छोटी-सी भूल के लिए आत्महत्या करना उचित नहीं : नाथ

Daily news network Posted: 2017-12-19 15:39:14 IST Updated: 2017-12-19 15:39:14 IST
छोटी-सी भूल के लिए आत्महत्या करना उचित नहीं : नाथ
  • गुवाहाटी के टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशिएल साइंस के सभागार में बीते दिनों आत्महत्या व मानसिकता के जरिए जागरुकता की आवश्यता शीर्षक पर एक सेमिनार का आयोजन किया गया ।

असम

गुवाहाटी । गुवाहाटी के टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशिएल साइंस के सभागार में बीते दिनों आत्महत्या व मानसिकता के जरिए जागरुकता की आवश्यता शीर्षक पर एक सेमिनार का आयोजन किया गया । 

 




साप्ताहिक अंग्रेजी जी प्लस के तत्वावधान में और एयरटेल, भारतीय जीवन बीमा निगम, गुवाहाटी नगर निगम व स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के सहयोग में आयोजित कैंप्पस टॉक्स शीर्षक मासिक कार्यक्रम के तहत इस बार संस्करण में इस सेमिनार का आयोजन किया गया । 

 

 



तीन घंटे चले इस सेमिनार में नगर के जाने- माने मनोरोग विशेषज्ञ डा. संगीता गोस्वामी, गोहाटी हाईकोर्ट के अधिवक्ता निकिता बरुवा व गुवाहाटी पुलिस कमिश्नर हिरेन चंद्र नाथ उपस्थित थे । कार्यक्रम में डा. गोस्वामी ने कहा कि प्रत्येक  लोगों के जीवन में एक ऐसे रहते हैं, जिनसे हम अपने मन को बात करते है । 

 



 

हमारे जीवन में हर वह बातें अपने घरवाले से नहीं कह सकते, लेकिन उस सख्स से हम अपने दिल की बात वह अनुभव को बांटते है । उन्होंने कहा कि इम अपनी विचारों को साझा करते है । अगर हम अलगाव की ओर बढ़ रहे हैं तो हम समस्याओं का साझा करना अत्यंत आवश्यक है । 

 

 




अवसाद के आरंभिक चरणों का सबसे  आम लक्षण आत्म विस्वास की कमी, खानपान की  आदतों में बदलाव और मनोरंजन को अपनी उचित से अलग करना आदि है । उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि अगर कोई आत्महत्या की बात करता है या करनी की  कोशिश की बातें करता है तो इसे आप मजाक में न लें । 

 

 




 

बल्कि आप उसके पीछे कारण का पता लगाएं और उसकी बातों को समझने की कोशिश करें । मजाक में उठाए गए कदम भयावह हो सकती है । वहीं गुवाहाटी पुलिस कमिश्नर हिरेन चंद्र नाथ ने कहा कि जीवन बहुत कीमती है । युगों से विवर्तन के बाद मनुष्य सभ्यता के मुकाम पर पहुंचा है, इसलिए एक छोटी सी भूल के लिए पूरी जिदगी को खत्म करना उचित  नहीं है । 

 

 




उन्होंने कहा कि गुवाहाटी शहर में दो-तीन आत्महत्याओं की घटनाएं सामने आई  है । कानूनी पहलुओं पर बोलते हुए निकिता बरुवा ने कहा कि किसी को भी आत्महत्या करने के लिए कोई कानूनी सजा नहीं है। हालांकि  आत्महत्या को उकसाने के लिए भारतीय दंड विधि की धारा 306 के तहत दंडित किया जा सकता है । इसके लिए दस साल की सजा का प्रावधान भी है । कार्यक्रम में विद्यार्थियों के बील विचारों का अदनान-जिदान किया गया ।