इस राज्य में भाजपा ने किया बड़ा धमाका, एक झटके में विपक्षी पार्टी का किया सूपड़ा साफ, जानिए कैसे

Daily news network Posted: 2019-08-13 14:00:29 IST Updated: 2019-08-13 14:35:08 IST
इस राज्य में भाजपा ने किया बड़ा धमाका, एक झटके में विपक्षी पार्टी का किया सूपड़ा साफ, जानिए कैसे

सिक्किम में एक बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के तहत प्रभावशाली सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट (एसडीएफ) के 10 विधायक मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गये। एसडीएफ के 10 विधायकों ने भाजपा महासचिव राम माधव की उपस्थिति में यहां पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। एसडीएफ के विधायकों ने भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जे पी नड्डा से भी मुलाकात की।




सिक्किम में विकास का मुद्दा शुरू से ही काफी महत्वपूर्ण रहा है, पूर्वोत्तर के इस राज्य में शुरू से ही क्षेत्रीय दलों का दबदबा रहा है जहां कांग्रेस और भाजपा जैसे दोनों ही राष्ट्रीय दलों को अपनी जगह बनाने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा है। सिक्किम का रणनीतिक रूप से भी काफी महत्व है क्योंकि यह चीन, भूटान और नेपाल के काफी समीप है। उल्लेखनीय है कि इस वर्ष सिक्किम में हुए विधानसभा चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग के नेतृत्व वाली एसडीएफ को आश्चर्यजनक रूप से एक अन्य क्षेत्रीय दल सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट ने पूर्वोत्तर के प्रमुख प्रदेश सिक्किम पर 25 सालों तक शासन किया। 




बता दें कि बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष जे. पी. नड्डा और महासचिव राम माधव की मौजूदगी में मंगलवार को पार्टी के संस्थापक तथा पांच बार के मुख्यमंत्री चामलिंग सहित 5 अन्य विधायकों को छोड़ बाकी सभी विधायक बीजेपी से जुड़ गए। पार्टी में अभी कुल 15 विधायक हैं। बीजेपी सिक्किम विधानसभा चुनाव में एक भी सीट नहीं जीत सकी थी, लेकिन अब बीजेपी के वहां 10 विधायक हो गए हैं। बता दें कि 1993 में पवन चामलिंग ने एसडीएफ का गठन किया था। पार्टी ने उसके बाद से हुए सभी पांच विधानसभा चुनावों में जीत दर्ज की। पार्टी ने 1994, 1999, 2004, 2009, 2014 के विधानसभा चुनावों में पूर्ण बहुमत से सरकार बनाई थी। हालांकि इस साल हुए चुनावों में एसडीएफ को हार का सामना करना पड़ा। 

 



क्षेत्रीय दलों पर राज्य की जनता का विश्वास लगातार बना रहा है। 1994 में चामलिंग की पार्टी एसडीएफ 19 सीटों पर विजयी रही। वहीं, नर बहादुर भंडारी के नेतृत्व वाली सिक्किम संग्राम परिषद (एसएसपी) 10 सीटों के साथ दूसरे नंबर पर रही। वर्ष 1999 विधानसभा चुनाव में भी क्षेत्रीय दलों का दबदबा रहा। चामलिंग की पार्टी 24 सीटों के साथ सत्ता में आई, जबकि एसएसपी मुख्य विपक्षी दल रही। फिर 2004 में चामलिंग की एसडीएफ ने सभी 32 सीटों पर जीत हासिल कर विपक्ष को खत्म कर दिया। उनकी पार्टी 2014 में पांचवीं बार जीतकर सत्ता में आई। उसे 22 सीटें मिली थीं। 

 

 

एसडीएफ से बगावत कर 2013 में सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा (एसकेएम) बनाने वाले प्रेम कुमार तमांग उर्फ पी. एस. गोले ने एसडीएफ के 25 साल के राज को समाप्त करते हुए प्रदेश में सरकार बनाई। 32 सीटों वाले सिक्किम विधानसभा में एसडीएफ को 15 सीटें मिलीं, जबकि सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा को 17 सीटें मिलीं। प्रेम तमांग के नेतृत्व में नई सरकार का गठन हुआ। फिलहाल सिक्किम की एकमात्र लोकसभा सीट पर भी एसकेएम का ही कब्जा है। गौरतलब है कि 2016 में असम में पहली बार सरकार बनाने के बाद बीजेपी की अगुवाई वाली एनडीए ने नॉर्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस का गठन किया था। सिक्किम सहित अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड, मणिपुर, असम के मुख्यमंत्री इस गठबंधन का हिस्सा बने थे।