सिक्किम विश्वविद्यालय ने प्रोफेसर को हटाया, छात्रा ने लगाया था गंभीर आरोप

Daily news network Posted: 2019-05-15 10:19:36 IST Updated: 2019-05-15 10:32:37 IST
सिक्किम विश्वविद्यालय ने प्रोफेसर को हटाया, छात्रा ने लगाया था गंभीर आरोप
  • सिक्किम विश्वविद्यालय ने एक छात्रा द्वारा अपने विभाग के एक प्रोफेसर के खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराए जाने के बाद उसे पद से हटा दिया।

नई दिल्ली

सिक्किम विश्वविद्यालय ने एक छात्रा द्वारा अपने विभाग के एक प्रोफेसर के खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराए जाने के बाद उसे पद से हटा दिया। एसयू के रजिस्ट्रार प्रोफेसर टी के कौल ने एक अधिसूचना में बताया है कि आरोपी प्रोफेसर जन संचार विभाग का अध्यक्ष है। उसके विभाग में जाने और विद्यार्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन करने पर रोक लगा दी गई है। कौल ने बताया कि जन संचार विभाग के विभागाध्यक्ष को उनके विभाग की एक छात्रा द्वारा उन पर लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच पूरी होने तक पद से हटा दिया गया है।



रजिस्ट्रार ने बताया कि पीड़िता ने एक लिखित शिकायत दायर की और विश्वविद्यालय की आंतरिक शिकायत समिति की सिफारिशों के आधार पर निर्णय लिया गया। कौल ने बताया कि आंतरिक शिकायत समिति ने मामले में प्रारंभिक जांच की और आरोपी प्रोफेसर के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की। गौरतलब है कि यह इस तरह का कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले सिंबियोसिस लॉ स्कूल, हैदराबाद के एक सहायक प्रोफेसर को यौन उत्पीड़न के आरोपों के चलते निलंबित कर दिया गया था।


 बीए एलएलबी पाठ्यक्रम की दो छात्राओं की शिकायत पर संस्थान की अंतरिम शिकायत समिति ने पिछले साल 16 अक्टूबर को प्रोफेसर को निलंबित कर दिया। दोनों छात्राओं ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर यौन उत्पीड़न की शिकायत की थी। इसी से जुड़े घटनाक्रम में ‘‘तथ्यों को तोड़-मरोड़कर'' पेश करने और ‘‘इन दोनों छात्राओं द्वारा की गई अनुशासनहीनता के मुद्दे से ध्यान भटकाने'' के प्रयास के आरोप में दोनों छात्राओं को परिसर खाली करने के लिए कहा गया था।


 सिंबियोसिस इंटरनेशनल के रजिस्ट्रार की तरफ से जारी बयान में कहा गया था कि सिंबियोसिस लॉ स्कूल हैदराबाद की दोनों छात्राएं पिछले एक-दो वर्षों से लगातार अनुशासनहीनता में संलिप्त थीं, जिससे संस्थान की छवि खराब हो रही थी, कक्षाएं, छात्रावास की जीवनचर्या आदि में बाधा आ रही थी।'' रजिस्ट्रार के मुताबिक, दोनों छात्राएं परिसर के प्रशासन, कर्मचारियों और सुरक्षाकर्मियों के साथ दुर्व्यवहार में भी संलिप्त थीं। रजिस्ट्रार ने कहा था कि विस्तृत जांच के बाद दोनों छात्राओं को परिसर खाली करने के लिए कहा गया।