




मंगलवार को मुंबई प्रेस क्लब में आयोजित एक कार्यक्रम में सुनील देवधर ने यह बातें पत्रकारों के साथ साझा की। सुनील देवधर ने कहा कि त्रिपुरा में वामपंथी कार्यकर्ताओं की दहशत थी। ऐसी स्थिति में एक दिन भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से मैंने बात की। उनसे कहा कि भले ही मुझे अपनी जान गवानी पड़े लेकिन त्रिपुरा में भाजपा की जीत पक्की है। इस पर भाजपा अध्यक्ष शाह ने उन्हें आश्वस्त किया कि माकपा कार्यकर्ता आप पर हमले की हिम्मत नहीं करेंगे क्योंकि उन्हें पता है कि मैंने आपको वहां भेजा है। देवधर ने कहा कि इसके बाद से मैं पूरी तरह निश्चिंत और बेखौफ हो गया।

 

 

 


 इसके साथ ही बीजेपी की सरकार बनने के बाद बीफ बैन पर लगातार उठ रहे सवालों पर जवाब देते हुए देवधर ने कहा कि, वहां अधिकांश लोग बीफ खाते हैं। कुछ हिंदू जनजातियों के लोग भी बीफ खाते हैं। उन्होंने बीफ का समर्थन करते हुए कहा कि लोकतंत्र में बहुसंख्यक समाज की भावनाओं का ख्याल रखना आवश्यक होता है। जहां लोग बीफ पर पाबंदी चाहते हैं वहां पाबंदी लगाई गई।

 

 



बता दें कि सुनील देवधर ने त्रिपुरा में माकपा का सफाया करने में अहम भूमिका निभाई है और इससे पहले सुनील देवधर के एक बयान में मीडिया में हलचल पैदा कर दी थी जिसमें उन्होंने कहा था कि त्रिपुरा में बीजेपी की स्थिति को मजबूत करने और संगठन खड़ा करने के लिए उन्होंने खुद पर बहुत काम किया, यहां तक कि अपने खान-पान की आदतों तक में भी बदलाव करते हुए उन्हें यहां पोर्क यानी सूअर का मांस भी खाना पड़ा।