असम के कुछ जिलों से हट सकता है अफस्पा, स्थानीय लोग उठा रहे हैं मांग

Daily news network Posted: 2018-04-24 10:13:40 IST Updated: 2018-04-24 10:13:40 IST
असम के कुछ जिलों से हट सकता है अफस्पा, स्थानीय लोग उठा रहे हैं मांग
  • मेघालय से विवादास्पद आम्र्ड फोर्स स्पेशल पॉवर्स एक्ट (अफस्पा) को पूरी तरह से हटा लिया गया

गुवाहाटी।

मेघालय से विवादास्पद आम्र्ड फोर्स स्पेशल पॉवर्स एक्ट (अफस्पा) को पूरी तरह से हटा लिया गया है। इसके साथ ही अरुणाचल प्रदेश के कई क्षेत्रों से इस एक्ट को हटाया गया।  केंद्र सरकार के इस फैसले का स्थानीय लोगों ने जोरदार स्वागत किया है, जहां लंबे समय से इस कानून का विरोध चल रहा था। उधर, अब संभावना इस बात की भी बन रही है कि असम के कुछ जिलों से भी अफस्पा को खत्म किया जा सकता है।



 

बता दें कि केंद्र सरकार ने अप्रैल महीने में ही असम के आठ पुलिस स्टेशन के इलाकों में आम्र्ड फोर्स स्पेशल पावर एक्ट (अफस्पा) को छह महीने तक के लिए बढ़ा दिया था। गृहमंत्रालय द्वारा जारी नोटिफिकेशन के अनुसारए अफस्पाए 1958 कानून के तहत असम की सीमा के आठ पुलिस स्टेशनों को अशांत क्षेत्र घोषित किया गया था।



 

आठ पुलिस स्टेशन हैं, पश्चिम कामेंग जिले में बालेमु और भालुक्पोंग पुलिस स्टेशन, पूर्व कामेंग जिले में सेजोसा पुलिस स्टेशन, पापुम्पेयर जिले में बलिजान पुलिस स्टेशन, नमसई जिले के नामसई और महादेवपुर पुलिस स्टेशन, लोअर दिबांग वैली जिले के रोइंग पुलिस स्टेशन और लोहित जिले के सूर्यपुरा पुलिस स्टेशन शामिल हैं। अधिनियम के तहत सुरक्षा अधिकारियों को अशांत क्षेत्रों में विभिन्न कार्यों को पूरा करने के लिए विशेष अधिकार प्रदान करता है। यह सुरक्षा कर्मियों को वारंट के बिना परिसर की खोज और गिरफ्तारी की शक्ति प्रदान करता है।



 

स्थानीय लोगों का कहना है कि असम में भी उग्रवादी घटनाएं बहुत कम हो गई हैं और राज्य सरकार जल्द ही कुछ जिलों से इस कानून को हटा सकती है। बता दें कि पूर्वोत्तर के मानवाधिकार संगठन लंबे समय से अफस्पा को न केवल हटाने बल्कि इस कानून को खत्म करने के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं। इस मांग ने उस समय और जोर पकड़ लिया, जब मणिपुर की एक महिला का रेप कर उसकी हत्या कर दी गई। 




स्थानीय लोगों का आरोप है कि असम राइफल्स के जवानों ने इस घटना को अंजाम दिया था। अरुणाचल प्रदेश और नगालैंड के लिए समीक्षा जहां केंद्र सरकार करती है, वहीं असम और मणिपुर की सरकार पिछले साल से खुद ही अशांत क्षेत्र घोषित करती हैं। अफस्पा लागू करने के लिए अशांत क्षेत्र घोषित करना जरूरी होता है।