समय से पहले ही अरुणाचल और सिक्किम की विधानसभाएं होंगी भंग, मोदी सरकार बना रही है योजना

Daily news network Posted: 2018-04-13 15:04:13 IST Updated: 2018-04-13 17:50:16 IST
समय से पहले ही अरुणाचल और सिक्किम की विधानसभाएं होंगी भंग, मोदी सरकार बना रही है योजना
  • अरुणाचल प्रदेश और सिक्मिक की विधानसभा को समय से पहले भंग किया जा सकता है।

अरुणाचल प्रदेश और सिक्मिक की विधानसभा को समय से पहले भंग किया जा सकता है। दरअसल मोदी सरकार चाहती है कि लोकसभा और राज्यों के विधानसभा चुनाव एक साथ हों। मोदी सरकार के समय से पहले लोकसभा चुनाव करवाने पर विचार कर रही है। अगर समय से पहले लोकसभा चुनाव कराए गए तो सिक्किम, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, अरुणाचल प्रदेश, ओडिशा, हरियाणा और महाराष्ट्र को अपनी विधानसभाओं को 6 से 11 महीने पहले भंग करने के लिए मनाया जा सकता है। 



 

इस वक्त अरुणाचल-सिक्किम में किसकी है सरकार

बता दें कि साल 2016 में अरुणाचल प्रदेश की राजनीति में अचानक हलचल मची और मुख्यमंत्री पेमा खांडू के नेतृत्व में पीपुल्स पार्टी ऑफ  अरुणाचल (पीपीए) के 43 में से 33 विधायकों के भाजपा में शामिल हो गए। इसके साथ ही अरुणाचल में बीजेपी सरकार का गठन हो गया। खांडू ने विधानसभा अध्यक्ष तेंजिंग नोरबू थोंगदोक के सामने विधायकों की परेड कराई। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने विधायकों के भाजपा में शामिल होने को मंजूरी दे दी। इस पूरे  घटनाक्रम की शुरुआत उस वक्त हुई पीपीए के अध्यक्ष काहफा बेंगिया ने कथित पार्टी विरोधी गतिविधि के लिए खांडू, उपमुख्यमंत्री चौवना मेन और पांच विधायकों को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया। राज्य में नॉर्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस (एनईडीए) सरकार की गठबंधन सहयोगी पीपीए ने टकाम पेरियो को राज्य का नया मुख्यमंत्री चुना। हालांकि राजनीतिक समीकरण तब बदल गए जब शुरुआत में पेरियो को समर्थन देने वाले पीपीए के अधिकतर विधायक बाद में खांडू के खेमे में चले गए। इसी तरह सिक्किम की विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी का एक भी विधायक नहीं है, लेकिन राज्य में सत्ताधारी सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का हिस्सा है। इस तरह सिक्किम भी उन राज्यों की सूची में आ जाता है जहां बीजेपी और उसके सहयोगियों की सरकारें हैं।



 



इन विकल्पों पर विचार कर रही है सरकार

बता दें कि एक साथ चुनाव के लिए केंद्र को संविधान में संशोधन करना पड़ेगा, लेकिन सरकार इससे बचने के रास्ते तलाश रही है। सरकार जिन 2 विकल्पों पर विचार कर रही है, उनमें से एक यह है कि उन राज्यों में राष्ट्रपति शासन लगा दी जाए जहां आम चुनाव के ठीक बाद विधानसभा चुनाव होने हैं। इस तरह उन राज्यों के चुनाव भी आम चुनाव के साथ करा लिए जाएं। हालांकि इस तरह भी एक साथ लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव मुमकिन नहीं होंगे मगर यह उस दिशा में शुरुआती बड़ा कदम हो सकता है।



 

नई दिशा तय कर सकता है सरकार का कदम

वहीं जिन राज्यों में लोकसभा चुनाव के कुछ ही महीनों बाद चुनाव होने हैं, उन राज्यों को अपनी-अपनी विधानसभाओं को भंग करने के लिए मनाया जा सकता है, ताकि वे एक साथ चुनाव की प्रक्रिया का हिस्सा बन सकें। सरकार जिस दूसरे विकल्प पर विचार कर रही है, वह है समय से पहले लोकसभा चुनाव। सरकार नवंबर-दिसंबर में लोकसभा चुनाव करा सकती है ताकि वह 4 राज्यों के विधानसभा चुनाव के साथ ही संपन्न हो। दोनों विकल्पों में सरकार को संविधान में संशोधन की जरूरत नहीं पड़ेगी। संविधान संशोधन में बहुत ज्यादा वक्त लगेगा और सरकार को इसके लिए काफी मशक्कत भी करनी पड़ेगी। इस मामले से जुड़ी चर्चा की जानकारी रखने वाले सूत्रों ने एक अंग्रेजी अखबार को बताया कि इन विकल्पों में से किसी को लागू भी किया गया तो लोकसभा और सभी राज्यों के विधानसभा चुनाव एक साथ नहीं हो सकते। हालांकि यह देश में एक साथ चुनाव के लिए दिशा तय कर सकता है। 



 


शीर्ष मंत्री इन विकल्पों पर लेंगे आखिरी फैसला 

एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट के अनुसार छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान में राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है। इन राज्यों की विधानसभाओं का मौजूदा कार्यकाल दिसंबर में खत्म हो रहा है, जबकि सामान्य परिस्थितियों में अप्रैल-मई में लोकसभा चुनाव होने हैं। इसके अलावा मिजोरम को भी लोकसभा चुनाव के साथ ही विधानसभा चुनाव के लिए मनाया जा सकता है।  महाराष्ट्र और हरियाणा की सरकारों से विधानसभा के कार्यकाल को 6 महीने पहले ही खत्म करने के लिए मनाया जा सकता है। दोनों राज्यों में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। इस तरह लोकसभा चुनाव के साथ ही विधानसभा चुनाव वाले राज्यों की संख्या बढ़ाकर 11 की जा सकती है। सिक्किम, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, अरुणाचल प्रदेश और ओडिशा उन राज्यों में शामिल हैं जहां लोकसभा के साथ ही विधानसभा के चुनाव होने हैं। अगर समय से पहले लोकसभा चुनाव कराए गए तो सिक्किम, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, अरुणाचल प्रदेश, ओडिशा, हरियाणा और महाराष्ट्र को अपनी विधानसभाओं को 6 से 11 महीने पहले भंग करने के लिए मनाया जा सकता है। सूत्रों ने बताया कि केंद्र सरकार के शीर्ष मंत्री इन विकल्पों पर आखिरी फैसला लेंगे।