त्रिपुरा: वामपंथियों के दावों की पोल खोल रहा है बीजेपी का ये नेता

Daily news network Posted: 2018-02-13 13:13:00 IST Updated: 2018-02-13 13:13:00 IST
त्रिपुरा: वामपंथियों के दावों की पोल खोल रहा है बीजेपी का ये नेता
  • 18 फरवरी को विधानसभा चुनाव के लिए मतदान होगा और भारतीय जनता पार्टी कम्युनिस्टों के इस मजबूत किले में सेंध लगाने का दावा कर रही है

अगरतला।

माणिक सरकार 1998 से सत्ता में हैं। इसी महीने 18 फरवरी को विधानसभा चुनाव के लिए मतदान होगा और भारतीय जनता पार्टी कम्युनिस्टों के इस मजबूत किले में सेंध लगाने का दावा कर रही है। भाजपा प्रमुख अमित शाह दो-तिहाई बहुमत से जीत हासिल करने का दावा कर रहे हैं। पिछले दो दशकों में यह पहली बार है जब भारतीय जनता पार्टी गठबंधन के साथ प्रदेश की सभी 60 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। त्रिपुरा के 2013 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने अपने 50 प्रत्याशियों को मैदान में उतारा था, जिनमें से 49 की जमानत जब्त हो गई थी।  आखिर पिछले पांच सालों में ऐसा क्या हो गया कि बीजेपी दो-तिहाई बहुमत से जीत का दावा कर रही है।

 


 दरअसल माणिक सरकार के आंकड़ों में साक्षरता दर के मामले में त्रिपुरा देश भर में अव्वल है। मानव विकास सूचकांक में भी बीजेपी शासित राज्यों से काफी आगे है। मनरेगा को लागू करने में भी त्रिपुरा पहले नंबर पर है। मुख्यमंत्री माणिक सरकार के बारे में कहा जाता है कि वो अशांत त्रिपुरा में शांति और सुरक्षा बहाल करने में कामयाब रहे है। ऐसे में अमित शाह त्रिपुरा के पिछडऩे की बात क्यों कह रहे हैं। इस सवाल के जवाब में त्रिपुरा में भाजपा प्रभारी सुनील देव धर कहते हैं कि त्रिपुरा में विकास के तमाम आंकड़े गलत साबित हुए हैं।

 


 सुनील कहते हैं कि शिक्षा के मामले में त्रिपुरा के आंकड़े गलत बताए जाते हैं। यहां आठवीं कक्षा में महज पंद्रह प्रतिशत बच्चे पास हो पाते हैं, सिफ नाम लिखना जानने से कोई शिक्षित कैसे हो सकता है। सुनील धर आगे कहते हैं कि त्रिपुरा में 67 प्रतिशत जनता गरीबी रेखा से नीचे रहती हैं। यहां महिलाओं पर अत्याचार होता है। अपराध के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। मनरेगा के जो आंकड़े त्रिपुरा सरकार ने जारी किए वे फर्जी थे। यहां मनरेगा का पूरा पैसा भी नहीं दिया जाता।