कांग्रेस का बड़ा आरोप, एनआरसी में गड़बड़ियों के लिए केंद्र जिम्मेदार

Daily news network Posted: 2019-09-12 14:00:21 IST Updated: 2019-09-12 20:02:31 IST

गुवाहाटी

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रिपुन बोरा ने कहा है कि नागरकिता कानून संशोधन विधेयक को लेकर मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल की चुप्पी से उनका पाखंड उजागर हो गया है। बोरा के मुताबिक एनआरसी में कथित गड़बडिय़ों का जिम्मेदार केंद्र ही है। बोरा ने सवालिया लहजे में कहा कि इस विधेयक को लेकर जिस समय अन्य सभी राजनेता और दूसरे प्रदेशों के मुख्यमंत्री अपना रुख साफ कर रहे हैं, हमारे जातीय नायक चुप क्यों हैं। 




बोरा ने राजीव भवन में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि नागालैंड, मेघालय और मिजरोम के मुख्यमंत्रियों ने तो साफ कर दिया है कि वे विधेयक का विरोध करेंगे, फिर भी हमारे राज्य के मुख्यमंत्री कुछ नहीं कह रहे हैं। यहां तक कि क्षेत्रीय पार्टी अगप के अध्यक्ष अतुल बोरा भी मौन हैं। इससे इनका ढोंग जाहिर हो जाता है। उन्होंने कहा कि यह साफ है कि भाजपा नागरिकता संसोधन विधेयक को बहुत जल्द लागू करा देगी। वह जबरन इस विधेयक को असम सहित पूर्वोत्तर पर थोपना चाहती है। जहां तक कांग्रेस का सवाल है तो वह विधेयक का विरोध जारी रखेगी। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने सवाल उठाया कि पड़ोसी देशों के गैर मुस्लिमों को इस विवादास्पद कानून के माध्यम से नागरिकता देकर सरकार स्थानीय मूल के नागरिकों के हितों की रक्षा कैसे करेगी। बोरा के मुताबिक इससे तो विदेशी यहां भरते रहेंगे। उन्होंने राय जताई कि यह सब असम के लोगों को अनुच्छेद 371 हटाने का भय दिखा मौन रखने का हथकंडा है। भाजपा किसी न किसी तरह नागरिकता कानून संशोधन पर आमादा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा अब एनआरसी में गड़बडिय़ों की बात कर रही है ताकि वह विदेशी मुद्दे को बरकार रख चुनावों में वोट हासिल कर सके।




 प्रदेश अध्यक्ष ने सवाल उठाया कि भाजपा नेतृत्व ने एनआरसी अद्यतन से समय आपत्तियां दर्ज क्यों नहीं कराई थीं। अब एनआरसी की शिकायत कौन कर रहा है। बोरा ने कहा कि दूसरा ड्राफ्ट एनआरसी जारी होने पर लगभग 41 लाख लोगों को उसमें शामिल नहीं किया गया था। तब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने एनआरसी का सारा श्रेय ले लिया था और कहा था कि इतने विदेशी घुसपैठिए पहचान लिए गए हैं। उन्होंने कहा कि अब पूर्ण एनआरसी जारी होने के बाद भाजपा नेता कथित त्रुटिपूर्ण एनआरसी का श्रेय नहीं लेना चाहते, बल्कि एक तरह का मौन साध लिया है।