नई सरकार ने छीन ली 8 हजार से ज्यादा लोगों की नौकरी, जानिए क्यों

Daily news network Posted: 2019-06-19 13:22:04 IST Updated: 2019-06-19 20:59:55 IST
  • सिक्किम में सत्ता परिवर्तन होते ही युवाओं की नौकरियों पर बन आई है। मुख्यमंत्री पी.एस गोले के नेतृत्व वाली नई सरकार ने 8 हजार से ज्यादा निुयक्तियां रद्द कर दी है।

गंगटोक

गंगटोक। सिक्किम में सत्ता परिवर्तन होते ही युवाओं की नौकरियों पर बन आई है। मुख्यमंत्री पी.एस गोले के नेतृत्व वाली नई सरकार ने 8 हजार से ज्यादा निुयक्तियां रद्द कर दी है। इस संबंध में आदेश भी जारी कर दिया गया है। नई सरकार का कहना है कि ये नियुक्तियां अवैध थी, इसलिए उन्हें रद्द किया गया है। आपको बता दें कि पवन चामलिंग के नेतृत्व वाली सरकार ने वन फैमिली वन जॉब स्कीम लॉन्च की थी। इसके तहत प्रत्येक परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की घोषणा की गई थी। नए प्रशासन ने वन फैमिली वन जॉब स्कीम के तहत हुई 40 फीसदी नियुक्तियों को रद्द कर दिया है।


1 मई को पर्सनल डिपार्टमेंट ने 10 मार्च को लागू आदर्श आचार संहिता के बाद ड्यूटी ज्वाइन करने वालों की निुयक्ति को रद्द करने का आदेश जारी कर दिया। पूर्व मुख्यमंत्री चामलिंग ने जनवरी में वन फैमिली वन जॉब स्कीम की घोषणा की थी। कहा गया कि प्रशासन 20 हजार लोगों को नियुक्ति देगा। पहले चरण में करीब 12 हजार युवाओं को अस्थायी नौकरी दी गई। इससे सिक्किम ऐसा राज्य बन गया जहां प्रत्येक छठा व्यक्ति सरकारी कर्मचारी हो गया।


2011 की जनगणना के मुताबिक राज्य की कुल आबादी करीब 6 लाख 20 हजार है। इनमें से करीब 1 लाख राज्य कर्मचारी हैं। मुख्यमंत्री पी.एस.गोले के राजनीतिक सचिव जैकब खालिंग ने कहा, जिनको मॉडल कॉड ऑफ कंडक्ट के बाद नियुक्ति दी गई और जिन्होंने अपनी ड्यूटी ज्वाइन की उनकी संख्या 8 हजार है। सत्तारुढ़ सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा(एसकेएम) के प्रवक्ता खालिंग ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार ने भर्ती नियमों का पालन नहीं किया और इसका भी प्रोपर रिकॉर्ड नहीं है कि किन्हें नियुक्त किया गया और किस आधार पर। कई ऐसे उदाहरण भी हैं जहां एक ही परिवार के पांच सदस्यों को भर्ती कर दिया गया।


ग्रैजुएट्स को चपरासी के पदों पर नियुक्त किया गया। 10 वीं पास लोगों को एलडीसी और इंजीनियरिंग करने वालों को स्वीपर बना दिया गया। उन्होंने कहा कि सरकार जांच समिति गठित करेगी और योग्य युवाओं को नौकरी देने से लिए प्रत्येक चीज को वैरिफाई करेंगे। एसडीएफ के प्रवक्ता एम.के.सुब्बा ने कहा कि हम नियुक्तियों को रद्द करने के लिए सरकार के आदेश की निंदा करते हैं। साथ ही दो सप्ताह में आदेश वापस लेने की मांग करते हैं। नहीं तो हम कोर्ट जाएंगे। एसडीएफ ने सोमवार को सरकारी आदेश रद्द करने की मांग करते हुए गंगटोक में प्रदर्शन भी किया। जो नई भर्तियां की गई उनकी सैलरी 9 हजार से 12 हजार रुपए तक है। हालांकि विधानसभा चुनाव में एसडीएफ को इस स्कीम का राजनीतिक लाभ नहीं मिला और सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा की सरकार बन गई।