बढ़ सकती है मोदी सरकार की मुश्किलें, CAB के खिलाफ इतना बड़ा होने जा रहा है विरोध

Daily news network Posted: 2019-12-08 08:45:33 IST Updated: 2019-12-08 08:45:33 IST
बढ़ सकती है मोदी सरकार की मुश्किलें, CAB के खिलाफ इतना बड़ा होने जा रहा है विरोध
  • असम में नागरिकता संशोधन बिल को लेकर विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। इसके विरोध में राजनीतिक सहित कई गैर राजनीतिक संगठन और छात्र संगठन सड़कों पर उतर आए हैं।

असम में नागरिकता संशोधन बिल को लेकर विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। इसके विरोध में राजनीतिक सहित कई गैर राजनीतिक संगठन और छात्र संगठन सड़कों पर उतर आए हैं। दिन प्रतिदिन यह आंदोलन असम सहित दिल्ली में तेज होता जा रहा है।

 


 बता दें कि आने वाले हफ्ते यह विधेयक संसद में पेश हो सकता है। इसे लेकर गुवाहाटी के कॉटन यूनिवर्सिटी के छात्र गुस्से में हैं और इसके खिलाफ बड़ा अभियान शुरू करने की तैयारी कर रहे हैं। कॉटन यूनिवर्सिटी को उत्तर पूर्व का जेएनयू भी मानते हैं। यहां के छात्र दो पूर्व छात्रों से ज्यादा नाराज हैं। वहीं भाजपा इस विधेयक का लागूे करवाने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती। इस विधेयक से परोसी देशों से आए गैर मुस्लिमों को भारतीय नागरिकता आसानी से मिल जाएगी।

 


गौर हो कि नागरिकता संशोधन बिल को संसद की कैबिनेट से मंजूरी मिल गई है। यदि यह बिल पास होता है तो देश के कई हिस्से ऐसे हैं जहां यह लागू नहीं होगा। जी हां, यह बिल पास होने के बाद कानून बन जाएगा, लेकिन असम, मेघालय, मिजोरम और त्रिपुरा के आदिवासी क्षेत्रों पर लागू नहीं होगा। यह बात इस विधेयक के प्रावधान में कही गई है।

 


 नागरिकता (संशोधन) विधेयक को लेकर नॉर्थ-ईस्ट में एक बार फिर से राजनीति तेज हो गई है। इस बिल की मुखालफत करने वाले ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (AASU) समेत तमाम संगठनों ने प्रस्तावित कानून को लेकर विरोध प्रदर्शन तेज करने का फैसला किया है। इसके जरिए अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से हिंदू, सिख, बौद्ध, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को भारत की नागरिकता मिल सकेगी।

 


 नागरिकता के लिए योग्य होने की कट-ऑफ डेट 31 दिसंबर, 2014 रखी गई है। विधेयक को संसद के मौजूदा सत्र में प्रस्तुत किया जा सकता है। दरअसल, नागरिकता संशोधन विधेयक में छठे शेड्यूल के तहत नोटिफाइड आदिवासी क्षेत्रों और सीमावर्ती इलाकों में ऐसे लोगों के बसने से संरक्षण का प्रावधान है।

 


 पूर्वोत्तर राज्यों की सरकारों, राजनीतिक दलों और नागरिक अधिकार समूहों के साथ बातचीत के बाद पूर्वोत्तर राज्यों के लिए इसमें संरक्षण के प्रावधान किए गए थे। पूर्वोत्तर राज्यों के राजनीतिक दलों ने जनवरी में लोकसभा की ओर से पारित किए गए विधेयक के पुराने संस्करण का विरोध किया था। इन दलों का कहना था कि यह कानून बनने पर असम संधि के प्रावधान बेकार हो जाएंगे। इस संधि में नागरिकता प्राप्त करने के लिए 25 मार्च, 1971 की कट-ऑफ डेट रखी गई थी। संधि के अनुसार, इसके बाद आने वाले प्रवासियों को अवैध माना जाएगा और उन्हें निर्वासित किया जाएगा।


 इनर लाइन परमिट अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम और नागालैंड में लागू हैं। इसके अलावा छठे शेड्यूल के तहत 10 एरिया हैं। ये एरिया असम (तीन), मेघालय (3), मिजोरम (तीन) और त्रिपुरा (एक) में हैं। इनर लाइन परमिट बंगाल ईस्टर्न फ्रंटियर रेगुलेशन, 1873 के तहत संबंधित राज्यों में भारतीयों के जाने को नियंत्रित करता है।


 इस विधेयक से केंद्र सरकार को ओवरसीज सिटीजंस ऑफ इंडिया (OCI) कार्ड होल्डर्स का रजिस्ट्रेशन इसके प्रावधानों या अन्य कानूनों के उल्लंघन की स्थिति में रद्द करने की भी शक्ति मिलेगी। विधेयक के पिछले संस्करण में देश में रहने की कुल अवधि 11 वर्ष के बजाय छह वर्ष करने की सिफारिश की गई थी। नए संस्करण में अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई लोगों के लिए इसके स्थान पर '5 वर्ष से कम नहीं' की सिफारिश की गई है।


 

 ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (AASU) ने असम, नागालैंड और मणिपुर के संगठनों के साथ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात में कहा था कि CAB कानून बनने लायक नहीं है। यूनियन ने दावा किया कि यह असम की जनता के हितों के खिलाफ है। उधर असम के वित्त मंत्री हिमंता बिस्व सरमा ने कहा कि नागरिकता संसोधन विधेयक को 9 और 10 दिसंबर को क्रमश: लोकसभा और राज्यसभा में पेश किया जा सकता है।